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नीलाम्बर-पीताम्बर विष्वविद्यालय में आयोजित चांसलर ट्राॅफी कुष्ती प्रतियोगिता के समापन पर माननीया राज्यपाल जी का अभिभाषण

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पलामू, 31.08.2017 – पलामू प्रक्षेत्र में स्थापित नीलाम्बर-पीताम्बर विष्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस समारोह में आप सभी के मध्य सम्मिलित होकर अपार एवं हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। राँची विष्वविद्यालय से वर्ष 2009 में विभाजित होकर सृजित यह विष्वविद्यालय महान स्वतंत्रता सेनानी एवं वीर सपूत नीलाम्बर एवं पीताम्बर के नाम पर स्थापित है। सर्वप्रथम मैं उन दो महान एवं वीर स्वतंत्रता सेनानी नीलाम्बर एवं पीताम्बर को नमन करती हूँ एवं उनके प्रति अपनी श्रद्धा-सुमन अर्पित करती हूँ। 

प्राकृतिक एवं खनिज संपदा से परिपूर्ण झारखण्ड राज्य में विकास की असीम संभावनायें हैं। इस प्रदेश की जीवंत कला-संस्कृति ने इसे अनुपम सौंदर्य और समृद्धता प्रदान की है।……हमें अपनी बौद्धिक क्षमता व कुशलता से इसे और अधिक सुंदर व समृद्ध बनाना है क्योंकि बिना बौद्धिक संपदा के हम प्राकृतिक और खनिज संपदा का कुशलतापूर्वक समुचित उपयोग नहीं कर सकते। हमारे विष्वविद्यालय की भूमिका इस अर्थ में अहम है।
इस अवसर पर मैं कहना चाहूँगी कि इस क्षेत्र के सभी षिक्षण संस्थानों चाहे वो विद्यालय हो या महाविद्यालय अथवा विष्वविद्यालय सभी को अपने को उत्कृष्ट षिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित करने की दिषा में समर्पण भाव से तत्पर रहना होगा। हम सबको इस क्षेत्र में शिक्षा एवं ज्ञान का ऐसा वातावरण सृजित करना है कि यहाँ से पढ़ने हेतु लोगों को पलायन करने पर विवश न होना पड़ें, बल्कि अन्य स्थानों से भी विद्यार्थी यहाँ ज्ञानार्जन के लिए आयें।
आठ वर्ष पूर्व स्थापित नीलाम्बर-पीताम्बर विष्वविद्यालय को अपने को उत्कृष्ट विष्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने की दिशा में सामूहिक तौर पर गहनतापूर्वक ध्यान देना होगा। सत्र के नियमितीकरण, परीक्षा का समय पर संचालन तथा परीक्षाफल का समय पर प्रकाश विद्यार्थियों को अंक-पत्र सहित अन्य प्रमण-पत्र ससमय सुलभ कराने हेतु कुलाधिपति के रूप में मेरे द्वारा विषेष ध्यान देने हेतु निदेश दिया गया है तथा खुशी की बात है कि विष्वविद्यालय द्वारा इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। सभी विष्वविद्यालय का Academic Calendar समरूप हों तथा उसके अनुरूप कार्य हों, ऐसा प्रयास हैै। विद्यार्थियों को गुणवतायुक्त शिक्षा सुलभ हो, इस दिशा में विष्वविद्यालय परिवार से सम्बद्ध सभी सदस्यों को ध्यान देने आवष्यकता है।
…Globalization के इस युग में हमारे विद्यार्थियों में competition की भावना अधिक-से-अधिक विकसित करने की दिषा में सार्थक प्रयास हों तथा गुरू-शिष्य संबंध मधुर हो। हमारे विद्यार्थी शिक्षक के आचरण से प्रभावित हों। वे उन्हें अपना रोल माॅडल मानें, ऐसा प्रयास हो। षिक्षण संस्थानों में स्वच्छ एवं निर्भिक वातावरण हो। सर्वस्व ज्ञान की बात हो। विष्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में Basic Infrastructure की उपलब्धता पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इस विष्वविद्यालय का अपना परिसर हो, चांसलर के रूप में मैंने इसे अत्यन्त गंभीरता से लिया। राज्य सरकार को इस दिषा में ध्यान देने हेतु कहा गया। आशा करती हूँ कि शीघ्र ही विष्वविद्यालय का अपना परिसर होगा।

साथ ही मैं अपेक्षा करती हूँ कि इस विष्वविद्यालय में बेहतर पुस्तकालय हो, प्रयोगशाला में सभी आवष्यक उपकरण सुलभ हों तथा शोध के स्तर में वृद्धि हों, cut-paste की प्रणाली न हो। हमारे शोधार्थी के मन तथा मस्तिश्क की बातें उनकी शोध में झलकनी चाहिये, ताकि ये शोध हमें प्रगति की राह में ले जाने हेतु मददगार साबित हो। Globalization के इस युग में षिक्षण संस्थानों में Information Technology के आयाम सर्वसुलभ हो। शिक्षण संस्थानों में स्वच्छ पेयजल सुलभ हों तथा लड़कियों-लड़कों के लिए separate शौचालय हो। Hostel की दिशा में भी ध्यान देना होगा। छात्र/छात्राओं के लिए कई प्रकार के छात्रवृति योजना संचालित है। विष्वविद्यालय विद्यार्थियों को इसका लाभ सुलभ कराने हेतु सदैव प्रयासरत रहें।
खेल प्रतिभा को विकसित करने की दिषा में चांसलर ट्राॅफी का आयोजन किया जा रहा है। खुशी की बात है कि नीलाम्बर-पीताम्बर विष्वविद्यालय ने कुष्ती प्रतियोगिता की मेजबानी की। सभी जानते हैं कि झारखण्ड के लोगों में असीम खेल प्रतिभा निहित है। इसलिए उनकी प्रतिभा को विकसित करने के लिए इस प्रकार की प्रतियोगिता का आयोजन महत्वपूर्ण है। इससे हमारे युवाओं के मनोबल को बढ़ावा मिलता है। लेकिन हमारे बच्चे यह भी ध्यान रखें कि पढ़ाई, अनुशासन, चरित्र, नैतिकता और मूल्य महत्वपूर्ण है। खेल एवं कला में वे रूचि रखें, लेकिन सही इंसान बनने के लिए इन चीजों को न भूलें।
मैं चाहती हूँ कि नीलाम्बर-पीताम्बर विष्वविद्यालय का गौरवशाली इतिहास हों तथा यहाँ के विद्यार्थी गुरूजन की सहायता से समाज की उम्मीदों पर खरा उतरें तथा स्वयं का नाम रौशन करने के साथ अपने राज्य और राश्ट्र को अपने कौशल से गौरवान्वित करें।
जय हिन्द! जय झारखण्ड!

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(FJB)

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