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 विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विकास भारती द्वारा आयोजित कार्यक्रम में माननीया राज्यपाल महोदया का अभिभाषण

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Speech of Hon'ble Governor on the Occasion of World Environment Day-finaljustice.in

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 विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विकास भारती द्वारा आयोजित कार्यक्रम में माननीया राज्यपाल महोदया का अभिभाषण

दिनांक 5 जून, 2015  विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्वयंसेवी संस्था ‘‘विकास भारती’’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुझे आकर बहुत खुशी हो रही है। मैं इस अवसर पर विकास भारती को सुदूरवर्ती पिछड़े ग्रामों में षिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, जल प्रबंधन, स्वच्छता आदि की दिषा में समर्पित भाव से कार्य करने हेतु बधाई देना चाहूँगी। मुझे यह भी जानकर खुशीहो रही है कि ‘‘पद्मश्री अशोक भगत’’ के नेतृत्व में यह संस्था महिला सषक्तिकरण के साथ-साथ लोगों को व्यावसायिक षिक्षा प्रदान करा कर रोजगार के साधन उपलब्ध कराने की दिषा में कार्य कर रहा है। सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में संस्था द्वारा समर्पित भाव से कार्य किया जाना प्रसन्नता की बात है।
विकास भारती का पर्यावरण के प्रति गंभीर होने और पेयजल, स्वच्छता एवं वृक्षारोपण अभियान आरंभ करने हेतु कदम उठाने की सराहना करती हूँ। पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। साफ पानी के बिना स्वस्थ जीवन संभव नहीं है। व्यापक साफ-सफाई यानि स्वच्छता के बिना साफ पानी निरंतर मिल सकना संभव नहीं है। लिहाजा स्वच्छता मानव के लिए बेहद जरूरी है। सभी को शुद्ध पेयजल मिलेगा, स्वच्छ वातावरण होगा तो स्वस्थ समाज होगा। इसे ध्यान में रखते हुए आदरणीय प्रधानमंत्री जी द्वारा स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत करते हुए पेयजल स्वच्छता पर विषेश जोर दिया गया। अभियान के तहत नदियों, रेलवे स्टेशनों, पर्यटन केन्द्रों और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सफाई पर भी  जोर दिया जा रहा है तथा सभी को स्वच्छता के प्रति जागरूक की जा रही है।
पर्यावरण दिवस के अवसर पर मैं कहना चाहूँगी कि पर्यावरण सुरक्षा आज विश्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। पर्यावरण प्रदूषण से आज समस्त विश्व चिन्तित हैं। पर्यावरण दिवस मनाने का उद्देश्य पर्यावरण की अहमियत व इसके प्रति जागरूकता पैदा करना तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए किये जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहन देना है।
आज धरती के चारों ओर सुरक्षात्मक ओजोन परत दिन-प्रतिदिन पतली होती जा रही है, जिससे धरती पर रहनेवाले सभी जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है। पर्यावरण असंतुलन के कारण बेमौसम अतिवृष्टि, अनावृष्टि, सूखा, बाढ़ इत्यादि में वृद्धि हो रही है, जिसके कारण करोड़ो लोग प्रभावित हो रहे हंै। विकास के क्रम में हमारे प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण दोहन होना, कूड़े-कचड़े और अपषिश्ट पदार्थों का अनियोजित ढंग से फेंका जाना, कल-कारखानों के निर्माण के साथ ही उससे होनेवाले प्रदूषण को रोकने के उपाय का अभाव, कीटनाषक पदार्थों का अंधाधुंध प्रयोग, वैज्ञानिक तकनीक का न अपनाना तथा जानकारी का अभाव आदि पर्यावरण विनाष के प्रमुख कारण हैं।
निरंतर बढ़ती हुई जनसंख्या की मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति तथा उनके आर्थिक स्तर में वृद्धि हेतु औद्योगिक विकास अत्यंत ही आवष्यक है। परिवहन के साधन में भी वृद्धि होना जरूरी है, लेकिन इसके साथ वृक्षारोपण में भी उसी अनुपात में वृद्धि होती, तो आज ये स्थिति नहीं होती। आज भू-गर्भ जल का स्तर नीचे जा रहा है। यदि हम प्रकृति की सुरक्षा हेतु नहीं चेते एवं प्रकृति की सुरक्षा हेतु तेजी से आगे नहीं बढ़े तो पृथ्वी के सभी जीव विनाष की ओर तेजी से आगे बढ़ेंगे।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण प्रकृति में बदलाव आ रहा है। कहीं भारी वर्षा तो कहीं सूखा, कहीं लू तो कहीं ठंड। कहीं बर्फ की चट्टानें टूट रही हैं तो कहीं समुद्री जल-स्तर में बढ़ोतरी हो रही है। आज जिस गति से ग्लेष्यिर ;ळसंबपमतद्ध पिघल रहे हैं, इससे भारत और पड़ोसी देशों को खतरा बढ़ सकता है। ग्लोबल वार्मिंग से फसल चक्र भी अनियमित हो जायेगा। इससे कृशि उत्पादकता भी प्रभावित होगी। मनुश्यों के साथ-साथ पक्षी भी इस प्रदूशण का षिकार हो रहे हैं। दुःखद बात है कि गंगा सहित अन्य नदियाँ भी प्रदूशित हो गई हैं। हमारे राज्य की नदियों का पानी भी स्वच्छ नहीं है। इस दिषा में सरकार के साथ सभी को सामाजिक उŸारदायित्व की भावना तथा आपसी सहयोग के साथ कार्य करना होगा और नदियों को प्रदूशित होने से बचाना होगा।
हमारा राज्य प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। वन, पहाड़, झरने जैसी चीजें हमारी जिंदगी में एक अहम भूमिका निभा रही है। हमें अपनी इस निराली, मनमोहक प्रकृति को बचाकर रखना है। मेरे कहने का तात्पर्य यह नहीं कि पर्यावरण संतुलन के लिए राज्य में उद्योग-धंधे, कल-कारखाने नहीं स्थापित हो। हमारा राज्य खनिज संपदा से परिपूर्ण है, देश की 40 फीसदी से भी अधिक खनिज संपदा मौजूद है, यदि इसका सुनियोजित तरीके से उपयोग किया जाय तो दुनिया की कोई ताकत हमारे राज्य की समृद्धि को रोक नहीं सकती, बस पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए इसके लिए भी कार्य करने की जरूरत है।
आज आवश्यक है कि मनुष्य की भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति हो एवं साथ ही साथ प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण विदोहन हो, जिससे कि हमारा एवं हमारी भावी पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित एवं सुखमय हो सके। अतः विकास के साथ-साथ पर्यावरण का भी विशेष ध्यान रखना प्रत्येक मानव का कर्तव्य  है। शहरी क्षेत्रों का विस्तार सुनियोजित योजना के तहत किया जाय, जहाँ मूलभूत सुविधायें यथा-सड़क एवं यातायात की समुचित व्यवस्था, कचड़ा प्रबंधन एवं घरेलू पानी के निकासी की उचित की व्यवस्था हो।
यह प्रसन्नता की बात है कि विकास भारती जैसे प्रतिश्ठित स्वयंसेवी संस्था, जिसे ख्यातिप्राप्त समाजसेवी श्री अषोक भगत के मार्गदर्षन में सामाजिक कार्य एवं सामाजिक जागरूकता का व्यपाक अनुभव प्राप्त है। मुझे विष्वास है कि यह संस्था पर्यावरण सुरक्षा की दिषा में कार्य करते हुए राश्ट्रीय एवं अन्तर्राश्ट्रीय स्तर पर भी झारखंड का नाम रौषन करेगी तथा पर्यावरण की सुरक्षा को जन आंदोलन के रूप में परिवर्तित करने में सफल होगी।
इस अवसर पर मैं अन्य सभी स्वयंसेवी संस्था सहित राज्य के सभी नागरिकों का आह्वान करना चाहती हूँ कि वे अपने जीवन में अधिक-से-अधिक वृक्ष रोपण करें तथा पर्यावरण संरक्षण में अमूल्य योगदान दें ताकि आगे आनेवाली पीढ़ी का भविष्य  सुरक्षित हो सके।

जय हिन्द! जय झारखंड!

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