
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सहायक प्रोफेसर (भारतीय भाषाएं) डॉ. जगदीशन टी. ने “तमिल करकलाम – आइए तमिल सीखें” विषय पर एक विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों के बारे में बात की। उन्होंने भारत की भाषाई विविधता के महत्व पर जोर दिया और कहा कि भारतीय भाषाओं को सीखने से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना में सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है। सत्र का समापन तमिल भाषा और उसकी विरासत पर छात्रों के साथ एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ।
काशी-तमिल संगमम 4.0 का आधिकारिक उद्घाटन 2 दिसंबर को होगा। हालांकि, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और वाराणसी के अन्य संस्थानों में अकादमिक, सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियाँ पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करना और देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच अधिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना है।

वसंत कॉलेज फॉर विमेन में आयोजित कार्यक्रम का समापन वंदनम के साथ हुआ, जिसने प्रतिभागियों को काशी और तमिलनाडु की साझा सांस्कृतिक परंपराओं पर विचार करने का अवसर प्रदान किया। छात्रों, संकाय सदस्यों और आमंत्रित अतिथियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। आने वाले दिनों में अकादमिक, संवादात्मक और सांस्कृतिक कार्यक्रम जारी रहेंगे, जो दोनों क्षेत्रों की साझा विरासत को और उजागर करेंगे तथा भारत की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करेंगे।
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