Home haal_philhaal सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय नि:शक्‍त जन अधिकारिता विभाग की वर्षांत समीक्षा...

सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय नि:शक्‍त जन अधिकारिता विभाग की वर्षांत समीक्षा 2014 आधुनिक सहायता और सहायक उपकरण उपलब्‍ध कराने की नई योजनाओं का शुभारंभ

325
1
SHARE
29-दिसंबर, 2014

सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय ने नि:शक्‍त जनों की अधिकारिता का कार्य नि:शक्‍त जन अधिकारिता विभाग को सौंपा हुआ है। विभाग की प्रमुख गतिविधियां निम्‍नानुसार हैं:-

1.     निश:क्‍त जनों को सहायक उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए सहायता की योजना-एडीआईपी: एडीआईपी योजना के अन्‍तर्गत विभाग,  टिकाऊ, परिष्‍कृत, वैज्ञानिक तरीके से निर्मित, आधुनिक और मानक सहायक उपकरण उपलब्‍ध करा, नि:शक्‍त जनों का शारीरिक, सामाजिक और ‍वैज्ञानिक पुनर्वास कर उनकी आर्थिक क्षमता बढ़ाने के काम में लगी एंजेसियों (राष्‍ट्रीय संस्‍थान/ संयुक्‍त क्षेत्रीय केंद्रों/ भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एएलआईएमसीओ)/जिला नि:शक्‍त जन पुनर्वास केंद्रों/ राज्‍य विकलांग विकास निगमों तथा अन्‍य स्‍थानीय निकायों और स्‍वयं सेवी संगठनों को अनुदान सहायता जारी की जाती है।

एडीआईपी योजना में संशोधन

एक अप्रैल, 2014 से एडीआईपी योजना में संशोधन किया गया है

संशोधित योजना की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:-

(i)          विभाग की योजनाओं की शत प्रतिशत छूट प्राप्‍त करने के लिए आय पात्रता सीमा को 6,500 रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 15,000 रुपए प्रतिमाह किया गया जबकि 50 प्रतिशत छूट के लिए आय सीमा को बढ़ाकर 15,001 से 20,000 प्रतिमाह कर दिया गया।

(ii)        विभाग की 18 वर्ष से कम आयु के दृष्टिबाधित छात्रों को पाँच वर्ष में एक बार मोबाइल फोन देने की योजना है। इसके अलावा स्‍कूल जाने वाले 10वीं और उससे ऊपर की कक्षाओं के दृष्टिबाधित छात्रों को 10 वर्ष में एक बार लैपटॉप, ब्रैल नोट टेकर और ब्रैलर दिलाए जाने की भी योजना है।

(iii)      संशोधित योजना के अन्‍तर्गत एकल निशक्‍तता वाले व्‍यक्तियों को 6,000 से 10,000 के सहायक उपकरण जबकि पूर्णतया विकलांग जनों को 8000 से 12000 के सहायक उपकरण दिलवाये जाने की योजना है।

(iv)      मेडिकल/सर्जिकल सुधार के लिए सहायता राशि प्राप्‍त करने के लिए  वर्तमान 500 से 3000 रुपए की सीमा को संशोधित कर निम्‍नलिखित कर दिया गया है:-

(क) बोलने और सुनने में नि:शक्‍त जनों को सहायता 500 रुपये से 1,000 रुपये की गई,

(ख) दृष्टिबाधित जनों को सहायता राशि बढ़ाकर 1,000 रुपये से 2,000 रुपये की गई,

(ग) अस्थि विकलांग जनों को सहायता बढ़ाकर 3,000 रुपये से 5,000 रुपये की गई।

 

(v)        गंभीर तथा लोकोमोटर गतिशील विकलांगों जैसे- पूर्ण पक्षाघात ‘एससीआई’, स्‍नायु दुर्विकार, आघात, मस्तिष्‍क पक्षाघात,  अर्धांगवात और इसी प्रकार के अन्‍य रोगों से पीडि़त, जिसके कारण शरीर के तीन/चार अवयव अथवा आधा शरीर गंभीर रूप से विकलांग हो, ऐसे व्‍यक्तियों के लिए मोटरयुक्‍त ति-पहिया साईकिल और व्‍हीलचेयर के लिए सहायता राशि वर्तमान 6,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई। यह सहायता 18 वर्ष से अधिक आयु के व्‍यक्तियों को दस वर्ष में एक बार दी जाएगी।

(vi)      योजना के तहत बधिरता विकार से ग्रस्‍त निशक्‍त जनों में कर्ण तंत्रिका के विकास के लिए वर्ष में 500 बच्‍चों को इकाई के रूप में कोहिलर इम्‍प्‍लांट के लिए प्रति इकाई छः लाख रुपए तक की स‍हायता दी जाएगी। योजना के अन्‍तर्गत 100 प्रतिशत सहायता प्राप्‍त करने के लिए लाभार्थी की आय सीमा 15,000 रुपये प्रतिमाह तक होनी चाहिए जबकि 15,001 से 20,000 रुपये आय वर्ग वाले व्‍यक्तियों को 50 प्रतिशत सहायता राशि दी जाएगी।

(vii)    कार्यान्‍वयन करने वाली एंजेसियों को सहायता राशि के प्रावधान में से 5 प्रतिशत का प्रयोग जागरूकता अभियान, मूल्‍याकंन और आगे की जांच आदि के लिए करने की छूट दी गई है।

2014-15 के बजट में 110 करोड़ की सहायता का आवंटन

2. निशक्‍त जन अधिनियम-1995 के तहत योजना (एसआईपीडीए)

I.      निशक्‍त जन कानून के अन्‍तर्गत योजना के तहत केंद्र और राज्‍य सरकार द्वारा संस्‍थानों/ संगठनों को विभिन्‍न गतिविधियों के लिए वित्‍तीय सहायता दी जाती है। विशेष तौर पर विश्‍वविद्यालयों में प्रतिबंध मुक्‍त पर्यावरण, सार्वजनिक इमारतों, राज्‍य सरकार के सचिवालयों, राज्‍यों के नि:शक्‍त जन आयुक्‍त कार्यालय आदि के‍ लिए सहायता राज्‍य और जिला स्‍तर पर नि:शक्‍त जनों द्वारा उपयोग की जाने योग्‍य सरकारी वेबसाइट बनाना। जिला मुख्‍यालयों/ अन्‍य स्‍थानों जहां सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं वहां शीघ्र निदान और मध्‍यवर्तन केंद्रों की स्‍थापना। जिन स्‍थानों पर सरकारी/ स्‍थानीय निकायों की भूमि खाली पड़ी हो वहां निःशक्‍त जनों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम चलाना, विशेष मनोरंजन स्‍थलों का निर्माण करना आदि।

2014-15               के बजट में 110 करोड़ की सहायता का आवंटन

 

3.        नेशनल इंस्‍टीट्यूट फार इनक्‍लूशिव एंड यूनिवर्सल डिजाइन की स्‍थापना

मंत्रालय ने वैश्विक डिजाइन के समन्वित कार्यक्रम के अन्‍तर्गत नेशनल इंस्‍टीट्यूट फार इनक्‍लूशिव एंड यूनिवर्सल डिजाइन की स्‍थापना का प्रस्‍ताव किया है। इस कार्यक्रम के तहत निशक्‍त जनों को महत्‍व देते हुए सभी के लिए आदर्श पर्यावरण का ध्‍यान रखा जाएगा।

4.     इंडियन साइन लैंग्‍वेज अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र की स्‍थापना (आईएसएलआरटीसी):

  • मंत्रालय ने  निशक्‍त जन विभाग के संरक्षण में इंडियन साइन लैंग्‍वेज अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र की स्‍थापना का प्रस्‍ताव रखा है।
  • यह संस्‍थान शैक्षणिक विकास, प्रशिक्षण और इंडियन साइन लैंग्‍वेज के प्रचार के कार्य देखेगा।

5.        स्‍टेट स्‍पाइनल इंजरी सेन्‍टर:

  • विभाग ने राज्‍य स्‍तर पर स्‍पाइनल इंजरी केंद्र की स्‍थापना के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की है। इस केंद्र के निर्माण के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना में 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
  • इन केंद्रों में मुख्‍य रुप से रीढ़ में आई चोट के समग्र प्रबंधन पर ध्‍यान दिया जाएगा।

6.     निशक्‍त जन खेल केंद्र की स्‍थापना:

  • 12वीं पंचवर्षीय योजना में निशक्‍त जन खेल केंद्रों की स्‍थापना के लिए 20 करोड़ का प्रावधान किया गया।
  • इस कार्य की विस्‍तृत रिपोर्ट प्रस्‍तुत करने के लिए सलाहकार की नियुक्ति के लिए कार्य आरंभ कर दिया गया है।
  • मंत्रालय ने क्षेत्रीय केंद्रों की स्‍थापना करने की प्रस्‍ताव भी रखा है।

7.     सहायता एवं सहायक उपकरणों की जानकारी देने वाली निर्देशिका:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्‍वायत्‍तशासी निकाय टीआईएफएसी के साथ सहयोग में विभाग ने नि:शक्‍त जनों को उपकरणों और उनकी जरूरतों को पूरा करने की जानकारी उपलब्‍ध करवाने वाले एक वेबपोर्टल की शुरूआत की। इस पोर्टल का उद्घाटन 3 दिसम्‍बर, 2014 को राष्‍ट्रपति ने किया।

8.        नि:शक्‍त जनों के अधिकार:-

निशक्‍त जन (समान अवसर, संरक्षण और पूर्ण सहभागिता) अधिनियम-1995, 17 वर्ष से अधिक समय से लागू है। इस कानून के विभिन्‍न प्रावधानों और संयुक्‍त राष्‍ट्र सम्‍मेलन के निशक्‍त जन अधिकार से सामंजस्‍य कायम करते हुए व्‍यापक विचार विमर्श के बाद निशक्‍त जन विधेयक-2013 को पारित किया गया। इस पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार के विभिन्‍न मंत्रालय/विभाग, राज्‍य सरकारें/केंद्रशासित प्रदेश और विभिन्‍न हितधारक चर्चा में शामिल हुए और इसे अंतिम रुप दिया। इसके अनुसार विभाग ने 11 दिसम्‍बर, 2013 को वर्तमान निशक्‍त जन अधिकार और अधिनियम-2013 को बदलने के लिए मंत्रिमंडलीय टिप्‍पणी प्रेषित की। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 दिसम्‍बर, 2013 की बैठक में संशोधित कानून को स्‍वीकृति दे दी। जिसके बाद निशक्‍त जन अधिकार अधिनियम -2014 को 6 फरवरी, 2014 को राज्‍यसभा में पेश किया गया और संबंधित विभाग ने इस विधेयक को संसदीय स्थायी समिति को प्रेषित कर दिया।

9.     अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

यूनेस्‍को ने निशक्त जनों के सशक्तिकरण पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “निशक्त जन, निषेध से सशक्तिकरण : सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की भूमिका” का आयोजन 24 से 26 नवम्बर, 2014 तक नई दिल्ली में किया। इस सम्मेलन के आयोजन में मानव संसाधन मंत्रालय और इस विभाग ने सहयोग दिया। इस सम्मेलन में निःशक्तजनों की सूचना और जानकारियों तक पहुंच, समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रौद्योगिकी समाधान जैसी प्रमुख चुनौतियों पर मुख्य चर्चा की गई। इस आयोजन में विभाग ने केवल सहयोग ही नहीं किया बल्कि इस दौरान आयोजित प्रदर्शनी, बैठकों और सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में भागीदारी भी की।

10.            निःशक्तजन जिला पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी)

निःशक्तजनों को समग्र पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर ढांचागत सुविधाएं और क्षमता निर्माण के विकास के लिए और इन सुविधाओं के प्रति जमीनी स्तर पर जागरूकता पैदा करने, पुनर्वास पेशेवर को प्रशिक्षित करने के लिए मंत्रालय ने देश के जिलों में  निशक्तजन जिला पुनर्वास केंद्रों की स्थापना की। मार्च 2010 तक इस तरह के 199 केंद्रों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 185 केंद्र इस समय कार्य कर रहे हैं। वित्तमंत्री ने 2010-11 के अपने बजट भाषण में 11वीं पंचवर्षीय योजना के शेष समय में 100 नए केंद्र खोलने की घोषणा की। घोषणा के अनुरूप 20 राज्यों के 100 जिलों में पुनर्वास केंद्र खोलने के संबंधित राज्य सरकारों से केंद्रों की स्थापना के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जापानी बुखार इंसेफेलाटिस/एक्यूट इंसेफेलाटिस सिंड्रोम की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत 5 राज्यों के प्राथमिकता वाले 60 जिलों में तथा 4 राज्यों के शेष उच्च प्राथमिकता वाले 15 नए जिला पुनर्वास केंद्रों की स्थापना को मंजूरी दी गई। 15 में से 11 केंद्रों की स्‍थापना की जा चुकी है। देश में 247 पुनर्वास केंद्र काम कर रहे हैं।

 

11.            राष्‍ट्रीय संस्‍थानों के प्रमुख कार्य:

  • राष्‍ट्रीय दृष्टिबाधिता संस्‍थान के परिसर में 14 नवम्‍बर, 2014 को विशेष शिक्षा और निशक्‍तता अध्‍ययन के लिए इमारत का शिलान्‍यास।
  • ओडिशा में 25 अगस्‍त, 2014 को राष्‍ट्रीय पुनर्वास प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्‍थान, (एनआईआरटीएआर)  कटक (ओडिशा) में लड़कियों के नए हॉस्‍टल का शिलान्‍यास।
  • बहु नि:शक्‍तता सशक्तिकरण राष्‍ट्रीय संस्‍थान, चेन्‍नई में 26 सितम्‍बर, 2014 को जलीय चिकित्‍सा पूल और एथलीथ ट्रैक शिलान्‍यास किया।
  • एसवीएनआईआरटीएआर, कटक में 25 अगस्‍त, 2014 को 4.70 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 150 बिस्‍तर वाले बालिका हॉस्‍टल का उद्घाटन।
  • पुनर्वास केंद्र की नई इमारतों का शिलान्‍यास

1.     श्रीनगर में 18 जून, 2014 को तीन करोड़ रुपये की लागत से

 

  • राष्‍ट्रीय मानसिक विकलांग संस्‍थान (एनआईएमएच), सिकंदराबाद में 13 जून,2014 को नए अकादमिक ब्‍लॉक का उद्घाटन किया गया। इस पर 5.00 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
  • एनआईएमएच, सिकंदराबाद में 13 जून, 2014 को 15 करोड़ की लागत से बनने वाले सेंसरी पार्क का शिलान्‍यास
  • ब्रेल पृष्‍ठों का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए 10 वर्तमान ब्रैल प्रैस का आधुनिकीकरण और 15 नई ब्रेल प्रैसों का स्‍थापना
  • एनएचएफडीसी और विभाग के अन्‍तर्गत राष्‍ट्रीय संस्‍थानों ने   2252 निशक्‍तों को व्‍यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
  • राष्‍ट्रीय दृष्टिबाधिता संस्‍थान, देहरादून ने सफलतापूर्वक सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 29 अक्‍टूबर, 2014 को दिया गया ‘डॉक्‍टर बाबा साहेब अम्‍बेडकर: लेखन और भाषण’ का प्रकाशन ब्रैल में करने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया। इस कार्य को एक समारोह में सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत ने चार वाल्‍यूम में जारी किया।
  • नि:शक्‍त मामले विभाग ने राष्‍ट्रीय संस्‍थान में कार्य कर रहे डॉक्‍टरों के लिए डायनेमिक एश्‍योर्ड करियर प्रोग्रेशन योजना (डीएसीपी) को मंजूरी दी। यह डीएसीपी योजना 21 अक्‍टूबर, 2008 से प्रभावी है।
  • सभी राष्‍ट्रीय संस्‍थान प्रधानमंत्री द्वारा 02 अक्‍टूबर, 2014 को शुरू किए गए स्‍वच्‍छ भारत मिशन को लागू कर रहे हैं।
  • बहु नि:शक्तात स सशक्तिकरण राष्‍ट्रीय संस्‍थान, चेन्‍नई ने 26 सितम्‍बर, 2014 को बधिरता-दृष्टिबाधितों के लिए एक पुस्‍तक का विमोचन किया।
  • दृष्टिबाधितों के लिए उपयोग में आसान एक वेबसाइट का उद्घाटन राष्‍ट्रीय पुनर्वास प्रशिक्षण और संस्‍थान में 25 अगस्‍त 2014 को माननीय मंत्री महोदय ने किया। इस वेबसाइट को एसवीएनआईआरटीएआर, कटक (ओडिशा) द्वारा तैयार किया गया है।
  • राष्‍ट्रीय दृष्टिबाधिता संस्‍थान, देहरादून ने दो रोजगार मेलों का आयोजन किया। इनमें से एक 21 मई, 2014 को हिमाचल प्रदेश के सुन्‍दर नगर में और दूसरा उत्‍तराखंड के देहरादून में 28 जून, 2014 को आयोजित किया गया। इन मेलों में दस निजी कम्‍पनियों ने भाग लिया। 455 निशक्‍त जन मेले में आए जिनमें से 74 को भागीदार कम्‍पनियों से रोजगार मिल गया।
  • राष्‍ट्रीय दृष्टिबाधिता संस्‍थान, देहरादून ने अपनी पूर्वोत्‍तर परियोजना के तहत नेपाली, गारो और खासी भाषाओं में ब्रैल पाठ्यक्रम तैयार किए हैं।
  • नि:शक्‍त जनों के लिए पंडित दीनदयाल संस्‍थान, दिल्‍ली ने स्‍थानीय गैर सरकारी संगठन सार्थक के साथ मिलकर एक रोजगार मेले का आयोजन 19 जून, 2014 को किया। इस मेले का उद्देश्‍य निशक्‍त जनों की क्षमताओं से पेशेवरों को परिचित कराकर, उन्‍हें उचित रोजगार उपलब्‍ध कराना था।
  • देशभर में 50 गैर सरकारी संगठन बहु नि:शक्तात स सशक्तिकरण राष्‍ट्रीय संस्‍थान, चेन्‍नई की सहायता से प्रधानमंत्री कौशल विकास कार्यक्रम को लागू कर रहे हैं।
  • मंत्रालय ने यूनेस्‍को और बहु नि:शक्तात स सशक्तिकरण राष्‍ट्रीय संस्‍थान, चेन्‍नई के सहयोग से अन्‍तर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन किया। 24-26 नवम्‍बर, 2014 के बीच विज्ञान भवन, नई दिल्‍ली में आयोजित इस सम्‍मेलन का उद्देश्‍य था निशक्‍त जनों के कल्‍याण में आईसीटी की भूमिका और विकलांगता से संबंधित फिल्‍मों दिखाना।
  • माननीय सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्री ने 29 अक्‍टूबर, 2014 को विज्ञान भवन में बहु नि:शक्तता सशक्तिकरण राष्‍ट्रीय संस्‍थान, चेन्‍नई द्वारा आयोजित दो दिवसीय अन्‍तर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्‍मेलन में यू के, रूस, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
  • पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के लिए ‘’क्रॉस डिसएबिलिटी मैनेजमेंट’’ पर जनवरी, 2015 में एक तीन दिवसीय राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन प्रस्‍तावित है। सम्‍मेलन का आयोजन भारतीय पुनर्वास परिषद कर रही है।
  • स्‍वामी विवेकानंद राष्‍ट्रीय पुनर्वास प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्‍थान- (एसवीएनआईआरटीएआर) कटक ने कम्‍पनियों के सामाजिक दायित्‍व के तहत वर्तमान ऑपरेशन थियेटर का आधुनिकीकरण कर मॉडूलर ऑपरेशन थियेटर बनाने का कार्य शुरू करवाया है।
  • 15,000 निशक्‍त जनों में कौशल विकास के लिए उन्‍हें व्‍यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है। इसका संचालन एनएचएफडीसी और राष्‍ट्रीय संस्‍थान द्वारा किया जाएगा।

12. दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना- (डीडीआरएस)

निशक्‍त मामले विभाग अपने प्रमुख कार्यक्रम दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना के तहत गैर सरकारी संगठनों-एनजीओ को पुनर्वास कार्यों की विभिन्‍न परियोजनाओं के लिए सहायता देता है। इन परियोजनाओं का उद्देश्‍य विकलांगों को व्‍यवसायिक प्रशिक्षण देकर इस योग्‍य बनाना होता है कि वे अपने सर्वोत्‍कृष्‍ट शारीरिक, इन्द्रिय, बौद्धिक, मनोवैज्ञानिक अथवा सामाजिक कार्यात्‍मक स्‍तर को प्राप्‍त कर बनाए रख सकें। इस योजना के अन्‍तर्गत 18 मॉडल परियोजनाएं हैं जिनके तहत 66 श्रेणियों में 48 तकनीकी, 4 तकनीकी (अंशकालिक) और 14 गैर तकनीकी श्रेणियां शामिल हैं। विकलांग बच्‍चों/व्‍यक्तियों को विभिन्‍न सेवाएं देने के लिए डीडीआरएस के अन्‍तर्गत निम्‍न कार्यक्रमों के लिए सहायता राशि (परियोजना लागत के 90 प्रतिशत तक) प्रदान की जाती है।

(1) प्री-स्‍कूल और प्रारंभिक सहायता के कार्यक्रम

(2) विशेष शिक्षा

(3) व्‍यवसायिक प्रशिक्षण और नियोजन (रोजगार)

(4) समुदाय आधारित पुनर्वास

(5) मानव शक्ति विकास

(6) मानसिक रोग से ग्रस्‍त व्‍यक्तियों का मनोवैज्ञानिक- सामाजिक पुनर्वास

(7) कुष्‍ठ रोग निवारण के बाद पुनर्वास आदि।

वर्ष 2013-14 में योजना के अन्‍तर्गत कुल स्‍वीकृत प्रस्‍तावों की संख्‍या 978 थी,जिनकी लागत 63.64 करोड़ थी। वित्‍तीय वर्ष 2014-15 में 23.12.2014 तक 27.05 करोड़ लागत के प्रस्‍तावों को स्‍वीकृति दी गई।

13. विभाग की छात्रवृति योजना

वर्ष 2014 के दौरान विकलांग छात्रों के कल्‍याण के लिए निशक्‍त मामले विभाग ने निम्‍नलिखित तीन नई योजनाएं शुरू कीं।

(1) विकलांग छात्रों के लिए राष्‍ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति

(2)  एवं

(3) विकलांग छात्रों के लिए प्री मैट्रिक स्‍कोलरशिप और पोस्‍ट मैट्रिक स्‍कोलरशिप

योजनाओं की संक्षिप्‍त जानकारी इस प्रकार है:-

(1)  विकलांग छात्रों के लिए राष्‍ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति

विकलांग छात्रों के लिए राष्‍ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति की योजना की शुरूआत  विदेशों में स्‍नातकोत्‍तर और पीएच. डी कर रहे छात्रों के लिए किया गया। इसके तहत हर साल 20 विद्यार्थियों को वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाती है जिसमें से छह छात्राओं के लिए आरक्षित हैं।  छात्रवृत्ति के तहत भरण-पोषण खर्च, आकस्मिक खर्च, ट्यूशन फीस और आने-जाने के लिए हवाई यात्रा का खर्च आदि दिए जाने का प्रावधान  है।

इसके अतिरिक्‍त प्रति वर्ष दो निशक्‍त छात्रों को यात्रा छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है। स्‍नातकोत्‍तर शिक्षा, शोध और विदेश में प्रशि‍क्षण (सेमिनारों,कार्यशालाओं और सम्‍मेलनों को छोड़कर) के लिए केवल उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन करने वाले वहीं निशक्‍त छात्र छात्रवृत्ति प्राप्‍त करने के पात्र हैं जिन्‍होंने विदेशी सरकार/संस्‍थानों अथवा किसी अन्‍य योजना के तहत यात्रा किराया प्राप्‍त न किया हो। यात्रा छात्रवृत्ति के तहत गृह नगर से विदेश स्थित संस्‍थान आने-जाने एयर इंडिया एयरलाइंस के इकोनोमी क्‍लास का किराया प्रदान किया जाता है। इस छात्रवृत्ति के लिए आवेदन मांगे जा चुके हैं और पात्र उम्‍मीदवार के चयन की प्रक्रिया चालू है।

(2) एवं

(3) विकलांग छात्रों के लिए प्री मैट्रिक स्‍कोलरशिप और पोस्‍ट मैट्रिक स्‍कोलरशिप

 निशक्‍त मामले विभाग ने यह योजना अक्‍टूबर, 2014 में शुरू की है। योजना का उद्देश्‍य दसवीं से कम दर्जे अथवा दसवीं से ऊपर के दर्जे में पढ़ रहे निशक्‍त छात्रों के परिजनों को वित्‍तीय सहायता प्रदान करना है। वित्‍तीय सहायता के अन्‍तर्गत छात्रवृत्ति, पुस्‍तकों के लिए राशि, मार्गदर्शन/ रीडर भत्‍ता आदि देने का प्रावधान है। इस योजना के अन्‍तर्गत प्रति वर्ष प्री मैट्रिक स्‍तर पर 46000 छात्रवृत्तियां और पोस्‍ट मैट्रिक स्‍तर की 16650 छात्रवृत्तियां दिए जाने का प्रावधान है। इन दोनों छात्रवृत्तियों के लिए लाभार्थियों का चयन उत्‍कृष्ट प्रदर्शन के बाद राज्‍य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश की अनुशंसा के आधार पर किया जाता है। इन योजनाओं को ऑनलाइन, एक वेब-पोर्टल के माध्‍यम से लागू किया जाना है। इस वेब-पोर्टल को इलेक्‍ट्रोनिक और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और एनआईसी तैयार कर रहे हैं।

14. जागरुकता पैदा करना और प्रचार योजना

यह योजना सितम्‍बर, 2014 में प्रारंभ की गई और वर्तमान वित्‍तीय वर्ष 2014-15 में चालू है। इस योजना का उद्देश्‍य सरकार की विभिन्‍न योजनाओं/कार्यक्रमों का प्रचार इलेक्‍ट्रोनिक, प्रिंट, फिल्‍मों आदि के माध्‍यम से करना और निशक्‍त जनों के कानूनी अधिकारों और योजनाओं के प्रति समाज को शिक्षित करना है। इसके अलावा निशक्‍त जनों की विशेष जरूरतों के प्रति रोजगार प्रदाताओं को संवेदनशील बनाना और समाज में विकलांगता के कारणों के प्रति जागरुकता और संवेदनशीलता बढ़ाना है।

2.     (ए) इस योजना के लिए निम्‍नलिखित संगठन पात्र होंगे

(क)  स्‍वयं सहायता समूह

(ख)  मुहिम के पक्ष में बोलने वाले संगठन

(ग)   सामाजिक नजरिये में बदलाव लाने के लिए कार्य कर रहे परिजन और सामुदायिक संगठन

(घ)   मनोवैज्ञानिक और भावात्‍मक सहयोग सेवाएं

(ङ)    समुदाय आ‍धारित पुनर्वास संगठन

(च)   तनाव प्रबंधन और सामाजिक अलगाव उन्‍मूलन के लिए कार्य करने वाले संगठन

(छ)  श्रम बाजार कार्यक्रम, व्‍यवसायिक प्रशिक्षण, सामाजिक बीमा, निशक्‍त जनों के लिए सहायता सेवाएं देने वाले संगठन

(ब) योजना के अन्‍तर्गत सहायता प्राप्‍त कर रहे संगठन लाभ कमाने वाले संगठन नहीं होने चाहिए और पिछले तीन वर्ष से सोसाइटी अथवा सार्वजनिक ट्रस्‍ट के रूप में अच्‍छे रिकार्ड के साथ कार्य कर रहे होने चाहिए।

3.     वित्‍तीय सहायता की राशि और विषय पर इस संबंध में गठित निम्‍नलिखित समिति विचार करेगी:

(अ)   निशक्‍त मामले विभाग के संयुक्‍त सचिव (जागरुकता निर्माणऔर प्रचार)

(आ)            एकीकृत वित्‍तीय विभाग के प्रतिनिधि

(इ)     डीएवीपी के प्रतिनिधि

(ई)     निशक्‍त जन/ प्रतिनिधि समूह/ निशक्‍त जन के लिए कार्य कर रहे संगठन का एक विशेष आमंत्रित प्रतिनिधि

(उ)    निदेशक/डीएस (जागरुकता निर्माणऔर प्रचार)

 

4.     योजना के अन्‍तर्गत निशक्‍त जनों को ऑन लाइन सहायता देने के लिए स्‍वीकृत अवयवों के अलावा एक हेल्‍प लाइन का निर्माण भी किया जाना है। विषय विकास, प्रकाशन और नवीन मी‍डिया माध्‍यमों से, राष्‍ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन, गैर सरकारी संगठनों और स्‍वयं सहायता समूहों की अन्‍तर्राष्‍ट्रीय पहलों और विभिन्‍न योजनाओं के तहत सहायता, व्‍यवसायिक संस्‍थानों और कर्मचारियों को संवेदनशील बनाने के लिए स्‍वैच्छिक सेवाएं/कार्यक्रम, मनोरंजन और पर्यटन, सामुदायिक रेडियो में भागीदारी और मीडिया गतिविधियां।

5.     योजना के लिए बजट में 12वीं पंचवर्षीय योजना के अन्‍तर्गत 50 करोड़ का प्रावधान किया गया। योजना के लिए चालू वित्‍तीय वर्ष में तीन करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया। जागरुकता पैदा करने और प्रचार के लिए छात्रवृत्ति पर विचार के लिए समिति की दो बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में 43 प्रस्‍तावों पर विचार किया गया

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here