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मोदी सरकार ने “घुटना प्रत्यारोपण” और “हृदय रोगियों के स्टेंट के दामों में अभूतपूर्व कमी की

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सर्वे संतु निरामया: को चरितार्थ करती मोदी सरकार

मोदी सरकार ने ऐतिहासिक पहल करते हुए “घुटना प्रत्यारोपण” और “हृदय रोगियों के स्टेंट के दामों में अभूतपूर्व कमी की है और जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से सामान्य दवाओं की उपलब्धता को गरीबों के लिए सुलभ किया है ।सस्ती और गुणवत्तापूर्ण तरीके से शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली इत्यादि जैसी मूलभूत सेवाएं  उपलब्ध करना किसी भी लोक-हितकारी सरकार का दायित्‍व होता है । परन्तु दुर्भाग्यवश स्वतंत्रता के 67 साल के बाद भी भारत का आम नागरिक इन मूलभूत सुविधाओं से वंचित था उदाहरण के तौर पर कुछ जानलेवा बीमारियों की दवाएं आम आदमी की पहुँच से बाहर थी । परन्तु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 2014 में देश की कमान संभालने के बाद अनेको ऐसे कदम उठाये गए है जिससे कुछ महत्वपूर्ण दवाइयों और असाध्य रोगों के इलाज के खर्चे में कई गुना कि कमी आयी है और गरीबों को भारी राहत मिली है ।

हड्डियों के जोड़ो ख़ास कर घुटनों की बीमारी बढ़ती उम्र के साथ हमारे देश में काफी आम है । वैसे तो योग और व्यायाम से इस परेशानी को काफी हद तक दूर रखा जा सकता है, परन्तु एक सीमा के बाद बिना कृतिम घुटना लगवाने के और कोई रास्ता नहीं बचता है । परन्तु अभी तक घुटने के प्रत्यारोपण का खर्च एक से ढाई लाख तक का था जो अधिकतम वरिष्ठ और गरीब नागरिकों की पहुँच से बाहर था । केंद्र की मोदी सरकार ने हमारे वरिष्ठ नागरिकों के मर्म को समझा और National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) के अध्यादेश के द्वारा घुटने प्रत्यारोपण के दाम लगभग एक तिहाई कर दिए है । अब सर्वाधिक इस्तेमाल में आने वाले कोबाल्ट क्रोमियम इम्प्लांट की कीमत डेढ़ लाख से घटा कर लगभग एक तिहाई (54,000) कर दी गई है । इसी तर्ज पर घुटने के दूसरे इम्प्लान्ट्स की कीमतों में भी 75% तक की कमी की गई है । अब सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में वरिष्ठ नागरिक सस्ते दामों में घुटनों का प्रत्यारोपण करा सकेंगे ।

घुटने प्रत्यारोपण के दाम सस्ते करवाना संवेदनशील मोदी सरकार द्वारा इलाज के दाम कम करवाने के लिए कोई पहला प्रयास नहीं है । केंद्र में सरकार आने के कुछ माह बाद ही जनवरी 2015 में ही मोदी सरकार जन औषधि केन्द्र बनाने की योजना लाई थी । इन केन्द्रों में लगभग 500 जरूरी दवाइयां 50% से लेकर 95% तक कम दामों में उपलब्ध है । ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में एक हज़ार से भी अधिक जन औषधि केंद्र खोले जा चुके और केंद्र सरकार निरंतर प्रयासरत है कि देश के प्रत्येक ब्लॉक में यह सुविधा उपलब्ध हो ।

ऐसा कहा जाता था कि दिल का रोग सिर्फ बड़े लोगो की बीमारी है क्यूंकि गरीब आदमी इसका इलाज कराने में सक्षम नहीं था । पूर्व में एक दिल के छल्ले (Coronary Stent) की कीमत आम आदमी की पहुँच से बाहर थी क्यूंकि BVS Stent सवा लाख में और BMS Stent तीस हज़ार में मिलता था । नरेन्द्र मोदी सरकार ने गरीबों के इस मर्म को समझा और इनकी कीमतों को लगभग एक चौथाई क्रमशः 31,080 और 7,623 रुपये कर दी जिससे कि करोडो दिल के मरीजों को भारी राहत मिली ।

पूर्व में सरकारों की सफलता या असफलता का पैमाना सकल घरेलू उत्पाद, आर्थिक विकास दर और शेयर सूचकांक होते थे, जिसके कारण आम आदमी की जरूरते कही न कही उपेक्षित हो जाती थी । अन्यथा ऐसा क्या कारण था कि 2014 के पूर्व खुले में शौच के लिए जाती युवती, रसोईं में धुएं से जूझती गरीब महिला, महंगे इलाज से त्रस्त गरीबों और अँधेरे में जीवन व्यापन के लिए बाध्य ग्रामीणों का दर्द किसी ने नहीं समझा । परन्तु नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने अपनी सोच का दायरा अमीरों और शहरों से आगे बढ़ाया  और उज्वला, उजाला और स्वच्छ भारत जैसी दर्जनों योजनाये ला कर समाज के उपेक्षित वर्ग को विकास की मुख्य धारा से जोड़ा । जरूरी दवाओं, दिल के छल्ले और घुटने प्रत्यारोपण के दाम कम करना इन्ही प्रयासों का हिस्सा है ।

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(FJB)

 

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