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देश या प्रदेश के विकास के लिए 21वीं शताब्दी में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण शर्त है – माननीया राज्यपाल

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राँची,13.11.2017 –  राँची विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रतिकुलपति, कुलसचिव, सीनेट एवं  सिंडिकेट के सदस्यगण, उपस्थित शिक्षाविद्, विभिन्न पदाधिकारीगण, उपस्थित अभिभावकगण, प्रेस एवं मीडिया के बंधुओं और आज इस समारोह के सितारे मेरे प्यारे विद्यार्थियों! दीक्षांत समारोह के इस पावन अवसर पर मैं आप सभी को बधाई देती हूँ, खासकर उन विद्यार्थियों को जो आज इस समारोह में उपाधि प्राप्त कर रहे हैं। राँची विश्वविद्यालय झारखण्ड राज्य का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है। अपने स्थापना काल से ही इसने अनगिनत षिक्षाविद्, वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता, प्रषासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, प्रबंधक, कानूनविद्, साहित्यकार आदि देकर अपनी क्षमता का परिचय देते हुए इस प्रदेश को गौरवान्वित किया है। निष्चय ही आज राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए जिस बौद्धिक सामथर््य एवं कौशल की आवश्यकता है, उसमें राँची विश्वविद्यालय की बेहद अहम भूमिका है। किसी भी देश या प्रदेश के विकास के लिए 21वीं शताब्दी में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा  के समाज के सर्वांगीण विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस शिक्षा में उच्चतर शिक्षा समाज के देदीप्यमान नक्षत्रों की भाँति होती है, जो सर्वत्र प्रदर्शित होती है। ऐसे में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसीलिए आज विश्वविद्यालयों को मानववाद, सहिष्णुता, बौद्धिकता और सत्य के अहम केन्द्रों के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता है। शिक्षा का उद्देश्य मात्र उपाधियाँ प्राप्त करना ही नहीं है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि विद्या विनयशील बनाती है, विनयशीलता से पात्रता आती है, पात्रता से धन की प्राप्ति होती है और धन प्राप्ति से धर्म और सुख मिलता है। मनुष्य सामान्यतः सुख की अभिलाषा से जीवन जीता है। इसीलिए शिक्षा सुख प्राप्ति का महत्वपूर्ण साधन है। विश्वविद्यालयों को आज के वैष्वीकरण के युग में बदलते रोजगारों के स्वरूप के अनुसार अपने विद्यार्थियों को षिक्षा देने की सख्त आवश्यकता है। अपने विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतिस्पर्धा में सफल बनाने  हेतु विश्वविद्यालयों को जरूरत के मुताबिक विभिन्न विषयों एवं संकाय का परिस्थिति के अनुसार समावेश करना चाहिए। प्रसन्नता की बात है कि राँची विश्वविद्यालय अपने व्यवसायिक पाठ्यक्रम के द्वारा विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख बनाने की दिषा में प्रयास कर रहा है। हमें खुषी है कि राँची विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम को विष्वविद्यालय अनुदान आयोग के मापदण्डों के अनुकूल बनाते हुए अपने यहाँ च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सी.बी.सी.एस.) को लागू किया है। हर्ष का विषय है कि राँची विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) द्वारा अपनी जाँच में ठ़़ स्तर प्रदान किया गया। इसके लिए मैं राँची विश्वविद्यालय से जुड़े सभी व्यक्तियों को बधाई देती हूँ जिन्होंने अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन किया है। किन्तु हमें यहीं संतुष्ट होकर बैठने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि नित्य नयी-नयी चुनौतियाँ पैदा हो रही हैं और इन्हें पूरे आत्मविश्वास के साथ निपटाने की आवश्यकता है। मुझे आषा है कि राँची विश्वविद्यालय इस दिशा में सफल होगा। आज के वैष्विक परिवेष ने युवाओं को अनेक मनमोहक अवसर प्रदान किये हैं किन्तु चुनौतियाँ भी कम नहीं है। हमारे विद्यार्थियों को इन चुनौतियों का समाधान करते हुए जीवन में सफलता के षिखर पर चढ़ना है। विद्यार्थियों को सफल बनाने में शिक्षकों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आज जहाँ हम वैश्विक स्तर के उच्च शिक्षा केन्द्रों को स्थापित करना चाह रहे हैं। ऐसी स्थिति में हमें वैश्विक स्तर के शिक्षकों की भी आवश्यकता है। अतः मैं शिक्षकों से अपील करना चाहूँगी कि वे बदली परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को अद्यतन बनायें तथा राष्ट्र और समाज के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण हेतु सतत् प्रयत्नषील रहें। उनके जीवन की वास्तविक निधि एवं पूँजी विद्यार्थियों की सफलता ही है। ष्षोध के स्तर को भी और उच्च करने की जरूरत है। इसमें विद्यार्थियों के मन की बात आनी चाहिये जो समाज को एक नई दिषा प्रदान कर सके। इस हेतु हमारे षिक्षक विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करें।  इस समारोह में उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों से झारखण्ड को काफी उम्मीदें हैं। आज के बाद उनके जीवन की एक नयी यात्रा का प्रारम्भ होगा। जैसा कि स्वामी विवेकानन्द ने कहा है कि मैं समाज में शिक्षितों को तब तक द्रोही मानूंगा जबतक समाज में एक भी व्यक्ति अशिक्षित है। मैं कुलाधिपति के रूप में इतना ही कहना चाहूँगी कि मेरे प्यारे विद्यार्थियों! विवेकानन्द के इस वाक्य को आप जीवन का सार बनायें, ज्ञान को आचार परिवर्तन का सिद्धांत बनायें, सपने खूब देखें लेकिन उन्हें साकार करने के लिए उचित रास्तों को तलाश करें। उन्हें अपने जीवन की भावी सफर में विद्यार्थी जीवन से प्राप्त सामाजिक समरसता, धार्मिक सहिष्णुता एवं सांस्कृतिक बाहुलता के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए सभी के साथ मिलकर सफलता प्राप्त करनी है। प्रत्येक उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षांत समारोह के माध्यम से उपाधियों के रूप में ज्ञान की मशाल थमायी गयी है। इसके प्रकाश से सामाजिक-आर्थिक संवृद्धि एवं सांस्कृतिक सम्पोशण को और अधिक बल मिलेगा तथा राष्ट्र उत्थान में अपनी महती भूमिका सुनिश्चित करेंगे। विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि उपाधि केवल कागज के टुकड़े नहीं  बल्कि भविष्य की चुनौतियों से लड़ने के लिए उन्हें सौंपी गयी समाज की वसीयत हैं। विद्यार्थी सफलता के शिखर पर पहुँचे एवं झारखण्ड को शिक्षा के क्षेत्र में एक अनुकरणीय प्रदेश बनाने में अपना सहयोग दें। व्यक्तिगत उत्थान के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के उत्थान में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।  पुनः यहाँ उपस्थित आप सभी को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ  देती हूँ तथा सबकी प्रगति की कामना करती हूँ।

 जय हिन्द!    जय झारखण्ड!

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(FJB)

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