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पारसनाथ की पहाड़ियाँ – पारसनाथ की पहाड़ियाँ समुद्र के तल से 4480 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है

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गिरिडीह  झारखंड अपने विभिन्न रोमांचकारी स्थलों के बारे में जाना जाता है जहाँ पर्यटकों को वास्तव में साहसिक गतिविधियों और खेलों के अनुभव के लिए विस्तृत क्षेत्र मिलते हैं। इन गतिविधियों का आनंद गिरिडीह, पारसनाथ, और सतपहाण हिल्स में लिया जा सकता है। गिरिडीह जिला इस तरह की रोमांचकारी गतिविधियों का केंद्र रहा है और पूरे देश के हर कोने से पर्यटकों को आकर्षित करता है। पैराग्लाइडिंग, वाटर स्पोर्ट्स और पैरासेलिंग जैसी कुछ अलग तरह की गतिविधियाँ इस राज्य को लोकप्रिय बना रही हैं। वाटर स्पोर्ट्स गिरिडीह का एक आम मनोरंजन है। जिले के उत्तर पूर्व में 8 किमी की दूरी पर एक जलाशय है जहाँ विभिन्न रोमांचकारी खेल खेले जाते हैं। चिड़ियों के जिज्ञासुओं के लिए विहंगावलोकन, व्यस्त रहने का एक दूसरा तरीका है। रोमांच का सफ़र वाटर स्पोर्ट्स पर आकर ख़तम नहीं हो जाता। हाथी और ऊंट सफारी मनोरंजन के दूसरे साधन हैं। बोटिंग, रॉकक्लाइम्बिंग, पैरासेलिंग और कयाकिंग जैसी गतिविधियों का भी मजा यहाँ लिया जा सकता है। हॉट एयर बलून की सवारी यहाँ की अन्य रोमांचकारी गतिविधि है, जिसका मजा गिरिडीह में लिया जा सकता है। प्रशिक्षक के द्वारा सही प्रशिक्षण के बाद पर्यटक आकाश की यात्रा कर सकते हैं और प्रकृति का नज़ारा कर सकते हैं।  पैरासेलिंग को हवाई स्पोर्टस माना जाता है। एक पैराशूट जिसे पैरासेल कहा जाता है जीप द्वारा जमीन पर या मोटर गाड़ी से पानी पर एक रस्सी द्वारा खींचा जाता है। खुली हवा में उड़ना वास्तव में एक रोमांचकारी अनुभव है। तो आइये आपको ले चलते है गिरिडीह की सैर पर |

parasnathपारसनाथ की पहाड़ियाँ  – पारसनाथ की पहाड़ियाँ समुद्र के तल से 4480 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। ये गिरिडीह की पहाड़ी श्रुंखला है जिसकी सर्वोच्च शिखर 1350 मीटर ऊँची है। यह केवल झारखंड की ही सबसे ऊँची चोटी नहीं है बल्कि हिमालय के दक्षिणी हिस्से का सबसे उंचा पर्वत है। इसे जैनियों का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है, क्योंकि इस पर दिनांक 1775AD दर्ज है। यह जैनियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र तीर्थों में से एक है। पारसनाथ वह जगह है जहाँ 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया था।पारसनाथ 23 वें तीर्थंकर थे जिनके बाद इस जगह का नाम पारसनाथ पड़ा। जैसे-जैसे पर्यटक पहाड़ी पर आगे बढ़ते हैं, रास्ते में आने वाले सभी मंदिरों और गुमठियां भी दिखाई देते हैं जो तीर्थंकरों को समर्पित हैं। कुछ मंदिर 2000 साल से भी पहले के माने जाते हैं। सदियों पुरानी इस जगह के विपरीत, यहाँ के मंदिर आधुनिक दृष्टिकोण के हैं। पारसनाथ की पहाड़ियाँ और इसके घने जंगल उसरी जलप्रपात को घेरते हैं। पारसनाथ में ज्यादातर संथाल जाति के लोग निवास करते हैं, जो इस पहाड़ी को मरंग बुरु देवता के रूप में पूजते हैं। मध्य अप्रैल में बैसाखी के दौरान ये लोग पूर्णिमा के दिन शिकार उत्सव मनाते हैं। यह पहाड़ी मधुवन नाम के घने जंगलों से घिरी हुई है। जो पर्यटक ट्रैकिंग में रूचि रखते हैं उन्हें मधुवन से शुरुआत करनी पड़ती है। इस पहाड़ी पर उत्तर की दिशा से आसानी से चढ़ा जा सकता है। 27 किलोमीटर की दूरी पर्वतारोहियों को तय करनी होती है। जो पर्यटक चलने में असमर्थ होते हैं वे ‘डोली वालों’ की मदद ले सकते हैं। जो लोग पहाड़ी पर चढ़ते हैं उन्हें अपने पास टॉर्च जरूर रखना चाहिए। रास्ते में पड़ने वाले स्टॉलों से आप चाय, कॉफ़ी और दूसरे एनर्जी ड्रिंक ले सकते हैं। पारसनाथ से पहले दो अन्य पहाड़ियां  गौतम स्वामी पहाड़ी और चंद्र प्रभु पहाड़ी में भी  पर्यटकों की  दिलचस्पी रहती  हैं। पारसनाथ की पहाड़ियों पर कुछ रोमांचकारी खेल जैसे पैराग्लाइडिंग और पैरासेलिंग के लिए भी राज्य पर्यटन विभाग द्वारा योजना बनाई जा रही है। सड़क मार्ग से पारसनाथ रांची से 190 किमी, झुमरी तलैया और हजारीबाग से 80 किमी, धनबाद से 60 किमी, और बोकारो से 40 किमी की दूरी पर है। ग्रांड ट्रंक रोड राष्ट्रीय राजमार्ग 2 पर स्थित होने के कारण यहाँ तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। निमिया घाट हालांकि ज्यादा लोकप्रिय नहीं है, पर निकटतम रेलवे स्टेशन है। पहाड़ी की दक्षिणी दिशा से लगा हुआ क़स्बा है ‘इसरी बाज़ार’।

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