किस्सा मुख्यमंत्री बनने का..?

अईसन खबर लाए है कि आपका दिल बाग-बाग हो जाएगा

गर्मियों का दिन था हम अपने ओसारे में बैठे थे. तभी हमारा साथी खेलावन आया । आते ही बोला भैया जी एक समाचार लाए है. रामखेलावन जानता था हमारे बारे में कि राजनीति मे मैने अपनी जवानी कुर्बान कर दी थी. मैं जान गया कि मेरे लायक ही कोई खबर लाया होगा। वह बोला- भैयाजी हम अईसन खबर लाए है कि आपका दिल बाग-बाग हो जाएगा। मैं बोला- अरे बोल तो ऐसा क्या खबर लाया है कि जो तू इतना उछल रहा है। वह बोला- भैयाजी खबर ऐसा है कि बस पूछो ही मत। मैं बोला- पहेलिए खाली बुझावेगा का, कुछो बताएगा। वह बोला- भैया जी मैं एक आदमी को लाया हूँ आपसे मिलवाने। मै बोला- यह तो हर बार करते हो, यह बोलो किसका ट्रांसफर या कही पोस्टींग करवाना है। वह बोला नही-नही भैया जी इस बार कुछ अलग बात है। इतना कहकर वह बाहर जाकर एक आदमी अपने साथ लेकर आया और मुझसे कहा कि- ये है देश के अरबपति कारोबारी इनकी कंपनी का कारोबार पूरे देश में फैला है। इतना सुनना था कि मैं बोला तो क्या आपको अपना करोबार यहाँ भी फैलाना है? तो इस पर हमारी सोच के विपरीत श्रीमान अरबपति कारोबारी महाशय ने कहा कि नहीं हमको अपना कारोबार नहीं फैलाना है। हम यहाँ केवल व्यापार के लिए नही आए है. बल्कि राजनीतिक कारोबार के लिये आए हैं।मैंने चौक कर  कहा- राजनीतिक कारोऽऽऽऽऽबार,तो श्रीमान् अरबपति कारोबारी महाशय ने मेरी बात बीच में काटकर कहा -हाँ आपने ठीक सुना। यहाँ से अपनी राजनीति की कैरियर शुरू करना चाहता हूँ। सुना है आपकी राजनीति की गलियारों में अच्छी पकड़ है, आप अगर मेरी थोड़ी मदद कर देंगे तो मैं यहाँ से राजनीति की शुरूआत कर सकता हूँ। माल की चिंता आप न करें, जितना चाहेंगे उतना मिलेगा। मैंने उनकी बातों को बीच में काटते हुए पूछा-आप अपनी राजनीति की शुरूआत कहाँ से करना चाहते हैं।इस बार भी उनका जवाब चौंका देने वाला था,श्रीमान अरबपति महाशय ने कहा- मैं यहाँ का मुख्यमंत्री बनना चाहता हूँ। मैंने बोरियत से भरी जम्हाई लेते हुए कहा-यह कैसे हो सकता है ?तो उनका जबाब था- जब राज्य सभा सदस्य बाहरी हो सकता है तो मुख्यमंत्री क्यों नहीं !मैं बोला- यहाँ भीतरी व्यक्ति ही मुख्यमंत्री बन सकता है, बाकी लोग नही। यहाँ बाहरी-भीतरी का झगड़ा है, तो उसने मुझे बताया कि आपने बिल्ली और बंदर का किस्सा नहीं सुना है क्या? बंदर ने किस बला की चालाकी से दोनो बिल्लियों की लड़ाई का फायदा उठाया,उन दोनों  की रोटी का टुकड़ा हड़प लिया। हम भी वही हूँ, यहाँ बाहरी-भीतरी झगड़ा का फायदा उठाकर मुख्यमंत्री पद हड़पना चाहता हूँ। आप अगर चाहोगे तो यहाँ के विधायकों को मेरे पक्ष में खरीद सकते है। रूपयों की चिंता न करें। जितना चाहेंगे, उतना मिलेगा। पचास करोड़-सौ करोड़-दो सौ करोड़ जितना बोलिए उतना मैं  दूँगा। आपको सिर्फ विधायकों को मैनेेज करना हैं। उसकी बातें सुनकर मेरे शरीर में मानो बिजली का करंट दौड़ने लगा ,मैं भूल गया अपना जमीर,अपना उसूल,अपना ईमान, मैं यह भी भूल गया कि इस राज्य के लिये मेरे साथियों ने शहादत दी थी। मैं यह भी भूल गया कि राज्य के लिए अपनी जवानी कुर्बान कर दी थी।

मैं यह सब भूलकर अपने मोबाइल फोन से सभी विधायकों को दनादन फोन लगाने लगा मैं सबकुछ भूल गया था सिर्फ मेरे कानों मे गूँज रहा था पचास करोड़- सौ करोड़- दो सौ करोड..?

    – दिलीप सिंह

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