देवघर झारखण्ड का एक प्रमुख स्थान माना जाता है, यहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु तीर्थ करने के लिए आते है | इस क्षेत्र का उल्लेख कई प्राचीन पुराणों में भी मिल चूका है | इस भाग में हम आपको देव नगरी देवघर, बैद्यनाथ धाम के विषय में बताने जा रहे है |

baidyanath dhamबैद्यनाथ धाम  बैद्यनाथ मंदिर भारत में बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है इसकी की गिनती झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में होती है। इस मंदिर की स्थापना के पीछे एक बहुत प्रसिद्ध कहानी है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने रावण की प्रार्थना से प्रभावित हो उसे एक शिवलिंग दिया था, जो रावण को अपने राज्य तक अपनी यात्रा बाधित किये बगैर ले जाना था।देवता दिव्य शिवलिंग को शत्रु राज्य को दिये जाने से प्रसन्न नहीं थे और इसलिए भगवान विष्णु ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर लिया तथा रावण से सफलतापूर्वक शिवलिंग छुड़ा दिया और इस प्रकार यह देवघर में ही स्थापित हो गया। मंदिर की स्थापना वर्ष 1596 में की गई। खोया हुआ शिवलिंग बैजू नाम के एक आदमी को मिला था और उसके बाद इसका नाम बैद्यनाथ मंदिर रखा गया। पुराणों में भी बैद्यनाथ को महत्व दिया गया है। यह एक शक्तिपीठ भी है। नौलखा मंदिर भी नजदीक ही स्थित है। हर साल प्रसिद्ध श्रावणी मेला झारखंड में आयोजित किया जाता है तथा हजारों श्रद्धालु इस 30 दिवसीय महोत्सव के दौरान मंदिर की यात्रा करते हैं। भगवान शिव के भक्त शिवलिंग पर पवित्र जल अर्पण करते हैं।  मंदिर सुबह को 4 बजे खुलती  है तथा रात में 9 बजे बंद होती है।

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