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मधुवन – झारखंड के गिरिडीह जिले के विभिन्न दर्शनीय स्थलों में से मधुवन एक विशेष आकर्षण है

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गिरिडीह  झारखंड अपने विभिन्न रोमांचकारी स्थलों के बारे में जाना जाता है जहाँ पर्यटकों को वास्तव में साहसिक गतिविधियों और खेलों के अनुभव के लिए विस्तृत क्षेत्र मिलते हैं। इन गतिविधियों का आनंद गिरिडीह, पारसनाथ, और सतपहाण हिल्स में लिया जा सकता है। गिरिडीह जिला इस तरह की रोमांचकारी गतिविधियों का केंद्र रहा है और पूरे देश के हर कोने से पर्यटकों को आकर्षित करता है। पैराग्लाइडिंग, वाटर स्पोर्ट्स और पैरासेलिंग जैसी कुछ अलग तरह की गतिविधियाँ इस राज्य को लोकप्रिय बना रही हैं। वाटर स्पोर्ट्स गिरिडीह का एक आम मनोरंजन है। जिले के उत्तर पूर्व में 8 किमी की दूरी पर एक जलाशय है जहाँ विभिन्न रोमांचकारी खेल खेले जाते हैं। चिड़ियों के जिज्ञासुओं के लिए विहंगावलोकन, व्यस्त रहने का एक दूसरा तरीका है। रोमांच का सफ़र वाटर स्पोर्ट्स पर आकर ख़तम नहीं हो जाता। हाथी और ऊंट सफारी मनोरंजन के दूसरे साधन हैं। बोटिंग, रॉकक्लाइम्बिंग, पैरासेलिंग और कयाकिंग जैसी गतिविधियों का भी मजा यहाँ लिया जा सकता है। हॉट एयर बलून की सवारी यहाँ की अन्य रोमांचकारी गतिविधि है, जिसका मजा गिरिडीह में लिया जा सकता है। प्रशिक्षक के द्वारा सही प्रशिक्षण के बाद पर्यटक आकाश की यात्रा कर सकते हैं और प्रकृति का नज़ारा कर सकते हैं।  पैरासेलिंग को हवाई स्पोर्टस माना जाता है। एक पैराशूट जिसे पैरासेल कहा जाता है जीप द्वारा जमीन पर या मोटर गाड़ी से पानी पर एक रस्सी द्वारा खींचा जाता है। खुली हवा में उड़ना वास्तव में एक रोमांचकारी अनुभव है। तो आइये आपको ले चलते है गिरिडीह की सैर पर |

madhubanमधुवनझारखंड के गिरिडीह जिले के विभिन्न दर्शनीय स्थलों में से मधुवन एक विशेष आकर्षण है। यह एक गाँव है जहाँ एक मंदिर 2000 साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है। यह पिर्टलैंड ब्लॉक में स्थित है और जैनियों का एक धार्मिक स्थल है। समोशरण मंदिर और भौमिया जी आस्थान मधुवन के सबसे महत्वपूर्ण जैन मंदिर हैं। जैन म्यूज़ियम में रखे गए जैन धर्मग्रन्थ, पांडुलिपियाँ और मूर्तियाँ, पर्यटकों को कई अनजान तथ्यों की जानकारी देते हैं। म्यूज़ियम की बालकनी में एक टेलिस्कोप है जिससे पर्यटक पारसनाथ मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। यदि कोई पारसनाथ मंदिर के लिए ट्रैकिंग करना चाहता है तो उसे मधुवन से चढ़ाई शुरू करनी पड़ती है। इसकी चढ़ाई मंदिर के उत्तरी दिशा से 13 किमी तक चढ़नी पड़ती है। यहाँ तक कि बसें भी मधुवन तक आकर रुक जाती हैं जहाँ से लोगों के पास चढ़ाई के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं होता है। गिरिडीह से मधुवन 40 किमी और पारसनाथ 10 किमी की दूरी पर है। बहुत से जैन मंदिरों की उपस्थित इस जगह को जैनियों के लिए पूरे संसार में सबसे पवित्र जगह बना देती है। अतः मधुवन एक पिकनिक स्पॉट बन गया है जिसकी शाकाहारी व्यंजनों और मदिरा को लेकर अपनी सीमाएँ हैं। मधुवन के विश्राम गृह मंदिर के थके हुए भक्तों को आराम की सुविधा देते हैं। इस गाँव के जैन मंदिरों में कुछ भित्ति चित्र हैं जो पारसनाथ हिल पर स्थित मंदिरों को दर्शाते हैं। पारसनाथ का एक प्रतीक जिस पर चौथी शताब्दी की तारीख खुदी हुई है, पालगंज के इस मंदिर में मौजूद है। यह मधुवन से 12 किमी की दूरी पर स्थित है।

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