'Tribal Pride Fortnight' will be observed from November 1 to 15.

भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर होगा समापन

नई दिल्ली। जनजातीय समुदायों की गौरवशाली विरासत, स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जनजातीय कार्य मंत्रालय 1 से 15 नवंबर 2026 तक देशभर में ‘जनजातीय गौरव पखवाड़ा’ मनाएगा। इसका समापन 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर आयोजित ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के साथ होगा। इस दौरान देशभर में विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन, स्वास्थ्य शिविर और जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

मंत्रालय के अनुसार, यह पखवाड़ा केवल जनजातीय नायकों को याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक रहने वाले जनजातीय परिवारों तक पहुंचाने और समुदायों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का विशेष अभियान भी है।

2021 में हुई थी जनजातीय गौरव दिवस की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने वर्ष 2021 में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती, 15 नवंबर, को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में घोषित किया था। इसका उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान और देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक विरासत में जनजातीय समुदायों की भूमिका को सम्मान देना है।

पिछले वर्षों में इस दिवस का आयोजन 2021 में रांची, 2022 और 2023 में खूंटी, 2024 में जमुई तथा 2025 में डेडियापाड़ा में किया गया। वर्ष 2024-25 में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव वर्ष मनाया गया था। इस दौरान 28 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम और दो लाख से ज्यादा गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 3.8 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया।

राष्ट्रपति भवन में विद्यार्थियों से संवाद, दिल्ली में साहित्य महोत्सव

जनजातीय गौरव पखवाड़े के तहत कई प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 12 नवंबर को एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) के लगभग 200 विद्यार्थी राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से संवाद करेंगे। वहीं, 12 और 13 नवंबर को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव आयोजित होगा, जिसमें देशभर के जनजातीय लेखक हिस्सा लेंगे।

आईआईटी दिल्ली में ‘आदि वाणी’ को जनजातीय जीवंत विरासत और राष्ट्रीय जनजातीय भाषा भंडार के रूप में सुदृढ़ करने के विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी।

14 नवंबर को होने वाले ‘रानी दुर्गावती आदिवासी महिला सम्मेलन’ में 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की लगभग 500 जनजातीय महिला उद्यमी शामिल होंगी। सम्मेलन का उद्देश्य महिला उद्यमियों को बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना और महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों को मजबूत करना है।

स्वास्थ्य, पोषण और छात्रवृत्ति पर विशेष जोर

जनजातीय गौरव पखवाड़े के दौरान स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी योजनाओं को गति देने पर भी जोर रहेगा। 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक ‘स्वास्थ्य-पोषण सेवा संगम’ के तहत पीएम-जनमन बहुउद्देशीय केंद्रों में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के लिए स्वास्थ्य, पोषण और सरकारी योजनाओं से संबंधित शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

1 और 2 नवंबर को हैदराबाद में नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लगभग 1,500 पारंपरिक चिकित्सकों के लिए क्षमता विकास सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह एक लाख पारंपरिक चिकित्सकों को प्रशिक्षित और प्रमाणित करने की व्यापक पहल का हिस्सा है।

इसके अलावा, 73 जिलों में छात्रवृत्ति शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां विद्यार्थियों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने और आधार कार्ड को आपस में जोड़ने में सहायता मिलेगी। ओडिशा के कोरापुट में सीएसआईआर-एनबीआरआई के सहयोग से 200 से 300 औषधीय पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।

76,963 गांवों में स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण

‘धरती आबा जनभागीदारी अभियान’ के तहत ‘आदि सेवा समय’ और ‘आदि सेवा दिन’ के माध्यम से जनजातीय गांवों में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के जरिए 76,963 गांवों में लगभग 1.54 लाख ‘आदि कर्मयोगी स्वयंसेवकों’ को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना, जनजातीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाना और योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाना है।

300 से अधिक परियोजनाओं की शुरुआत

जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर विभिन्न राज्यों में जनजातीय समुदायों के विकास से जुड़ी 300 से अधिक परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इनमें 228 परियोजनाओं का उद्घाटन और 74 परियोजनाओं का शिलान्यास प्रस्तावित है।

प्रमुख परियोजनाओं में अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में नए जनजातीय अनुसंधान संस्थान भवन और मिजोरम के केल्सिह में ‘रोपुलियानी जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय’ का निर्माण शामिल है।

दो राष्ट्रीय डिजिटल पहलों का शुभारंभ

इस अवसर पर जनजातीय समुदायों के लिए दो महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों की शुरुआत भी की जाएगी।

पहली पहल ‘जन-एचआईटी’ यानी जनजातीय स्वास्थ्य आसूचना एवं प्रौद्योगिकी पोर्टल है, जिसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सहयोग से विकसित किया गया है। यह जनजातीय स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल मंच होगा, जिसके तहत 20 राज्यों को कवर किया जाएगा।

दूसरी पहल ‘राष्ट्रीय एफआरए डिजिटल प्लेटफॉर्म’ है। इसके माध्यम से वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत वन अधिकारों के दावों की प्रक्रिया को डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जाएगा। ग्राम सभा में आवेदन जमा करने से लेकर डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त अधिकार-पत्र प्राप्त करने तक की प्रक्रिया को एक ही मंच पर लाने का लक्ष्य है।

देशभर में होंगे सांस्कृतिक और जनजागरूकता कार्यक्रम

जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से 19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 160 से अधिक गतिविधियों की योजना बनाई गई है। इनमें एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

प्रमुख आयोजनों में आंध्र प्रदेश का राज्यस्तरीय जनजातीय कार्निवल, गोवा का ‘आदिवासी कला एवं खेल समागम’, ओडिशा में ‘भगवान बिरसा मुंडा पैवेलियन’, शिलांग में जनजातीय संगीत महोत्सव और गुजरात के अहमदाबाद हाट में जनजातीय कला एवं शिल्प मेला शामिल हैं।

इसके अलावा, विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक उत्सव, प्रदर्शनियां, स्कूलों और छात्रावासों में प्रतियोगिताएं, सिकल सेल स्क्रीनिंग, पीवीटीजी समुदायों के लिए आयुष्मान कार्ड शिविर तथा वन अधिकारों से संबंधित कानूनी जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे।

नागरिकों से भागीदारी की अपील

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने नागरिकों से इस राष्ट्रीय उत्सव में भाग लेने की अपील की है। लोग अपने आसपास आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के साथ ‘माईगव’ पर जनजातीय गौरव दिवस से संबंधित क्विज में भाग ले सकते हैं और शपथ अभियान से जुड़ सकते हैं। इसके साथ ही जनजातीय कारीगरों के उत्पादों को प्रोत्साहित करने तथा सोशल मीडिया पर #JanjatiyaGauravDivas और #JJGD2026 के साथ अपनी कहानियां साझा करने का भी आह्वान किया गया है।

जनजातीय गौरव पखवाड़े का उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा सहित जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ जनजातीय समुदायों के विकास, अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तीकरण को नई गति देना है।

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