“A nation that values ​​the dignity of its workers is invincible on the path of progress” Dr. Mandaviya
नई दिल्ली – केंद्रीय श्रम और रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज बडगाम के ओमपोरा में 30 बिस्तरों वाले कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पताल का उद्घाटन किया। इससे जम्मू-कश्मीर में श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और सामाजिक सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। नव उद्घाटन किया गया यह अस्पताल कश्मीर का पहला ईएसआईसी अस्पताल है, जो इस क्षेत्र में श्रमिक कल्याण सेवाओं के विस्तार में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

 

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा, “जो देश अपने श्रमिकों की गरिमा को महत्व देता है, वह प्रगति के पथ पर अजेय है।” उन्होंने आगे कहा कि यह कार्यबल ही है जिसके अथक प्रयासों से राष्ट्र आगे बढ़ता है, और इसलिए श्रमिकों का कल्याण शासन के केंद्र में रहना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार देश के प्रत्येक श्रमिक के लिए गरिमा, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

डॉ. मांडविया ने कहा, “श्रमिक कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को वैश्विक मान्यता मिली है। 2025 में, अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ ने हमारे देश को ‘सामाजिक सुरक्षा में उत्कृष्टता’ पुरस्कार से सम्मानित किया। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, हमारी सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64.3 प्रतिशत हो गई है।”

पिछले वर्ष लागू किए गए चार श्रम संहिताओं के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन सुधारों ने भारत के श्रम तंत्र को आधुनिक बनाया है और इसे अधिक श्रमिक-केंद्रित, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार किया है। उन्होंने कहा, “नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के लिए कई लंबे समय से प्रतीक्षित सुरक्षा उपायों की गारंटी देती हैं, जिनमें वार्षिक स्वास्थ्य जांच, अनिवार्य नियुक्ति पत्र और न्यूनतम मजदूरी शामिल हैं। ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से वार्षिक स्वास्थ्य जांच का प्रावधान बीमारियों का शीघ्र पता लगाने, श्रमिकों के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने में सहायक होगा।”

मंत्री जी ने कहा कि 1952 में अपनी स्थापना के बाद से ईएसआईसी देश में श्रमिक कल्याण के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बन गया है। आज, यह योजना पूरे भारत में 3.84 करोड़ बीमित व्यक्तियों और लगभग 15 करोड़ लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के साथ ईएसआईसी के एकीकरण से सूचीबद्ध अस्पतालों में लाभार्थियों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा और भी व्यापक हो गई है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत, डॉ. मनुस्क मांडविया ने ओमपोरा में अस्पताल के निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों को सम्मानित किया और जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के बीमित व्यक्तियों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा लाभ भी प्रदान किए।

165 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस अस्पताल में 100 बिस्तरों तक विस्तार की सुविधा है और इससे 50,000 से अधिक श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। ईएसआई योजना 16 अक्टूबर, 1989 को जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में शुरू की गई थी, जिसमें जम्मू, कठुआ और श्रीनगर के लगभग 7,000 श्रमिकों को शामिल किया गया था। वर्तमान में, ईएसआई योजना जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के सभी जिलों में लागू है, जिससे लगभग 1,83,119 बीमित व्यक्तियों और लगभग 7,00,000 लाभार्थियों को लाभ मिल रहा है। इसका संचालन जम्मू स्थित ईएसआईसी क्षेत्रीय कार्यालय और जम्मू-कश्मीर कर्मचारी राज्य बीमा सोसायटी (जेकेईएसआईएस) के माध्यम से किया जाता है।

उद्घाटन समारोह में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, ईएसआईसी, स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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