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दलमा वन्‍य अभ्‍यारण्‍य:- 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित तथा 193 वर्ग किमी. में फैले इस अभ्‍यारण्‍य का उदघाटन स्‍वर्गीय संजय गांधी ने किया था

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जमशेदपुर :-

जिसका दूसरा नाम टाटानगर भी है, भारत के झारखंड राज्य का एक शहर है। यह झारखंड के दक्षिणी हिस्से में स्थित पूर्वी सिंहभूम जिले का हिस्सा है। जमशेदपुर की स्थापना को पारसी व्यवसायी जमशेतजी नौशरवान जी टाटा के नाम से जोड़ा जाता है। 1907 में टाटा आयरन ऐंड स्टील कंपनी (टिस्को) की स्थापना से इस शहर की बुनियाद पड़ी। इससे पहले यह साक्ची नामक एक आदिवासी गाँव हुआ करता था। यहाँ की मिट्टी काली होने के कारण यहाँ पहला रेलवे-स्टेशन कालीमाटी के नाम से बना जिसे बाद में बदलकर टाटानगर कर दिया गया। खनिज पदार्थों की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता और खड़कई तथासुवर्णरेखा नदी के आसानी से उपलब्ध पानी, तथा कोलकाता से नजदीकी के कारण यहाँ आज के आधुनिक शहर का पहला बीज बोया गया। जमशेदपुर आज भारत के सबसे प्रगतिशील औद्योगिक नगरों में से एक है। टाटा घराने की कई कंपनियों के उत्पादन इकाई जैसे टिस्को, टाटा मोटर्स, टिस्कॉन, टिन्पलेट, टिमकन, ट्यूब डिवीजन, इत्यादि यहाँ कार्यरत है।

यातायात :-

जमशेदपुर सड़क और रेल-मार्ग द्वारा पूरे देश से जुड़ा हुआ है। howrah मुम्बई रेल मार्ग पर स्थित होने के कारण टाटानगर दक्षिणपूर्व रेलवे के अत्यंत व्यस्त स्टेशनों में से गिना जाता है। राष्ट्रीय राजमार्गे 33 यहाँ से होकर गुजरती है। नगर के उत्तर पूर्वी हिस्से में एक सोनारी हवाई अड्डा है जो वायुदूत की सेवाओं से जुड़ा है। शहर की ज्यादातर सड़कों का रखरखाव टाटा परिवार के द्वारा होने की वजह से यहाँ की सड़के झारखंड में अन्य शहरों की अपेक्षा काफी अच्छी हैं।

   कैसे पहुँचें :-

वायु यातायात: जमशेदपुर एयर डेकन द्वारा कोलकाता के हवाई अड्डा द्वारा जुड़ा हुआ है। इसके अलावा एक और प्राइवेट एयरलाइंस हफ्ते में दो दिन यहां के लिए दिल्ली से उड़ान भरती है। इस हवाई अड्डे का ज्यादा उपयोग कारपोरेट जहाजों के आगमन-प्रस्थान के लिए किया जाता है। इसके अलावा यहाँ उड़ान प्रशिक्षण के लिए स्थापित जमशेदपुर को-आपरेटिव फ्लाईंग क्लब तथा टाटानगर एवियेशन द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता है। कोलकाता के अतिरिक्त यहाँ निकटतम हवाई अड्डा राँची का जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डा है जो यहाँ से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर है।

रेल-मार्ग: टाटानगर (जमशेदपुर) दक्षिणपूर्व रेलवे के सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से एक है और यह सीधे-सीधे भारत के प्रमुख शहरों जैसे कोलकातामुंबईदिल्लीचेन्नईपटनारायपुरभुवनेश्वर इत्यादि से जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन को टाटानगर के नाम से जाना जाता है।

सड़क मार्ग: जमशेदपुर सड़क मार्ग द्वारा भारत के सभी बड़े शहरों से जुड़ा है। शहर से होकर राष्ट्रीय राजमार्ग 33(बहरागोड़ा से बरही) गुजरती है जो राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 से जुड़ती है जिससे कोलकाता एवंदिल्ली जुड़े हुए हैं। राँची (131 किलोमीटर), पटनागयाकोलकाता (250 किलोमीटर) सहित कई बिहारबंगाल, एवं उड़ीसा के अन्य प्रमुख शहरों से जमशेदपुर के लिए सीधी बस सेवा उपलब्ध (सरकारी एवं निजी) है।

अंदरुनी यातायात: शहर के अंदर परिभ्रमण के लिए ज्यादातर मिनी बसें, तिपहिया वाहन, एवं रिक्शा शहर के सभी हिस्सों में आमतौर पर उपलब्ध हैं।

पर्यटन :-

लौहनगरी के रुप में विख्‍यात जमशेदपुर केवल झारखंड में नहीं, बल्कि पूरे विश्‍व पटल पर चर्चित है। इसे टाटानगर के भी नाम से जाना जाता है। पर्यटन की दृष्टि से टाटानगर का महत्‍व अंतराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी है। इसे हाल में ही इंटरनेशनल क्‍लीन सिटी’ के अवार्ड से नवाजा गया है। लोग पूरे विश्‍व से इस लौहनगरी को देखने आते है। टिस्‍को, टेल्‍को जैसे अंतर्राष्‍टीय स्‍तर के कारखाने के अलावा डिमना लेक, जुबली पार्क, दलमा पहाड़, हुडको लेक, मोदी पार्क, कीनन स्‍टेडियम आदि ऐसे जगह है जहां पर्यटक घूम सकते है।

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दलमा वन्‍य अभ्‍यारण्‍य:- 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित तथा 193 वर्ग किमी. में फैले इस अभ्‍यारण्‍य का उदघाटन स्‍वर्गीय संजय गांधी ने किया था। यहां पर जंगली जानवरों को नजदीक से देखने के लिए अनेक जगह विशेष रुप से बनाए गए है जहां से पर्यटक आसानी से जंगली जानवर जैसे हाथी, हरिण, तेदूंआ, बाघ आदि को देख सकते है। इसके अलावा दुर्लभ वन संपदा यहां देखा जा सकता है।.रात को दलमा पहाड़ी की चोटी से टाटानगर का नजारा बिल्‍कुल आकाश में टिमटिमाते तारें के समान प्रतीत होता है। यहां पर पर्यटकों के ठहरने के लिए टाटास्‍टील तथा वन विभाग द्वारा गेस्‍ट हाउस का भी निर्माण किया गया है। यहां पर एक गुफा में भगवान शिव का प्राकृतिक मंदिर है। जिन्हें श्रद्धा से लोग दलमा बाबा कहते हैं।.इन्हें जमशेदपुर का संरक्षक देवता भी कहा जाता है।. सावन के दिनों में तथा शिवरात्रि के दिन इन मंदिरों को भव्‍य तरीके से सजा कर यहां पर पूजा अर्चना की जाती है। दलमा पहाड़ी हाथियों की प्राकृतिक आश्रयस्थली है।.प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो झारखंड के पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां से लेकर पश्चिम बंगाल के पुरूलिया जिले के बेलपहाड़ी तक इसका दायरा फैला है।.दलमा पहाड़ी में कई आदिवासी गांव हैं।.

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