Home aas_paas जीएसटी- अवधारणा एवं वस्‍तु-स्थिति- 15 अप्रैल, 2017 तक

जीएसटी- अवधारणा एवं वस्‍तु-स्थिति- 15 अप्रैल, 2017 तक

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परिचय

वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू किया जाना भारत में अप्रत्यक्ष कर सुधारों के क्षेत्र में एक अत्‍यंत महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। बड़ी संख्‍या में केन्‍द्रीय एवं राज्‍य करों को मिलाकर उन्‍हें एकल कर यानी जीएसटी का रूप देने से करों की बहुतायत अथवा दोहरे कराधान की समस्‍या का समाधान बड़े पैमाने पर हो जायेगा और इसके साथ ही ‘एक समान राष्‍ट्रीय बाजार’ का मार्ग प्रशस्‍त होगा। उपभोक्‍ताओं की दृष्टि से इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वस्‍तुओं पर उन्‍हें अपेक्षाकृत कम कर अदा करना पड़ेगा, जो वर्तमान में लगभग 25-30 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है। यही नहीं, जीएसटी को लागू करने से भारतीय उत्‍पाद घरेलू एवं अंतर्राष्‍ट्रीय बाजारों में प्रतिस्‍पर्धी बन जायेंगे। विभिन्‍न अध्‍ययनों से यह पता चला है कि जीएसटी आर्थिक विकास की गति बढ़ाने में मददगार साबित होगा। अन्तिम महत्‍वपूर्ण बात यह है कि जीएसटी को आसानी से लागू किया जा सकेगा क्‍योंकि यह पारदर्शी होगा और इसका अनुपालन भी स्‍वत: हो सकेगा।

उद्भव

2. जीएसटी की दिशा में कदम बढ़ाने का विचार सबसे पहले तत्‍कालीन केन्‍द्रीय वित्त मंत्री ने 2007-08 के आम बजट में रखा था। आरंभ में यह प्रस्‍ताव किया गया था कि जीएसटी को 1 अप्रैल, 2010 से लागू किया जायेगा। राज्‍यों में वैट का स्‍वरूप तैयार करने वाली राज्‍यों के वित्त मंत्रियों की उच्‍चाधिकार प्राप्‍त समिति (ईसी) से आग्रह किया गया था कि वह जीएसटी का खाका (रोडमैप) और संरचना तैयार करे। जीएसटी के विभिन्‍न पहलुओं का अध्‍ययन करने और विशेषकर रियायतों एवं न्‍यूनतम सीमा, सेवाओं के कराधान तथा अंतर-राज्‍य आपूर्ति के कराधान पर रिपोर्ट तैयार करने के उद्देश्‍य से राज्‍यों के साथ-साथ केन्‍द्र के भी प्रतिनिधियों वाले अधिकारियों के संयुक्‍त कार्यदलों का गठन किया गया था। आंतरिक चर्चाओं एवं केन्‍द्र सरकार के साथ हुए विचार-विमर्श के आधार पर ईसी ने नवंबर, 2009 में जीएसटी पर प्रथम परिचर्चा प्रपत्र (एफडीपी) जारी किया था। इसमें प्रस्‍तावित जीएसटी की विशेषताओं का उल्‍लेख किया गया है और यही अब तक केन्‍द्र एवं राज्‍यों के बीच विचार-विमर्श का आधार रहा है।

जीएसटी और केन्‍द्र-राज्‍य वित्तीय संबंध

3. वर्तमान में केन्‍द्र और राज्‍यों के राजकोषीय अधिकारों का स्‍पष्‍ट उल्‍लेख संविधान में किया गया है और इस लिहाज से दोनों के क्षेत्राधिकार एक-दूसरे से लगभग पूरी तरह भिन्‍न हैं। केन्‍द्र सरकार के पास वस्‍तुओं के उत्‍पादन (मानव के उपभोग वाली शराब, अफीम, मादक द्रव्‍य इत्‍यादि को छोड़कर) पर टैक्‍स लगाने का अधिकार है, जबकि राज्‍यों के पास वस्‍तुओं की बिक्री पर टैक्‍स लगाने का अधिकार है। अंतर-राज्‍य बिक्री की स्थिति में केन्‍द्र के पास एक कर (केन्‍द्रीय बिक्री कर) लगाने का अधिकार है, लेकिन कर को मूल राज्‍य द्वारा वसूला जाता है और इसे पूरी तरह अपने पास रख लिया जाता है। सेवाओं के मामले में केवल केन्‍द्र को ही सेवा कर (सर्विस टैक्‍स) लगाने का अधिकार है। चूंकि भारत में आयात होने अथवा भारत से निर्यात होने की स्थिति में वस्‍तुओं की बिक्री अथवा खरीद पर कोई टैक्‍स लगाने का अधिकार राज्‍यों को नहीं है, इसलिए केन्‍द्र सरकार ही इस टैक्‍स को अतिरिक्‍त सीमा शुल्‍क के रूप में लगाती है एवं वसूलती है, जो मूल सीमा शुल्‍क के अलावा है। यह अतिरिक्‍त सीमा शुल्‍क (जो आम तौर पर सीवीडी और एसएडी के रूप में जाना जाता है) समान घरेलू उत्‍पाद पर लगने वाले उत्‍पाद शुल्‍क, बिक्री कर, राज्‍य वैट और अन्‍य करों का प्रति-सन्तुलन करता है। जीएसटी को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करने की आवश्‍यकता पड़ेगी, जिससे कि केंद्र और राज्यों को जीएसटी लागू करने के साथ-साथ इसे एकत्रित करने के लिए समवर्ती रूप से सशक्त बनाया जा सके।

3.1 जीएसटी लागू करने के लिए केंद्र और राज्यों को समवर्ती अधिकार सौंपने हेतु एक अनूठी संस्‍थागत व्‍यवस्‍था की आवश्‍यकता पड़ेगी, जो यह सुनिश्चित करेगी कि जीएसटी की संरचना, स्‍वरूप एवं परिचालन के बारे में निर्णय दोनों ही द्वारा संयुक्‍त रूप से लिये जायेंगे। इसे प्रभावी बनाने के लिए इस तरह की व्‍यवस्‍था को संवैधानिक स्‍वरूप भी प्रदान करने की आवश्‍यकता पड़ेगी।

संविधान (101वां) संशोधन अधिनियम, 2016

इन सभी के साथ-साथ अन्‍य मसलों को भी सुलझाने के उद्देश्‍य से संविधान (122वां संशोधन) विधेयक 19 दिसंबर, 2014 को 16वीं लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक में मानव के उपभोग वाली शराब को छोड़ समस्‍त वस्‍तुओं अथवा सेवाओं की आपूर्ति पर जीएसटी लगाने का प्रावधान किया गया है। यह कर अलग-अलग दोहरे जीएसटी के रूप में लगाया जायेगा, लेकिन समवर्ती रूप से केन्‍द्र (केन्‍द्रीय कर-सीजीएसटी) और राज्‍यों (विधायि‍का वाले केन्‍द्र शासित प्रदेशों सहित) (राज्‍य कर-एसजीएसटी)/विधायिका बगैर केन्‍द्र शासित प्रदेश (केन्‍द्र शासित प्रदेश कर-यूटीजीएसटी) द्वारा लगाया जायेगा। संसद के पास वस्‍तुओं अथवा सेवाओं के अंतर-राज्‍य व्‍यापार या वाणिज्‍य (आयात सहित) पर जीएसटी (एकीकृत कर-आईजीएसटी) लगाने का विशिष्‍ट अधिकार होगा। केन्‍द्र सरकार के पास तम्‍बाकू और तम्‍बाकू उत्‍पादों पर जीएसटी के अलावा उत्‍पाद शुल्‍क लगाने का अधिकार होगा। जीएसटी परिषद की सिफारिश पर पांच विशिष्‍ट पेट्रोलियम उत्‍पादों अर्थात कच्‍चे तेल, हाई स्‍पीड डीजल, पेट्रोल, एटीएफ और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर टैक्‍स बाद की किसी तिथि से लगाया जायेगा।

4.1 जीएसटी की दर, रियायत एवं न्‍यूनतम सीमा, विलय किये जाने वाले करों और अन्‍य विशेषताओं के बारे में सिफारिशें पेश करने के लिए वस्‍तु एवं सेवा कर परिषद (जीएसटीसी) का गठन किया जायेगा जिसमें केन्‍द्रीय वित्त मंत्री, राज्‍य मंत्री (राजस्‍व) और राज्‍यों के वित्त मंत्री शामिल होंगे। इस व्‍यवस्‍था से केन्‍द्र एवं राज्‍यों के बीच और इसके साथ ही समस्‍त राज्‍यों में जीएसटी के विभिन्‍न पहलुओं पर कुछ हद तक एकरूपता सुनिश्चित होगी। जीएसटीसी के कुल सदस्‍यों का आधा हिस्‍सा जीएसटीसी की बैठकों का कोरम बनायेगा। जीएसटीसी में कोई भी निर्णय बहुमत द्वारा लिया जायेगा, जो डाले गये भारित मतों के तीन -चौथाई से कम नहीं होगा। बहुमत के लिए केन्‍द्र एवं न्‍यूनतम 20 राज्‍यों की आवश्‍यकता पड़ेगी क्‍योंकि केन्‍द्र के पास डाले गये कुल मतों का एक-तिहाई भारांक (वेटेज) और सभी राज्‍यों के पास कुल मिलाकर डाले गये समस्‍त मतों का दो-तिहाई भारांक होगा।

4.2 संविधान संशोधन विधेयक को इससे पहले लोकसभा ने मई, 2015 में पारित किया था। यह विधयेक 12 मई, 2015 को राज्‍य सभा की प्रवर समिति को भेजा गया था। प्रवर समिति ने 22 जुलाई, 2015 को इस विधेयक पर अपनी रिपोर्ट पेश कर दी थी। कुछ विशेष संशोधनों के साथ यह विधेयक अंतत: राज्‍य सभा में पारित हो गया और इसके बाद लोकसभा ने अगस्‍त, 2016 में इसे पारित कर दिया। इसके बाद आवश्यक संख्या में राज्यों द्वारा इस विधेयक की पुष्टि की गई थी और 8 सितंबर, 2016 को इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई थी। तत्‍पश्‍चात 16 सितंबर, 2016 से यह संविधान (101वां संशोधन) अधिनियम, 2016 के रूप में अधिनियमित हो चुका है।

वस्‍तु एवं सेवा कर परिषद (जीएसटीसी)

जीएसटीसी को 12 सितंबर, 2016 से अधिसूचित किया गया है। जीएसटीसी को एक सचिवालय की ओर से सहायता सुनिश्चित की जा रही है। जीएसटीसी की 13 बैठकें अब तक हो चुकी हैं। जीएसटीसी द्वारा निम्‍नलिखि‍त निर्णय लिये गये हैं:

न्‍यूनतम छूट सीमा 20 लाख रुपये होगी। संविधान के अनुच्छेद 279ए में वर्णित विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए न्‍यूनतम छूट सीमा 10 लाख रुपये तय की गई है।
संयोजन न्‍यूनतम सीमा 50 लाख रुपये होगी। संयोजन योजना अंतर-राज्‍य आपूर्तिकर्ताओं, सेवा प्रदाताओं (रेस्‍तरां सेवा को छोड़कर) और विशेष श्रेणी के निर्माताओं के लिए उपलब्‍ध नहीं होगी।
केन्‍द्र अथवा राज्‍य सरकारों की मौजूदा कर प्रोत्‍साहन योजनाओं को संबंधित सरकार बजट के जरिये प्रतिपूर्ति करते हुए जारी रख सकती है। वहीं, इन योजनाओं को मौजूदा स्‍वरूप में ही जीएसटी के अंतर्गत जारी नहीं रखा जा सकेगा।
कर की चार दरें यथा 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत होंगी। इसके अलावा, कुछ वस्‍तुओं और सेवाओं को छूट प्राप्‍त मदों की सूची में रखा जायेगा। बेशकीमती धातुओं की दर को तय करना अभी बाकी है। विलासता वाली कुछ विशेष वस्‍तुओं के साथ-साथ नुकसानदेह वस्‍तुओं पर 28 प्रतिशत की सर्वाधिक दर के अलावा उपकर भी 5 वर्षों तक लगाया जायेगा, ताकि जीएसटी को लागू करने से राज्‍यों को होने वाले किसी भी तरह के राजस्‍व नुकसान की भरपाई की जा सके। परिषद ने वर्तमान कर संरचना को ध्‍यान में रखते हुए अधिकारियों की समिति से यह तय करने को कहा है कि किस स्‍लैब में कौन-कौन सी वस्‍तुएं और सेवाएं आनी चाहिए।
पांच कानूनों यथा सीजीएसटी कानून, यूटीजीएसटी कानून, आईजीएसटी कानून, एसजीएसटी कानून और जीएसटी मुआवजा कानून की सिफारिश की गई है।
एकल इंटरफेस सुनिश्चित करने के लिए 5 करोड़ रुपये से कम के कारोबार वाले 90 प्रतिशत से ज्‍यादा करदाताओं पर राज्‍य कर प्रशासन का समस्‍त प्रशासकीय नियंत्रण होगा, जबकि 10 प्रतिशत करदाताओं पर केन्‍द्रीय कर प्रशासन का समस्‍त प्रशासकीय नियंत्रण होगा। इसके अलावा, 1.5 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के कारोबार वाले करदाताओं में से 50 प्रतिशत पर केन्‍द्रीय कर प्रशासन का समस्‍त प्रशासकीय नियंत्रण और शेष 50 प्रतिशत पर राज्‍य कर प्रशासन का समस्‍त प्रशासकीय नियंत्रण होगा।
आईजीएसटी अधिनियम के तहत भी अधिकार कुछ अपवादों को छोड़कर सीजीएसटी और एसजीएसटी अधिनियमों की भांति ही समान आधार पर दिये जायेंगे।
अवस्थित जल क्षेत्रों में जीएसटी के संग्रह का अधिकार केन्‍द्र सरकार द्वारा राज्‍यों को दिया जायेगा।
जीएसटी मुआवजा उपकर के फॉर्मूले एवं इससे जुड़ी व्‍यवस्‍था को अंतिम रूप दे दिया गया है।
इनपुट टैक्‍स (कच्‍चे माल पर कर) क्रेडिट, संरचना करारोपण, संक्रमणकालीन प्रावधान और मूल्‍य निर्धारण पर चार कानूनों की सिफारिश की गई है। इसके अलावा पंजीकरण, इनवॉयस, भुगतान, रिटर्न और वापसी (रिफंड) पर उन पांच कानूनों की भी सिफारिश की गई है, जिन्‍हें सितंबर 2016 में अंतिम रूप दिया गया था और संसद में पेश किये गये जीएसटी विधेयकों को ध्‍यान में रखते हुए संशोधित किया गया था।

जीएसटी की मुख्‍य विशेषताएं

जीएसटी की मुख्‍य विशेषताएं निम्‍नलिखित हैं:
वस्‍तुओं के उत्‍पादन अथवा वस्‍तुओं की बिक्री या सेवाओं के प्रावधान पर कर लगाने की मौजूदा अवधारणा के बजाय वस्‍तुओं या सेवाओं की ‘आपूर्ति’ पर जीएसटी लगाया जायेगा।
मूल स्‍थान आधारित कराधान के वर्तमान सिद्धांत के बजाय गंतव्‍य स्थित उपभोग कराधान के सिद्धांत के आधार पर जीएसटी लगाया जायेगा।
यह एक दोहरा जीएसटी होगा जिसके तहत केन्‍द्र एवं राज्‍य एक साथ समान आधार पर इसे लगायेंगे। केन्‍द्र द्वारा लगाये जाने वाले जीएसटी को केन्‍द्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) कहा जायेगा और राज्‍यों (विधायिका वाले केन्‍द्र शासित प्रदेशों सहित) द्वारा लगाये जाने वाले जीएसटी को राज्‍य जीएसटी (एसजीएसटी) कहा जायेगा। वहीं, बिना विधायिका वाले केन्‍द्र शासित प्रदेशों द्वारा लगाये जाने वाले जीएसटी को केन्‍द्र शासित प्रदेश जीएसटी (यूटीजीएसटी) कहा जायेगा।
वस्‍तुओं अथवा सेवाओं की अंतर-राज्‍य आपूर्ति (स्‍टॉक हस्‍तांतरण सहित) पर एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) लगाया जायेगा। इसका संग्रहण केन्‍द्र करेगा, ताकि क्रेडिट से जुड़ी श्रृंखला (चेन) में कोई व्‍यवधान न आ सके।
वस्‍तुओं के आयात को अंतर-राज्‍य आपूर्ति माना जायेगा और इस पर देय सीमा शुल्‍क के अलावा आईजीएसटी भी लगेगा।
सेवाओं के आयात को अंतर-राज्‍य आपूर्ति माना जायेगा और इस पर आईजीएसटी लगेगा।
सीजीएसटी, एसजीएसटी/यूटीजीएसटी और आईजीएसटी की दरें अंतत: वे होंगी जिन पर जीएसटीसी के तत्‍वावधान में केन्‍द्र एवं राज्‍यों की सहमति होगी।
जीएसटी निम्‍नलिखित करों का स्‍थान लेगा, जिन्‍हें वर्तमान में केन्‍द्र द्वारा लगाया एवं वसूला जाता है:
केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क
उत्‍पाद शुल्‍क (औषधीय एवं प्रसाधन उत्‍पाद)
अतिरिक्‍त उत्‍पाद शुल्‍क (विशेष महत्‍व की वस्‍तुएं)
अतिरिक्‍त उत्‍पाद शुल्‍क (वस्‍त्र एवं वस्‍त्र उत्‍पाद)
अतिरिक्‍त सीमा शुल्‍क (यह आम तौर पर सीवीडी के रूप में जाना जाता है)
विशेष अतिरिक्‍त सीमा शुल्‍क (एसएडी)
सेवा कर
वे उपकर और अधिभार जो वस्‍तुओं अथवा सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित हैं

जीएसटी में समाहित किये जाने वाले राज्‍य कर निम्‍नलिखित हैं:
राज्‍य वैट
केन्‍द्रीय बिक्री कर
खरीद कर
विलासि‍ता कर
प्रवेश कर (सभी तरह के)
मनोरंजन कर (स्‍थानीय निकायों द्वारा लगाये जाने वाले कर को छोड़कर)
विज्ञापनों पर कर
लॉटरियों, सट्टेबाजी एवं जुए पर लगने वाले कर
राज्‍यों के वे उपकर और अधिभार जो वस्‍तुओं अथवा सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित हैं
जीएसटी को मानव के उपभोग वाली शराब को छोड़कर समस्‍त वस्‍तुओं और सेवाओं पर लगाया जायेगा।
पांच विशेष पेट्रोलियम उत्‍पादों (कच्‍चा तेल, पेट्रोल, डीजल, एटीएफ और प्राकृतिक गैस) पर जीएसटी उस तारीख से लगाया जायेगा जिसकी सिफारिश जीएसटीसी करेगी।
तम्‍बाकू एवं तम्‍बाकू उत्‍पादों पर जीएसटी लगेगा। इसके अलावा, केन्‍द्र सरकार इन पर केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क भी लगाती रहेगी।
सीजीएसटी और एसजीएसटी दोनों पर एक समान न्‍यूनतम छूट सीमा लागू होगी। 20 लाख रुपये के वार्षिक कारोबार वाले करदाताओं (संविधान के अनुच्‍छेद 279ए में वर्णित विशेष श्रेणी के राज्‍यों के लिए 10 लाख रुपये) को जीएसटी से छूट होगी। 50 लाख रुपये तक के वार्षिक कारोबार वाले छोटे करदाताओं (उत्‍पादकों और सेवा प्रदाताओं की विशेष श्रेणी सहित) को एक सहमति (कंपाउंडिंग) विकल्‍प (अर्थात क्रेडिट के बगैर एक समान यानी फ्लैट दर से टैक्‍स अदा करना) दिया जायेगा। न्‍यूनतम छूट सीमा और कंपाउंडिंग योजना वैकल्पिक होगी।
छूट प्राप्‍त वस्‍तुओं एवं सेवाओं की सूची न्‍यूनतम रखी जायेगी और केन्‍द्र तथा राज्‍यों के साथ-साथ, जहां तक संभव हो सके, समस्‍त राज्‍यों में इस मामले में एकरूपता रखी जायेगी।
निर्यात जीरो-रेटेड होगा।
कच्‍चे माल (इनपुट) पर अदा किये गये सीजीएसटी से संबंधित क्रेडिट का उपयोग केवल तैयार उत्‍पाद (आउटपुट) पर सीजीएसटी अदा करने के लिए किया जा सकता है। इस तरह कच्‍चे माल पर अदा किये गये एसजीएसटी/यूटीजीएसटी से संबंधित क्रेडिट का इस्‍तेमाल तैयार उत्‍पाद पर एसजीएसटी/यूटीजीएसटी अदा करने के लिए किया जा सकता है। दूसरे शब्‍दों में, आईजीएसटी के भुगतान के लिए अंतर-राज्‍य आपूर्ति की विशेष स्थितियों को छोड़कर किसी और स्थिति में इनपुट टैक्‍स क्रेडिट (आईटीसी) की दो धाराओं का इस्‍तेमाल एक-दूसरे के लिए नहीं किया जा सकता है। क्रेडिट का उपयोग निम्नलिखित रूप में करने की अनु‍मति होगी:

सीजीएसटी के आईटीसी का उपयोग उसी क्रम में सीजीएसटी और आईजीएसटी के भुगतान के लिए करने की अनुमति
एसजीएसटी के आईटीसी का इस्‍तेमाल उसी क्रम में एसजीएसटी और आईजीएसटी के भुगतान के लिए करने की अनुमति
यूटीजीएसटी के आईटीसी का उपयोग उसी क्रम में यूटीजीएसटी और आईजीएसटी के भुगतान के लिए करने की अनुमति
आईजीएसटी के आईटीसी का इस्‍तेमाल उसी क्रम में आईजीएसटी, सीजीएसटी एवं एसजीएसटी/यूटीजीएसटी के भुगतान के लिए करने की अनु‍मति
सीजीएसटी के आईटीसी का उपयोग एसजीएसटी/यूटीजीएसटी के भुगतान के लिए नहीं किया जा सकता है। इस तरह एसजीएसटी/यूटीजीएसटी के आईटीसी का इस्‍तेमाल सीजीएसटी के भुगतान के लिए नहीं किया जा सकता है।

समय-समय पर केंद्र और राज्य के बीच खातों का निपटारा किया जायेगा, ताकि आईजीएसटी के भुगतान के लिए इस्‍तेमाल किये गये एसजीएसटी के क्रेडिट का मूल राज्‍य द्वारा केन्‍द्र को अंतरण सुनिश्चित किया जा सके। इसी तरह एसजीएसटी के भुगतान के लिए इस्‍तेमाल किये गये आईजीएसटी का अंतरण केन्‍द्र द्वारा गंतव्‍य राज्‍य को किया जायेगा। इसके अलावा, बी2सी आपूर्तियों पर एकत्रित आईजीएसटी के एसजीएसटी हिस्‍से का भी अंतरण केन्‍द्र द्वारा गंतव्‍य राज्‍य को किया जायेगा। करदाताओं द्वारा दाखिल किये गये रिटर्न में निहित सूचनाओं के आधार पर ही धनराशि का अंतरण किया जायेगा।
इनपुट टैक्‍स क्रेडिट (आईटीसी) का आधार विस्‍तृत होगा, जिसके तहत व्‍यवसाय के दौरान या व्‍यवसाय को आगे बढ़ाने के दौरान इस्‍तेमाल की गई या इस्‍तेमाल के इरादे वाली वस्‍तुओं या सेवाओं अथवा दोनों ही की आपूर्ति पर अदा किये गये करों के संदर्भ में इस क्रेडिट को उपलब्‍ध कराया जायेगा।
विभिन्‍न श्रेणियों के व्‍यक्तियों को भिन्‍न-भिन्‍न निर्दिष्‍ट तिथियों तक इलेक्‍ट्रॉनिक तरीके से रिटर्न भरना होगा।
कर अदायगी के लिए करदाताओं के पास अनेक विकल्‍प होंगे जिनमें इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट कार्ड और राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी)/रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) शामिल हैं।
आपूर्ति को प्राप्‍त करने वाले सरकारी विभागों, स्‍थानीय प्राधिकरणों और सरकारी एजेंसियों सहित कतिपय व्‍यक्तियों पर उन आपूर्तिकर्ताओं को किये गये भुगतान अथवा उनके खाते में डाली गई धनराशि पर 1 प्रतिशत की दर से टैक्‍स काटने का दायित्‍व होगा जिनकी आपूर्ति का कुल मूल्‍य किसी भी अनुबंध के तहत 2.5 लाख रुपये से ज्‍यादा होगा।
करदाता अथवा टैक्‍स का वहन करने वाले किसी भी व्‍यक्ति को उपयुक्‍त तिथि से दो वर्षों के भीतर ही कर रिफंड की मांग करनी होगी।
इलेक्‍ट्रॉनिक कॉमर्स ऑपरेटरों पर उस दर से ‘स्रोत पर कर’ संग्रहित करने का दायित्‍व होगा जो उनके पोर्टल के जरिये वस्‍तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति करने वालों को किये गये भुगतान, कर योग्‍य आपूर्तियों के शुद्ध मूल्‍य के 1 प्रतिशत से ज्‍यादा नहीं होगी।
पंजीकृत व्‍यक्ति देय करों का स्‍व-आकलन कर सकेंगे।
पंजीकृत व्‍यक्तियों का ऑडिट कराया जायेगा, ताकि अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन का सत्‍यापन हो सके।
मांग किये जाने की अवधि की सीमा सामान्‍य मामलों में वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की देय तिथि अथवा करों की कम अदायगी अथवा भुगतान न किये जाने की स्थिति‍ में मांग किये जाने के लिए त्रुटिपूर्ण रिफंड की तारीख अथवा त्रुटिपूर्ण रिफंड एवं इसके अधिनिर्णय की तिथि से लेकर 3 साल तक होगी।
मांग किये जाने की अवधि की सीमा धोखाधड़ी, तथ्‍य छिपाने या जानबूझकर गलत बयानी के मामलों में वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की देय तिथि अथवा करों की कम अदायगी अथवा भुगतान न किये जाने की स्थिति‍ में मांग किये जाने के लिए त्रुटिपूर्ण रिफंड की तारीख अथवा त्रुटिपूर्ण रिफंड एवं इसके अधिनिर्णय की तिथि से लेकर 5 साल तक होगी।
बकाया कर की वसूली विभिन्‍न तरीकों से की जा सकेगी जिसमें चूक करने वाले कर योग्‍य व्‍यक्ति की वस्‍तुओं, चल एवं अचल सम्‍पत्ति पर रोक लगाना एवं बेचना भी शामिल है।
अधिकारियों के पास निरीक्षण, तलाशी लेने, जब्‍त करने एवं गिरफ्तार करने के प्रतिबंधात्मक अधिकार होंगे।
अपीलीय प्राधिकरण या पुनरीक्षण प्राधिकरण द्वारा पारित किये गये आदेशों के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई के लिए केन्‍द्र द्वारा वस्‍तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन किया जायेगा। राज्‍य संबंधित एसजीएसटी अधिनियम में न्‍यायाधिकरण से संबंधित प्रावधानों को अपनायेंगे।
प्रस्‍तावित कानून के प्रावधान का उल्‍लंघन करने की स्थिति में जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
राज्‍यों द्वारा अग्रिम निर्णय प्राधिकरण का गठन किया जायेगा, ताकि करदाता विभाग से कराधान संबंधी मसलों पर बाध्‍यकारी स्‍पष्‍टता की मांग कर सकें। केन्‍द्र सीजीएसटी अधिनियम के तहत इस तरह के प्राधिकरण को अपनायेगा।
मुनाफाखोरी रोधी अनुच्‍छेद की भी व्‍यवस्‍था की गई है, ताकि कारोबारी वस्‍तुओं या सेवाओं अथवा दोनों पर देय टैक्‍स में की गई कटौती का लाभ उपभोक्‍ताओं को अवश्‍य ही दें।
मौजूदा करदाता जीएसटी व्‍यवस्‍था को आसानी से अपना सकें, इसके लिए विस्‍तृत संक्रमणकालीन प्रावधान किए गए हैं।

जीएसटी से लाभ

(क) मेक इन इंडिया
भारत में ‘एकीकृत एक समान राष्‍ट्रीय बाजार’ सृजित करने में मदद मिलेगी, जिससे विदेशी निवेश और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई गति मिलेगी।
करों का भार कम होगा क्‍योंकि आपूर्ति के प्रत्‍येक चरण में समस्‍त वस्‍तुओं एवं सेवाओं पर इनपुट टैक्‍स क्रेडिट मिलेगा।
कानूनों, प्रक्रियाओं और कर दरों में एकरूपता आयेगी।
इससे निर्यात एवं विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा एवं ज्‍यादा रोजगार सृजित होंगे और इस तरह जीडीपी में वृद्धि होगी। यही नहीं, लाभप्रद रोजगार सृजित होंगे जिससे आर्थिक वि‍कास की गति तेज होगी।
इससे अंतत: और ज्‍यादा रोजगारों एवं वित्तीय संसाधनों के सृजन से गरीबी उन्‍मूलन में मदद मिलेगी।
विशेषकर निर्यात से संबंधित करों का और अधिक निष्‍प्रभावीकरण सुनिश्चित होगा जिससे हमारे देश के उत्‍पाद अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में और ज्‍यादा प्रति‍स्‍पर्धी बन जायेंगे, जिससे भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
देश में समग्र निवेश माहौल बेहतर होगा जिससे स्‍वाभाविक रूप से राज्‍यों में विकास की गति तेज होगी।
एसजीएसटी और आईजीएसटी दरें एक समान होने से पड़ोसी राज्‍यों और राज्‍य के भीतर ही होने वाली बिक्री एवं अंतर-राज्‍य बिक्री पर दर के मामले में मिलने वाली बढ़त खत्‍म हो जायेगी, जिससे कर चोरी की गुंजाइश कम हो जायेगी।
कंपनियों पर औसत कर भार घट जाने के आसार हैं जिससे कीमतें घट जाने की आशा है। कीमतें घट जाने से उपभोग बढ़ जायेगा, जिससे उत्‍पादन बढ़ाना पड़ेगा। ऐसे में विभिन्‍न उद्योगों के विकास में मदद मिलेगी। इससे भारत एक ‘विनिर्माण केन्‍द्र (हब)’ के रूप में उभर कर सामने आयेगा।

(ख) कारोबार करने में आसानी

कर व्‍यवस्‍था आसान होगी और इसके साथ ही रियायतों की संख्‍या कम होगी।
मौजूदा समय में हमारी अप्रत्‍यक्ष कर प्रणाली में करों की बहुतायत है, जिसमें कमी सुनिश्चित होगी और ऐसे में सरलता एवं एकरूपता आयेगी।
अनुपालन लागत घट जायेगी क्‍योंकि विभिन्‍न करों का अलग-अलग रिकॉर्ड रखने की आवश्‍यकता नहीं होगी। अत: जीएसटी को लागू करने पर टैक्‍स रिकॉर्ड बनाये रखने के लिए संसाधनों एवं श्रमबल में अधिक निवेश नहीं करना पड़ेगा।
पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड, कर भुगतान इत्‍यादि से जुड़ी प्रक्रियाएं सरल एवं स्‍वचालित होंगी।
सारी बातचीत साझा जीएसटीएन पोर्टल पर ही हो सकेगी। इससे करदाताओं और कर प्रशासन के बीच परस्‍पर बातचीत की आवश्‍यकता कम हो जायेगी।
इससे अनुपालन का माहौल बेहतर हो जायेगा क्‍योंकि समस्‍त रिटर्न ऑनलाइन भरे जायेंगे, इनपुट क्रेडिट का सत्‍यापन ऑनलाइन हो सकेगा। इससे लेन-देन के लिखित प्रमाण को बढ़ावा मिलेगा।
करदाताओं के पंजीकरण एवं टैक्‍स रिफंड की एक समान प्रक्रियाओं, टैक्‍स रिटर्न के एक समान प्रारूप, एक समान कर आधार और वस्‍तुओं एवं सेवाओं के वर्गीकरण की एक समान प्रणाली से कराधान प्रणाली में और ज्‍यादा निश्‍चि‍तता आयेगी।
महत्‍वपूर्ण गतिविधियों जैसे कि पंजीकरण, रिफंड इत्‍यादि प्राप्‍त करने के लिए समय सीमा तय की जायेगी।
देश भर में इनपुट टैक्‍स क्रेडिट का इलेक्‍ट्रॉनिक मिलान संभव हो पायेगा। इस तरह प्रक्रिया और ज्‍यादा पारदर्शी एवं स्‍पष्‍ट हो जायेगी।

(ग) उपभोक्‍ताओं को लाभ

(1) निर्माता, खुदरा विक्रेता तथा सेवा आपूर्तिकर्ता के बीच इनपुट टैक्‍स क्रेडिट के निर्बाध प्रवाह से वस्‍तुओं की अंतिम कीमतें कम होने की आशा है।

(2) आशा की जाती है कि बड़ी संख्‍या में छोटे खुदरा विक्रेताओं को या तो कर से छूट मिलेगी या उन पर संयुक्‍त योजना के अंतर्गत बहुत कम टैक्‍स लगेगा। अत: उपभोक्‍ता ऐसे विक्रेताओं से कम दाम में वस्‍तु खरीद सकेंगे।

(3) कंपनियों पर औसत कर बोझ कम रहने की संभावना है जिससे कीमतें घट जाने की आशा है। मूल्‍य में कमी का अर्थ है अधिक उपभोग।

वस्‍तु एवं सेवा कर नेटवर्क

वस्‍तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) का गठन सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम, 1956 की पूर्व धारा 25 के अंतर्गत निजी कंपनी के रूप में किया गया है। जीएसटीएन करदाताओं को तीन तरह की सेवाएं देगा। ये हैं: पंजीकरण, भुगतान और रिटर्न संबंधी सेवा। करदाताओं को ऐसी सेवाएं प्रदान करने के अलावा जीएसटीएन उन 25 राज्‍यों के लिए बैक-एंड आईटी मॉड्यूल्स विकसित करेगा जिन्होंने इस प्रकार का विकल्प चुना है। वर्तमान करदाताओं को नई व्‍यवस्‍था के अंतर्गत लाने का कार्य (माइग्रेशन) नवंबर 2016 से ही प्रारंभ हो गया है। केंद्र और राज्‍यों के राजस्‍व विभाग मौजूदा पंजीकृत करदाताओं से वस्‍तु तथा सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) द्वारा संचालित आईटी प्रणाली पर आवश्‍यक औपचारिकताएं पूरी करने का आग्रह कर रहे हैं, ताकि उनका सफलतापूर्वक माइग्रेशन हो सके। लगभग 60 प्रतिशत वर्तमान पंजीयनकर्ता जीएसटी प्रणाली अपना चुके हैं। जीएसटीएन ने प्रबंधित सेवा प्रदाता (एमएसपी) के रूप में मेसर्स इनफोसिस को 5 वर्षों की अवधि के लिए लगभग 1380 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत के साथ पहले ही नियुक्‍त कर लिया है।
8.1 जीएसटीएन ने 34 आईटी, आईटीईएस तथा वित्‍तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों को चुना है जिन्‍हें जीएसटी सुविधा प्रदाता (जीएसपी) कहा जायेगा। जीएसपी एप्‍लीकेशन विकसित करेगा जिसका इस्‍तेमाल करदाता जीएसटीएन के साथ संपर्क के लिए करेंगे।

अन्‍य विधायी आवश्‍यकताएं

जीएसटी को लागू करने के लिए उपयुक्‍त विधायी प्रस्‍ताव (केंद्रीय जीएसटी विधेयक, यूटीजीएसटी विधेयक तथा आईजीएसटी विधेयक) संसद द्वारा मंजूर किए गए हैं जिसको संविधान से शक्तियां प्राप्‍त हैं। भारत के माननीय राष्‍ट्रपति ने भी चारों विधेयकों- सीजीएसटी, आईजीएसटी, यूटीजीएसटी तथा राज्‍य क्षतिपूर्ति विधेयक को अपनी स्‍वीकृति दे दी है। ये सभी विधेयक अब अधिनियम बन गए हैं। वहीं, दूसरी ओर जीएसटीसी द्वारा अनुशंसित राज्‍य जीएसटी को राज्‍य विधानमंडलों द्वारा स्‍वीकृत किया जाना है। संवैधानिक संशोधन से भिन्‍न जीएसटी विधेयक साधारण बहुमत से पारित किए जाएंगे। संबंधित विधायिका द्वारा जीएसटी कानून बनाने के बाद ही टैक्‍स लगाने का काम शुरू हो सकता है। राज्‍य वैट के विपरीत इस कर को लागू करने की तिथि केंद्र और सभी राज्‍यों में एक होनी चाहिए। ऐसा इसलिए कि केंद्र और सभी राज्‍यों के एक साथ भाग नहीं लेने से आईजीएसटी मॉडल काम नहीं कर सकता।
सीबीईसी की भूमिका

10. सीबीईसी जीएसटी कानून और प्रक्रियाओं के प्रारूप तैयार करने विशेषकर केंद्रीय क्षेत्र के लिए सीजीएसटी और आईजीएसटी कानून बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसके अतिरिक्‍त सीबीईसी को क्रियान्‍वयन चुनौतियों का सामना करने के लिए अग्रिम तैयारी करने की भी आवश्‍यकता होगी। करदाताओं की संख्‍या काफी ज्‍यादा बढ़ जाने की संभावना है। इस तरह के विशाल डेटा को प्रबंधित करने के लिए सीबीईसी की वर्तमान आईटी संरचना को भी उन्‍नत बनाना होगा। जीएसटी के कानूनी प्रावधानों और प्रक्रिया के आधार पर कार्य-प्रवाह (वर्क-फ्लो) सॉफ्टवेयर जैसे कि एसीईएस (ऑटोमेटेड सेंट्रल एक्‍साइज एंड सर्विस टैक्‍स) की विषय-वस्‍तु की फिर से इंजीनियरिंग करनी होगी। डीजी सिस्‍टम्स ने सीबीईसी के लिए जीएसटी प्रणाली लागू करने हेतु एक एक संचालन समिति का गठन पहले ही कर दिया है। मंत्रिमंडल ने 28 सितंबर, 2016 को जीएसटी के अतर्गत सीबीईसी की आईटी परियोजना को स्‍वीकृति दी। इस परियोजना का नाम ‘सक्षम’ है और परियोजना का कुल मूल्‍य 2,256 करोड़ रुपये है।
10.1 यह भी महसूस किया गया कि जीएसटी को सहज और कारगर ढंग से लागू करने के लिए संगठनात्‍मक ढांचा और मानव संसाधन की तैनाती की समीक्षा की आवश्‍यकता है। व्‍यापक विचार-विमर्श और अध्‍ययन के बाद एक कार्यसमूह ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जिसे सरकार ने स्‍वीकार कर लिया है।

10.2 पूरे देश में जीएसटी के अंतर्गत करदाताओं के बड़े आधार को प्रबंधित करने के लिए मानव संसाधनों को बढ़ाने की जरूरत होगी। विशेषकर विभागीय अधिकारियों के लिए लेखा और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर क्षमता सृजन करना होगा। एनएसीईएन के नेतृत्‍व में चार स्‍तरीय व्‍यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस प्रशिक्षण परियोजना का उद्देश्‍य सीबीईसी के 60,000 से अधिक अधिकारियों तथा राज्‍य सरकारों के वाणिज्यिक कर अधिकारियों को जीएसटी कानून और प्रक्रियाओं के बारे में प्रशिक्षि‍त करना है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीएजी कार्यालय के अधिकारीगण भी भाग ले रहे हैं और प्रशिक्षण प्राप्‍त कर रहे हैं। 50,000 से अधिक अधिकारी प्रशिक्षित किए जा चुके हैं।

10.3 यह अपेक्षा की जाती है कि जीएसटी जैसा अहम सुधार व्‍यापार एवं उद्योग जगत में लोकप्रिय है और इससे वे भलीभांति परिचित हैं, जो इस सुधार के सफल कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण हितधारक हैं। मॉडल जीएसटी कानून को सार्वजनिक तौर पर प्रस्‍तुत कर देने के बाद सीबीईसी के विभिन्‍न कार्यालयों द्वारा आम जनता तक व्‍यापक पहुंच और ज्ञान साझा करने के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। अभी तक 20,000 से अधिक लोगों को इसकी जानकारी सुलभ हो चुकी है।

10.4 सीजीएसटी तथा आईजीएसटी कानून के संचालन के लिए सीबीईसी उत्‍तरदायी होगा। इसके अलावा, पांच विशेष पेट्रोलियम उत्‍पादों के साथ-साथ तम्‍बाकू उत्‍पादों पर केंद्रीय उत्‍पाद शुल्‍क लगाने और एकत्रित करने का काम भी सीबीईसी द्वारा किया जाएगा। सीमा शुल्‍क लगाने और एकत्रित करने का काम भी सीबीईसी द्वारा जारी रखा जाएगा।

10.5 सीबीईसी की वेबसाइट www.cbec.gov.in पर निम्‍नलिखित सूचनाएं उपलब्‍ध हैं:

(i) जीएसटी पर प्रस्‍तुति

(ii) जीएसटी- अवधारणा और वस्‍तु-स्थिति

(iii) अंग्रेजी तथा 10 क्षेत्रीय भाषाओं में जीएसटी पर प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्‍न

(iv) मॉडल जीएसटी कानून

(v) नियमों का मसौदा एवं प्रारूप

(vi) संविधान संशोधन अधिनियम

आगे की राह

देश में जीएसटी को लागू करने से पहले अनेक लक्ष्‍यों को पूरा करने की आवश्‍यकता है। निम्‍नलिखित कार्यों को निश्चित समय सीमा के अंदर पूरा करने की जरूरत है:
(i) संसद द्वारा सीजीएसटी, यूटीजीएसटी, आईजीएसटी तथा जीएसटी क्षतिपूर्ति कानूनों को पारित करना और सभी राज्‍यों के विधानमंडल द्वारा एसजीएसटी कानूनों को पारित करना

(ii) जीएसटी परिषद द्वारा मॉडल जीएसटी नियमों की सिफारिश

(iii) जीएसटी नियमों को अधिसूचित करना

(iv) जीएसटी परिषद द्वारा जीएसटी की दरों की सिफारिश

(v) आईटी संचरना की स्‍थापना और उन्‍नयन

(vi) कार्यान्‍वयन की चुनौतियों से निपटना

(vii) केंद्र तथा राज्‍य कर प्रशासनों के बीच प्रभावकारी समन्‍वय स्‍थापित करना

(viii) फील्‍ड कार्यालयों का पुनर्गठन करना

(ix) अधिकारियों का प्रशिक्षण, तथा

(x) व्‍यापार और उद्योग सहित सभी हितधारकों के लिए पहुंच कार्यक्रम

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(PIB)

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