High Court directed to restart MNREGA in Bengal

उच्च न्यायालय ने केंद्र व बंगाल सरकार को आईना दिखाया

कोलकाता,18 जून (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। कलकत्ता हाई कोर्ट ने आज केंद्र व बंगाल सरकार को आईना दिखाते हुए सख्ती दिखाई। आज कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को बंगाल में फिर से मनरेगा शुरू करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार इस योजना को एक अगस्त से शुरू करे। चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम और जस्टिस चैताली चटर्जी दास की बेंच ने यह आदेश दिया।

हालांकि, कुछ क्षेत्रों में अनियमितताओं की जांच जारी रह सकती है। बंगाल में यह योजना पिछले करीब तीन साल से स्थगित है। साथ ही कोलकाता हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को राज्य के कुछ जिलों जैसे पूर्व बर्द्धमान, हुगली, माल्दा और दार्जिलिंग में अनियमितताओं के आरोपों की जांच जारी रखने की अनुमति दी।

कोर्ट ने कहा कि मनरेगा के क्रियान्वयन के प्रभारी अधिकारियों को विशेष शर्तें लगाने का अधिकार होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जो चीजें तीन साल पहले हुई थी, वह फिर से दोबारा न हो। हाई कोर्ट कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह बिना किसी विफलता के अगस्त 2025 से योजना को लागू करे। बंगाल में यह योजना पिछले करीब तीन साल से स्थगित है.

केंद्र सरकार ने 2022 में फंडिंग रोक दी थी, जिसके कारण राज्य के लाखों श्रमिक प्रभावित हुए। हाई कोर्ट ने कहा कि इस समय अदालत का प्रयास इस योजना का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है, जो राज्य में पिछले करीब तीन साल से स्थगित है। दरअसल, केंद्र सरकार ने 2022 में फंडिंग रोक दी थी, जिसके कारण राज्य के लाखों श्रमिक प्रभावित हुए।

केंद्र ने आरटीआई के जवाब में कहा कि 63 लोकेशन में से 31 में अनियमितताएं पाई गईं, जिसके चलते फंडिंग रोकी गई थी।2021-22 में पश्चिम बंगाल को मनरेगा के तहत 7,507.80 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन इसके बाद तीन साल तक कोई फंड नहीं दिया गया।

बहरहाल बता दे कि, एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल को वित्तीय वर्ष 2021-22 में मनरेगा के तहत 7,507.8 करोड़ रुपये मिले, लेकिन अगले तीन वित्तीय वर्षों में उसे कोई धनराशि नहीं मिली।

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