Shri Amit Shah today replied to the discussion in the Lok Sabha on the Delimitation Bill, 2026, the Constitution (131st Amendment) Bill, 2026, and the Union Territories Laws (Amendment) Bill, 2026.
नई  दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोक सभा में परिसीमन विधेयक 2026, संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक 2026 और संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा का उत्तर दिया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि इस चर्चा में 130 सदस्यों ने अपनी बात रखी है जिनमे 56 महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान विपक्षी गठबंधन ने स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण विधेयक का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह विरोध अमल के तरीकों का नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ महिला आरक्षण का विरोध है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि संविधान सभा द्वारा हमारे लोकतंत्र की नींव में रखे गए एक व्यक्ति, एक वोट और एक मूल्य के सिद्धांत को लागू किया जाए।

श्री अमित शाह ने कहा कि हमारे संविधान में समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान किया गया है और परिसीमन के प्रावधान से ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की संख्या बढ़ती है। उन्होंने कहा कि परिसीमन का विरोध करने वाले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सीटों में वृद्धि का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संतुलित, समावेशी और व्यावहारिक लोकतांत्रिक ढांचा तैयार करने की ज़िम्मेदारी संविधान ने सरकार को दी है और अभी यह ज़िम्मेदारी नरेन्द्र मोदी जी की सरकार को दी गई है। श्री शाह ने कहा कि संघीय संतुलन बनाए रखना, लोक सभा में जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व लाना औऱ राज्यों की शक्तियों के बीच संतुलन बनाना भी परिसीमन के उद्देश्य हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ नए भूगोल, प्रशासनिक वास्तविकताओं, शहरीकरण और सड़क, रेल आदि से बढ़ी हुई कनेक्टिविटी और नए ज़िलों का संज्ञान भी परिसीमन मे लेना होता है। श्री शाह ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 81, 82 और 170 में इन सभी सिद्धांतों को समाहित किया गया है औऱ उनके निर्वहन के लिए नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ये संविधान संशोधन लाई है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण, समान प्रतिनिधित्व और संतुलित संघीय ढांचे के निर्माण करने की ज़िम्मेदारी के निर्वहन से ही ये विधेयक आए हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नारीशक्ति वंदन अधिनियम में जिक्र किया गया है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 1971 में विपक्षी पार्टी की सरकार ने इसे फ्रीज़ किया था और इसी कारण हमें इसका जिक्र करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि 1971 से अब तक सीटों की संख्या फ्रीज़ रही है और आज 127 सीटें ऐसी हैं जिनमें 20 लाख से अधिक वोटर्स हैं। इन सीटों पर एक मत, एक वोटर और एक मूल्य के सिद्धांत का पूर्ण उल्लंघन होता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि सबसे पहले 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने परिसीमन विधेयक लाकर सीटों को 525 से बढ़ाकर 545 किया और फिर इसे फ्रीज कर दिया। उन्होंने कहा कि 1976 में सत्ता बचाने के लिए आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन द्वारा परिसीमन पर रोक लगा दी गई थी। उस वक्त भी मुख्य विपक्षी पार्टी ने ही परिसीमन से देश की जनता को वंचित रखा था और आज भी मुख्य विपक्षी पार्टी ही देश को परिसीमन से वंचित रख रही है। उन्होंने कहा कि 2001 में 84वां संशोधन हुआ और 2026 तक सीटों की संख्या को फ्रीज कर दिया गया। 1976 से 2026 तक के 50 वर्षों तक देश की जनता को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। श्री शाह ने कहा कि 2026 में यह सीमा समाप्त हो गई है और अब परिसीमन करने पर यह प्रक्रिया 2029 से पहले पूरी नहीं हो सकता क्योंकि परिसीमन आयोग को हर मतक्षेत्र में जाकर पब्लिक हियरिंग देनी होती है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि 1976 में देश की आबादी 54.79 करोड़ थी और आज 140 करोड़ है। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व है कि जब सदन के सदस्यों की संख्या बढ़ेगी तो सरकार सदन के कामकाज के दिनों की संख्या भी बढ़ाए। उन्होंने कहा कि हम हर राज्य की सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि कर रहे हैं जिससे किसी भी राज्य का प्रोरेटा नहीं हो। उन्होंने कहा कि कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि जनगणना समय पर क्यों नहीं हुई। श्री शाह ने कहा कि 2021 में जनगणना होनी थी लेकिन उसी समय इस सदी की सबसे बड़ी महामारी कोविड का संकट आया और उसके कारण जनगणना संभव नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि कोविड का संकट समाप्त होने के बाद देश को इससे उबरने में काफी समय लगा। श्री शाह ने कहा कि जब 2024 में जनगणना की शुरुआत हुई तब कुछ दलों ने उचित मांग उठाई कि जाति के आधार पर जनगणना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सबके साथ चर्चा के बाद निर्णय लिया गया कि हम जाति जनगणना कराएंगे। अब जो जनगणना हो रही है उसमें जाति की गणना भी होगी। श्री शाह ने कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी के समय में पहले जो भी जनगणना हुई, उस समय जाति जनगणना नहीं होती थी और न ही कभी धर्म पूछा जाता था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2026 की जनगणना जाति के साथ कराने का निर्णय किया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि जब से यह बिल आया है तब से विपक्ष ने भ्रांतियां फैलानी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहली भ्रांति फैलाई गई कि जाति जनगणना को टालने के लिए सरकार यह संविधान संशोधन लेकर आई है। श्री शाह ने कहा कि सरकार तीन माह पहले ही जाति जनगणना का पूरा टाइम टेबल घोषित कर चुकी है, इसीलिए जाति जनगणना को टालने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि एक और भ्रांति फैलाई गई कि दक्षिण के राज्यों के साथ अन्याय होगा। श्री शाह ने कहा कि दक्षिण के राज्यों का भी इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर के राज्यों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप का भी इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार का। गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष को उत्तर-दक्षिण के नैरेटिव के साथ देश के टुकड़े-टुकड़े नहीं करने चाहिए बल्कि इससे ऊपर उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने संविधान हाथ में लेकर शपथ ली है, वे लोग उत्तर-दक्षिण का भेद करना चाहते हैं जो हम कभी नहीं होने देंगे। श्री शाह ने कहा कि जो भी सदस्य संसद में शपथ लेता है, वह भारत को अक्षुण्ण रखने और और पूरे भारत के कल्याण की शपथ लेता है। उन्होंने कहा कि कोई भी सदस्य अपनी कॉन्स्टिट्यूएंसी, अपने राज्य, अपने धर्म और अपनी जाति की शपथ नहीं लेता है। गृह मंत्री ने कहा कि देश का विभाजन कर कोई सत्ता प्राप्त नहीं कर सकता।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि परिसीमन आयोग और संवैधानिक सुधार को लेकर यह नैरेटिव फैलाया जा रहा है कि इसमें प्रतिनिधित्व की दृष्टि से दक्षिण के राज्यों का नुकसान होगा, जबकि यह सच नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल में लोक सभा की सीटों की कुल संख्या 129 हैं, जो देश में लोक सभा की कुल 543 सीटों का 23.76 प्रतिशत है। अगर इसमें 50 प्रतिशत सीटों की वृद्धि करके पांचों राज्यों में सीटों का आवंटन किया जाएगा, तब सीटों की संख्या 129 से बढ़ कर 195 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद देश में लोक सभा की कुल सीटों की संख्या जब 816 हो जाएगी, तब दक्षिणी राज्यों को आवंटित होने वाली सीटें कुल सीटों का 23.87 प्रतिशत होगी। उन्होंने कहा कि देश की कुल लोक सभा सीटों में अभी पाँच दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी 23.76 प्रतिशत, जो परिसीमन के बाद थोड़ा बढ़कर 23.87 प्रतिशत हो जाएगी।

गृह मंत्री ने कहा कि सदन में कुछ सदस्यों ने एक और भ्रांति फैलाई कि मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण मिले। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान, सरकार और हमारी पार्टी की नीति स्पष्ट है कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता। आरक्षण जन्म से ही मिलता है, किसी प्रकार से प्राप्त नहीं किया जा सकता। श्री शाह ने कहा कि संविधान में कहीं भी धर्म के आधार पर आरक्षण देने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन के नेता तुष्टीकरण की राजनीति के कारण इस देश में मुस्लिम आरक्षण की मांग करना चाहते हैं और फिर संविधान की बातें भी करते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण हम न देंगे और न ही कभी किसी को देने देंगे।

श्री अमित शाह ने कहा कि इस देश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सबसे बड़ा विरोधी पार्टी अगर कोई है तो वह मुख्य विपक्षी पार्टी है। उन्होंने कहा कि 1957 में ओबीसी को आरक्षण की सिफारिश करने वाली काकासाहेब कालेलकर समिति के सुझाव आए, लेकिन उस समय की सरकार में रही मुख्य विपक्षी पार्टी ने वह रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डाल दी। जब मंडल आयोग की रिपोर्ट आई, तो विपक्षी पार्टी की सरकार ने उसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया। जब 1990 में वीपी सिंह जी की सरकार बनी, तब उन्होंने मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू किया। उस वक्त विपक्षी पार्टी के सबसे बड़े नेता ने अपने जीवन का सबसे लंबा भाषण मंडल आयोग का विरोध करने के लिए दिया। श्री शाह ने कहा कि विपक्षी पार्टी ने 1951 और 1971 दोनों में जाति जनगणना का भी विरोध किया।

श्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के लिए चुनाव जीतना सर्वोपरि है, लेकिन हमारे लिए राष्ट्र और राष्ट्र की जनता सर्वोपरि है। राष्ट्र की जनता का प्रतिनिधित्व और भागीदारी का हित सबसे जरूरी है। संविधान को लागू करने के लिए जवाबदेही, पारदर्शिता, समान अवसर और न्याय की रक्षा हमारे लिए बेहद जरूरी है। विपक्ष का दिखावटी प्रेम पूरे देश की जनता भी जानती है, और आज से देश की महिलाएं भी जानेंगी कि उनका अधिकार विपक्षी पार्टी ने छीना है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि सबसे पहले 1992 में श्री नरसिम्हा राव जी की सरकार 72वें और 73वें संविधान संशोधन को लेकर आई और महिलाओं को पंचायत में 33% आरक्षण देने का सराहनीय काम किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद 1996 में एच डी देवगौड़ा जी प्रधानमंत्री बने और 81वां संविधान संशोधन विधेयक सितंबर 1996 में लाया गया, जिसका कुछ पार्टियों ने विरोध किया। फिर विधेयक पर विचार के लिए गीता मुखर्जी कमेटी का गठन किया गया। जब तक गीता मुखर्जी समिति की रिपोर्ट आई, तब तक 11वीं लोकसभा का विघटन हो गया और बिल लैप्स हो गया। फिर 1998 में 84वां संविधान संशोधन आया, लेकिन उन्हीं पार्टियों ने फिर से विरोध किया, बिल को सदन में प्रस्तुत करने की स्थिति भी नहीं रही और 12वीं लोकसभा के विघटन पर वह बिल लैप्स हो गया। श्री शाह ने कहा कि 1999 से 2003 तक 85वां संविधान संशोधन विधेयक आया। फिर से उन्हीं पार्टियों ने विरोध किया और बिल लैप्स हो गया। 2008 से 2014 तक मनमोहन सिंह जी 108वां संविधान संशोधन विधेयक लेकर आए और राज्यसभा में प्रस्तुत किया। राज्यसभा में बिल पारित भी हुआ, मगर उस बिल ने लोकसभा का दरवाजा कभी नहीं देखा। श्री शाह ने कहा कि हमारी पार्टी ने उसका विरोध नहीं किया था, बल्कि सरकार को समर्थन देने वाली पार्टियों ने ही विरोध किया। इसका स्पष्ट अर्थ है कि सरकार के इशारे पर, सरकार का हिस्सा बनी हुई पार्टियों ने लोकसभा में इस बिल को पेश नहीं होने दिया।

श्री अमित शाह ने कहा कि 2023 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी जानबूझकर महिला आरक्षण विधेयक लाए। उन्हें मालूम था कि 2024 में चुनाव है। कितनी भी बनावट हो, लेकिन विपक्षी पार्टी इसका विरोध नहीं कर पाएगी। जब यह नया संसद भवन बना, तब सर्वानुमति से सबसे पहले नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ। राज्यसभा में भी यह पारित हुआ। लेकिन जब इसे लागू करने की बात आई तब विपक्ष आज फिर से इसका विरोध कर रहा है, देश की महिलाएं यह कभी नहीं भूलेंगी। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां जब चुनाव में जाएंगी तो उन्हें महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

गृह मंत्री ने कहा कि कुछ लोग पूछते हैं कि बदलाव की जरूरत क्या है? उन्होंने कहा कि पहली लोकसभा में 22 महिला सदस्य चुनकर आई। छठी लोकसभा में 19, आठवीं में 44, 14वीं में 51, 17वीं में रिकॉर्ड 78 और 18वीं लोकसभा में में 75 महिला सदस्य चुनकर आईं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े हमारी माताओं-बहनों की राजनीति में हिस्सेदारी लेने की उत्सुकता को प्रदर्शित करते हैं।

श्री अमित शाह ने कहा कि हमने letter and spirit में महिला आरक्षण के लिए ‘women led development’ का अनुसरण किया है। प्रधानमंत्री जी के पहले मंत्रिमंडल में 10 महिलाएं थीं। सुषमा स्वराज जी दिल्ली की, उमा भारती जी मध्य प्रदेश और वसुंधरा राजे जी राजस्थान की पहली मुख्यमंत्री बनीं। आनंदीबेन पटेल गुजरात की पहली मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने कहा कि 70 साल में विपक्षी पार्टी ने कभी इन राज्यों में महिला मुख्यमंत्री को जगह नहीं दी। उन्होंने कहा कि हमने श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को इस देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनाया। हम तीन दशकों से रिजेक्ट हो रहे बिल को लेकर आए। मगर दुख है कि पहले भी जिस बिल को विपक्ष ने पारित नहीं करने दिया, और आज फिर किंतु-परंतु, अगर-मगर से विरोध करने के लिए खड़े हो गए। गृह मंत्री ने कहा कि 14 लाख महिलाएं अब तक जनप्रतिनिधि के रूप में देश की पंचायतों में काम कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सबल बनाने और विधायी संस्थाओं में उन्हे हिस्सेदारी देने के लिए किसी भी विरोध का सामना करना पड़े, हम संघर्ष करते रहेंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिला आरक्षण विधेयक का विरोध हो रहा है। हमने जब धारा 370 समाप्त की तो विपक्ष ने उसका विरोध किया। राम मंदिर बनाया तो विरोध किया, सीएए लाए, तो विरोध किया गया। ट्रिपल तलाक समाप्त किया, तो विरोध हुआ। जीएसटी लाए, तो विरोध किया। आयुष्मान भारत योजना का विरोध किया। नया संसद भवन बनाया, तब विरोध हुआ। मत्स्य पालन और सहकारिता मंत्रालय बनाया, तो विरोध किया। सीडीएस का पद बनाया तो विरोध हुआ। नक्सलवाद खत्म किया, तो विरोध किया। आतंकवाद पर सख्ती का विरोध किया। सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध किया। एयर स्ट्राइक का विरोध किया। ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मोदी जी जो कुछ भी कर रहे हैं, विपक्ष उसका विरोध करता है। आज देश की माताओं-बहनों के लिए आरक्षण आ रहा है, इसका विरोध नहीं होना चाहिए था, लेकिन विपक्ष इसका भी विरोध कर रहा है।

गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष इसका विरोध इसलिए कर रहा क्योंकि यह मोदी जी ला रहे हैं। अगर महिला आरक्षण हो जाता है तो देश की माताओं-बहनों में मोदी जी का यश बढ़ेगा। विपक्ष को लगता है कि महिलाएं मोदी जी को ज्यादा वोट देती हैं। उन्हें भला क्यों रिजर्वेशन दे? उन्होंने कहा कि 2023 में इस सदन में सभी पार्टियों और सभी सदस्यों ने देश की महिलाओं को 33% आरक्षण का वादा किया था, लेकिन आज विपक्ष इससे पीछे हट रहा। यह पहली बार नहीं हुआ। विपक्ष शाहबानो मामले में भी पीछे हटा। ट्रिपल तलाक में भी पीछे हटा और अब तक जितनी बार महिला आरक्षण आया, वह सभी में पीछे हटा।

श्री अमित शाह ने कहा कि हमारे नेता ने तो कहा कि सभी सदस्य अंतरात्मा की आवाज से वोट करें। लेकिन यहां आत्मा ही नदारद है, अंतरात्मा कहां से लाएं? उन्होंने कहा कि ये रूथलेस पॉलिटिक्स है। विपक्ष के नेता चुनाव में जहां-जहां जाएंगे, उन्हे इस देश की महिलाओं के आक्रोश को सहन करना पड़ेगा।

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