अनुसूचित जातियों के लिए 2014-15 में उद्यम पूंजी निधि कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसकी विशिष्टता यह है कि इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति के उद्यमियों को 50 लाख रुपये से लेकर 15 करोड़ रुपये तक के उच्चतर ऋण प्रदान किए जाते हैं। इस कार्यक्रम के अंतर्गत अभी तक 65 अनुसूचित जाति उद्यमियों को 236.66 करोड़ रुपये की ऋण राशि मंजूर की जा चुकी है, जो सौर ऊर्जा, जल शोधन संयंत्रों, खाद्य प्रसंस्करण और पेय पदार्थों, होटल आदि से सम्बद्ध हैं। यह जानकारी केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत ने “प्रमुख सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों” के बारे में कल आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी। 9 परियोजनाओं में लाभार्थियों ने ऋणों की अदायगी प्रारंभ कर दी है और अन्य अजा उद्यमियों को भी इस स्कीम का कई गुना लाभ हुआ है।

जहां तक कौशल विकास का सवाल है, सभी राज्य सरकारों द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त और विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) द्वारा प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है और 2014-15 से 2016-17 की अवधि में करीब 1.5 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसके अंतर्गत 48.42 प्रतिशत लोगों को दिहाडी/स्व-रोजगार प्राप्त हुआ।

उद्यमशीलता के तहत अनुसूचित जाति उप योजना के अंतर्गत पिछले तीन वर्षों में आर्थिक गतिविधियों हेतु लिए गए ऋण पर दी गई सब्सिडी से 17 लाख से भी ज्‍यादा लोग लाभान्वित हुए हैं। पिछले तीन वर्षो के दौरान उद्यमशीलता के लिए निगमों द्वारा 12 लाख से भी ज्‍यादा लाभार्थियों को ऋण दिए गए हैं।

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(PIB)

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