-संपादकीय-

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय  परिसर में जिस प्रकार भारत विरोधी नारे लगे | एक स्वर में भारत के सभी लोगों को इसका पुरजोर विरोध करना चाहिए | दिल्ली में सरकार की नाक के नीचे इतनी बड़ी घटना घट गयी और सरकार को पता भी नही चला | यह सरकार की कमजोर मानसिकता को दिखलाता है | जिस समय भारत विरोधी नारे लग रहे थे, उसी समय पुलिस को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए था |देश को जानने का पूरा हक है कि सरकार तीन दिन तक क्यों सोती रही? उसी समय  भारत विरोधी नारे लगाने वालों पर कार्यवाही क्यों नही की| यह बड़े ही शर्म की बात है कि देश के (कुछेक) युवा जो देश के भविष्य है, वे ही देश विरोधी भावना की मानसिकता पालने लगे है | अगर ऐसी देश विरोधी ताकतों के खिलाफ सख्ती नही दिखाई गयी तो आने वाला समय में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर, यही सुनने को मिलेगा |

   हमारे विचारों में भले ही एकरूपता नही हो सकती है, कोई वामपंथी हो सकता है, कोई दक्षिणपंथी हो सकता है और कोई अन्य विचारधारा को मानने वाला | लेकिन भारत विरोधी नारा लगाना ये कतई सहन नही किया जा सकता है | इसके लिए कोई बहानेबाजी नही चलनी चाहिए | कोई भी सरकार की नीतियों उसके कार्यप्रणालीयों के खिलाफ प्रदर्शन करें, उससे किसी को क्या परेशानी हो सकती है? विपक्ष अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर, भारत विरोधी नारा लगाने वालों का बचाव नही कर सकता है?

दिलीप सिंह – संपादक – फाइनल जस्टिस, हिंदी न्यूज़ पोर्टल

 

 

 

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