गुजरात के चुनाव के परिणाम ने यह साबित कर दिया कि गुजरात की जनता विकास चाहती है। जिस प्रकार काँग्रेस ने जातीय उन्माद फैला कर सत्ता पाने की कोशिश की उसे गुजरात की जनता ने ठुकरा दिया। साथ ही भाजपा के लिए भी यह सबक था कि जनता की उपेक्षा उसे उसे महँगा पड़ सकती है क्योंकि कुछेक सीटें ऐसी थी जहाँ नोटा परिणाम से ज्यादा दबा था। यानी गुजरात की जनता ने नोटा के माध्यम से यह संकेत दे दिया कि उसे भाजपा से नाराजगी जरूर है, लेकिन काँग्रेस उसे नही चाहिए। अतः भाजपा के स्थानीय कार्यकत्ताओं व नेताओं को जनता की नाराजगी दूर करने के लिए पूरी ताकत से लगना होगा। जहाँ-जहाँ कमियाँ है उनको दूर करना है। जैसे किसानों को उत्पादन का उचित मूल्य मिले, छात्रों को सस्ती दर पर शिक्षा मिले, शहरी क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों का भी विकास रोडमैप के साथ हो। स्वास्थ्य चिकित्सा महँगा न हो। सबसे बड़ी व अहम बात यह है कि कार्यकत्ताओं की उपेक्षा न हो। जनता व सरकार के बीच सीधा संवाद हो ताकि किसी भी समस्या का निराकरण समय रहते किया जा सके।
दिलीप सिंह – संपादक – finaljustice.in

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