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मेहनत और एकाग्रता हो तो बनो चार्टर्ड अकाउंटेंट

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पिछले कुछ वर्षों में मल्टीनेशनल कंपनियों के देश में आगमन की वजह से जॉब के क्षेत्र की रौनक बढ़ी है। इनके अलावा स्थानीय कंपनियां भी रोजगार के एक बड़े हब के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। इसके चलते तेजी से विकास करती भारतीय अर्थव्यवस्था में फाइनेंस एवं अकाउंट्स से जुड़े लोगों की मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। जाहिर है इससे संबंधित करियर भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते नजर आ रहे हैं। आर्थिक उदारीकरण के बाद इसमें तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) भी उन्हीं में से एक है। किसी भी संस्थान में सीए का काम बेहद सम्मानजनक एवं चुनौतीपूर्ण होता है। वे उस संस्थान अथवा कंपनी से जुड़े सभी अकाउंट एवं फाइनेंस संबंधी कार्यों के प्रति उत्तरदायी होते हैं। इसके अलावा इनका कार्य मनी मैनेजमेंट, ऑडिट अकाउंट का एनालिसिस, टैक्सेशन, रिटेनरशिप तथा फाइनेंशियल एडवाइज उपलब्ध कराने से भी संबंधित है।

 

क्या काम है सीए का

कंपनी एक्ट के अनुसार केवल सीए ही भारतीय कंपनियों में बतौर ऑडिटर नियुक्त किए जा सकते हैं। इसका फायदा देख कर ही कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां चार्टर्ड अकाउंटेंसी के क्षेत्र में कदम रख रही हैं। देश की इकोनॉमी को नियंत्रित करने, इससे जुड़े सिस्टम का ऑडिट और उसे सर्टिफाई करने का काम सीए के जिम्मे होता है। बैंक अपना सालाना ऑडिट सीए से ही कराते हैं। शेयरों की खरीद-फरोख्त में भी बैलेंस शीट देखी जाती है। बैंक व शेयर से अलग हट कर विभिन्न टैक्सों के भुगतान का हिसाब-किताब तक सीए के जिम्मे होता है।

बारहवीं के बाद प्रवेश शुरू

इसके एंट्री लेवल कोर्स सीपीटी में प्रवेश लेने के लिए छात्र के पास 12वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसमें कॉमर्स व मैथ्स की जानकारी सम्यक सहायता दिलाती है। सीपीटी के बाद आईपीसीसी व उसके बाद एफसी कोर्स में प्रवेश मिलता है। फाइनल कोर्स के बाद छात्र आईसीएआई में एनरोल कराने के योग्य हो जाते हैं।

तीन लेवल के कोर्स मौजूद

दि इंस्टीटय़ूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ही एकमात्र संस्था है, जो सीए का कोर्स कराती है और उसके बाद लाइसेंस देती है। सीए का कोर्स तीन लेवल में पूरा होता है-

कॉमन प्रॉफिशिएंसी कोर्स (सीपीटी)- सीपीटी सीए के एंट्री लेवल का कोर्स है। इसमें चार विषयों जैसे अकाउंटिंग, मर्केटाइल लॉ, जनरल इकोनॉमिक्स एवं क्वांटिटेटिव एप्टीटय़ूड को शामिल किया जाता है। यह 200 माक्र्स का होता है तथा इसके लिए दो घंटे निर्धारित होते हैं। यह एग्जाम ऑब्जेक्टिव टाइप का होता है तथा इसमें गलत उत्तर दिए जाने पर निगेटिव मार्किंग का प्रावधान है।

इंटिग्रेटेड प्रोफेशनल कॉम्पीटेंस कोर्स (आईपीसीसी)- यह नौ महीने का थ्योरिटिकल कोर्स है। इसमें अकाउंटिंग, बिजनेस एवं कंपनी लॉ, एथिक्स एंड कम्युनिकेशन, कॉस्ट अकाउंटिंग एवं फाइनेंशियल मैनेजमेंट, टैक्सेशन, एडवांस अकाउंटिंग, ऑडिटिंग एंड एश्योरेंस, आईटी एंड स्टैट्रिजिक मैनेजमेंट आदि विषयों को शामिल किया गया है। यह परीक्षा दो ग्रुप व सात पेपरों में  होती है। इसके बाद सीए फाइनल कोर्स में दाखिला मिलता है।

फाइनल कोर्स (एफसी)- यह सीए कोर्स की सबसे अंतिम अवस्था है। इसमें छात्रों को फाइनेंशियल रिपोर्टिंग, ऑडिटिंग, प्रोफेशनल एथिक्स, टैक्सेशन, कार्पोरेट लॉ, सिस्टम कंट्रोल, स्ट्रैटिजिक फाइनेंस व एडवांस मैनेजमेंट एकाउंटेंसी के बारे में जानकारी दी जाती है। फाइनल कोर्स कम्प्लीट करने के साथ ही छात्रों को जनरल मैनेजमेंट एंड कम्युनिकेशन स्किल्स  कोर्स भी पूरा करना होता है। यह परीक्षा दो ग्रुप तथा आठ पेपरों में होती है। सभी परीक्षाएं क्लीयर करने के बाद उन्हें आईसीएआई में मेंबरशिप के लिए आवेदन करना होता है।

आवश्यक स्किल्स

सीए बनने के लिए छात्रों को शैक्षिक योग्यता के अलावा अपने अंदर अन्य कई तरह के गुण पैदा करने पड़ते हैं। यह प्रोफेशन खासकर उन लोगों के लिए है, जो दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कठिन मेहनत की क्षमता रखते हों। उन्हें कॉमन सेंस, प्रशासनिक कौशल, अकाउंटिंग व एथिक्स, गणितीय कौशल, निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के साथ-साथ करेंट अफेयर्स से अपडेट रहना जरूरी है।

फीस की रूपरेखा

सीए की तीनों ही परीक्षाओं में फीस की रूपरेखा अलग-अलग होती है। सीपीटी में जहां छात्रों को प्रॉस्पेक्टस, रजिस्ट्रेशन, जर्नल आदि के रूप में 6,700 रुपए देने होते हैं, वहीं आईपीसीसी की 10,600 रुपए तथा फाइनल कोर्स की फीस 12,250 रुपए तय की गई है। इसके अलावा आर्टिकिलशिप ट्रेनिंग फीस 2000 रुपए,100 घंटे के इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी टेस्ट (आईटीटी) की फीस 4000 रुपए, 35 घंटे के ओरिएंटेशन प्रोग्राम की फीस 3000 रुपए तथा जीएमसीएस की फीस 4000 रुपए तय की गई है। सभी कोर्स व प्रोग्राम मिला कर यह 42,550 रुपए के करीब बैठती है।

सेलरी

आजकल घरेलू कंपनियों में सीए प्रोफेशनल्स को जूनियर लेवल पर 15,000-20,000 रुपए प्रतिमाह तथा सीनियर लेवल पर 30,000-35,000 रुपए प्रतिमाह मिलते हैं, जबकि दो-तीन साल का अनुभव होने पर यही राशि 55,000-60,000 रुपए प्रतिमाह के करीब पहुंच जाती है। विदेशी कंपनियां इन्हें लाखों के पैकेज पर रख रही हैं। यदि किसी कंपनी से नहीं जुडऩा चाहते तो स्वतंत्र रूप से अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

रोजगार के भरपूर अवसर

सीए प्रोफेशनल्स के रूप में आप देश-विदेश की कंपनियों में फाइनेंस, अकाउंट्स एवं टैक्स डिपार्टमेंट में फाइनेंस मैनेजर, अकाउंट्स मैनेजर, फाइनेंशियल बिजनेस एनालिस्ट, ऑडिटिंग/इंटरनल ऑडिटर, स्पेशल ऑडिटर सहित चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर, सीईओ, फाइनेंस डायरेक्टर, फाइनेंशियल कंट्रोलर, चीफ अकाउंटेंट, चीफ इंटरनल ऑडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम कर सकते हैं। इसके साथ ही प्राइवेट प्रैक्टिस व कंसल्टेंसी में रोजगार के अवसर मिलते हैं। अधिकांश सीए कार्पोरेट घरानों को बिजनेस एडवाइज देने तथा प्रोजेक्ट प्लानिंग का काम भी करते हैं। विदेशों में भी भारतीय प्रोफेशनल्स को अवसर मिल रहे हैं। सभी सरकारी व प्राइवेट बैंकों, पब्लिक लिमिटेड कंपनियों, ऑडिटिंग फम्र्स, फाइनेंशियल कंपनियों, म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट कंपनियों, इनवेस्टमेंट हाउस, स्टॉक ब्रोकिंग फम्र्स, लीगल फम्र्स व हाउस आदि में तेजी से नौकरियां सृजित हो रही हैं।

हार्डवर्किंग फील्ड है सीए

सीए प्रोफेशन भारतीय परिदृश्य में हमेशा से ही फिट बैठता आया है। देश की अर्थव्यवस्था को विकसित देश की श्रेणी की ओर ले जाने के लिए जो 2020-30 विजन तैयार किया गया है, उसमें सीए की बहुत बड़ी भूमिका है। इसका स्कोप कई कारणों से है। कंपनी लॉ कहता है कि किसी भी ऐसी कंपनी, जिसका टर्नओवर 60 करोड़ है, उसका टैक्स ऑडिट कराना जरूरी है। साथ ही यह भी नियम है कि उसका ऑडिटर सीए होना चाहिए।आजकल इतने सारे लॉ आ गए हैं, जिनके बारे में जानकारी और उनसे अपडेट रहने की जिम्मेदारी सीए ही उठा सकते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि कंपनियां सही चीज भी गलत तरीके से करती हैं, जिसके चलते उन्हें भारी वित्तीय नुकसान होता है। बतौर सीए उस नुकसान से कंपनी को बचाया जा सकता है। जहां तक इसमें कोर्स करने का सवाल है तो बिना कोर्स के सीए बनने की कल्पना करना भी बेमानी है। इसके कोर्स की संरचना काफी विस्तार लिए हुए है। छोटी-मोटी असफलता पर इसमें हारने की जरूरत नहीं है। यह लम्बी लड़ाई होती है। ऐसे में इसमें वही छात्र टिके रह सकते हैं, जो पूरी मेहनत और एकाग्रता से इसमें लगे हुए हैं। कोर्स के बाद काम की कोई कमी सामने नहीं आती।

-एके गुप्ता, सीए

संस्थान

दि इंस्टीटय़ूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई)

वेबसाइट- 222.द्बष्ड्डद्ब.शह्म्द्द

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