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यह गाँव चाईबासा से 22 किलोमीटर पश्चिम की ओर जंगल के बीच में स्थित है

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पश्चिमी सिंहभूम :-  यह झारखंड राज्य का एक जिला है। इस जिले का मुख्यालय चाईबासा है। प्रकृति ने पश्चिमी सिंहभूम को कई अकूत सौंदर्य व खनिजों से नवाजा है | आज पश्चिमी सिंहभूम के दर्शनीय स्थलों कि ओर चलते है |

पर्यटन स्थल :-

जोजोहातु :-     यह गाँव चाईबासा से 22 किलोमीटर पश्चिम की ओर जंगल के बीच में स्थित है | यह जगह लौह अयस्क के खदानों तथा टिस्को कम्पनी के लिए प्रसिद्ध है |

केरा :-     यह गाँव चक्रधरपुर ब्लाक के मुख्यालय से 10 किलोमीटर उत्तर-पूरब की स्थित है | यह अपने हर वर्ष मनाए जाने वाले चैत्र संक्रान्ति के मेले की वजह से प्रसिद्ध है | यह मेला तीन दिनों तक चलता है | इस गाँव में एक भगवती माता कि मंदिर भी है, जिस वजह भरी संख्या में श्रद्धालु इस गाँव कि ओर खींचे आते है |

कोटगढ़ :-   यह गाँव जगन्नाथपुर ब्लाक में स्थित है | स्थानीय मान्यता के अनुसार सिर्फ एक सदी पहले यहाँ शक्तिशाली शासकों का राज था, जिनका विस्तार जगन्नाथपुर, मंझरी, मंझगांव तथा चक्रधरपुर तक था | नरपत सिंह के बनाये कई किले जगन्नाथपुर, कोटगढ़ तथा जयंतपुर में आज भी उपस्थित है, जिससे इस बात का अनुमान होता है कि नरपत सिंह इस राजवंश के अंतिम शासक थे |

लुपुनगुटु :-    यह छोटा सा गाँव चाईबासा शहर से 2 किलोमीटर दूर पश्चिम में स्थित है | यह एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है | इस गाँव एक प्राकृतिक झरना है जो बारहों मास एक ही स्थिति में प्रवाहित होते रहती है |

महादेबसल :-   यह स्थान गोइलकेरा से 5 किलोमीटर कि दुरी पर स्थित है | इस गाँव का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है देवो के देव महादेव का मंदिर, प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में एक बहुत विशाल मेले का आयोजन होता है |

पोरहट :-  यह गाँव प्रसिद्ध पोरहट राज के काल में उस राज्य का मुख्यालय हुआ करता था | पोरहट राज लगभग पूरे पश्चिमी सिंहभूम में फैला हुआ था | इसलिए इस गाँव का महत्व इसके अतीत कि वजह से भी बढ़ जाता है |

रामतीर्थ :-     यह गाँव जगन्नाथपुर ब्लाक में स्थित है | यह स्थान प्रतिवर्ष जनवरी मास में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाले मेले की वजह से प्रसिद्ध है | इस मेले का आयोजन बहुत ही बड़े स्तर पर किया जाता है | इस गाँव में बैतरनी नदी के ऊपर एक झरना है तथा इसी जगह शिव मंदिर की उपस्थिति बहुत ही मनमोहक दृश्य उत्पन्न करती है | स्थानीय निवासियों का यह मानना है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान राम ने इस बैतरनी नदी को पार किया था, इसलिए इस दिन अर्थात् मकर संक्रांति के दिन इस मेले का आयोजन किया जाता है |

बेनीसागर :-   यह जगह पश्चिमी सिंहभूम व ओड़िसा के बोर्डर पर स्थित है | इस जगह का यह नाम राजा बेनी के नाम पर पड़ा है | यह जगह पुरातात्विक खोजों कि वजह से मशहूर है | प्रसिद्ध खिचिंग मंदिर भी इसी से संबंधित है |

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