चतुर्थ झारखण्ड विधान सभा के अष्टम् (बजट) सत्र, 2017 में माननीया राज्यपाल जी का अभिभाषण

माननीय अध्यक्ष एवं सदस्यगण,
मैं, चौथी विधानसभा के अष्टम् (बजट) सत्र में आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन करती हूँ। नव वर्ष के प्रथम सत्र में राज्य की इस सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था में आपको संबोधित करते हुए मुझे अपार हर्ष हो रहा है। सबका साथ-सबका विकास, हर हाथ का काम तथा अधिकतम विकास दर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारी सरकार पूरी लगन एवं निष्ठा के साथ निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार की स्पष्ट, दूरगामी एवं विकासोन्मुख नीतियों के सकारात्मक परिणाम अब दृष्टिगोचर होने लगे हैं। हमारी सरकार गठन के उपरांत अल्प समय में ही झारखण्ड ने राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करायी है।
* हमारी सरकार समाज के सभी वर्गों की प्रगति, समृद्धि और बेहतरी के लिए कार्य कर रही है तथा सभी क्षेत्रों में संतुलित एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है। हमारी सरकार ने सिर्फ वादे ही नहीं किये बल्कि उन वादों को अमलीजामा भी पहनाया। सरकार के प्रति जनता का विश्वास बढ़ा है। सरकार द्वारा अर्जित उपलब्धियां उसके अच्छे कार्यों का साक्ष्य है। हमारी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।
* हमारी सरकार के गठन के समय राज्य के समक्ष कई चुनौतियां थीं। राज्य विकास की दौड़ में पिछड़ रहा था। जनता में निराशा का माहौल था, सरकार और जनता के बीच काफी दूरी थी। राज्य की छवि भी प्रभावित हो रही थी। हमारा राज्य बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी तथा पलायन जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा था।
*हमारी सरकार के गठन के उपरांत हमने चुनौतियों को स्वीकार किया। राज्य को निराशा और ठहराव से उबारने के लिए हमारी सरकार ने कई क्रांतिकारी कदम उठाये। सरकार के स्वच्छ, संवेदनशील और पारदर्शी स्वरूप को जनता के समक्ष रखा गया। जन भागीदारी को सत्ता एवं शासन के केन्द्र में रखा गया ताकि राज्य का विकास जनआकांक्षाओं के अनुरूप हो। मुखयमंत्री जन-संवाद एवं सीधी बात कार्यक्रम का सफलतापूवर्क संचालन किया जा रहा है जिससे जनता का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। सरकार को जनता का सकारात्मक सहयोग प्राप्त हुआ, जिससे हमारी सरकार इतने कम समय में ही प्रत्येक क्षेत्र में विकास की एक मजबूत लकीर खींचने में सफल हुई है।
* सरकार के गठन के उपरांत नीतियों की समीक्षा की गयी, संसाधनों का आकलन किया गया, झारखण्ड की समस्याओं एवं विकास के मार्ग में उपस्थित चुनौतियों का गम्भीरतापूर्वक विशलेषण किया गया। यह महसूस किया कि हमारा राज्य प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है, राज्य की जनता मेहनतकश एवं ईमानदार है, फिर भी हमारा राज्य विकास की दौड़ में पिछड़ रहा है। राज्य अमीर है परन्तु राज्य की जनता गरीब है।
एक विकसित, समृद्ध एवं खुशहाल झारखण्ड के सपने को साकार करने के दृढ़ संकल्प के साथ हमारी सरकार ने बिना एक पल भी गंवाये संजीदगी एवं गंभीरता से कार्य करना प्रारम्भ किया। सरकार ने पूर्ववत्र्ती नीतियों में आवश्यकतानुसार बदलाव किये, नई एवं विकासपरक नीतियाँ बनाई, सरकार की कार्यशैली में अपेक्षित सुधार किया तथा राज्य के तंत्र को दुरूस्त किया। सरकार ने प्राथमिकतायें तय की और सर्वप्रथम स्वच्छ एवं संवेदनशील प्रशासन, जनभागीदारी, स्वच्छता, भ्रष्टाचार उन्मूलन, सुगम यातायात, बिजली, खेत-खलिहान, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं महिला सशक्तिकरण पर अपना ध्यान केन्द्रित किया।
* झारखण्ड में विकास की अपार संभावनाए मौजूद हैं। झारखण्ड में उपलब्ध संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग एवं मानव संपदा की क्षमताओं के सदुपयोग के बलबूते झारखण्ड देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में अपना स्थान बना सकता है। हमारी सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक नीतियों में आवश्यक बदलाव किये हैं। इसी क्रम में औद्योगिक क्षेत्र में सिंगल विन्डो सिस्टम को लागू किया गया तथा निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करने हेतु श्रम कानूनों का सरलीकरण किया गया है। सरकार के सद्प्रयासों का ही प्रतिफल है कि श्रम सुधारों के मामले में झारखण्ड लगातार दूसरी बार देश में पहले स्थान पर रहा तथा Ease of Doing Busines में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। राज्य में निवेश को आकर्षित करने हेतु मोमेंटम झारखण्ड के तहत देश-विदेश में रोड-शो का आयोजन कर झारखण्ड की ब्रांडिंग की गयी। अपनी नयी नीतियों एवं फैसलों के आधार पर झारखण्ड औद्योगिक विकास के नये युग में प्रवेश कर चुका है। आज देश-विदेश के कई बड़ी औद्योगिक कंपनियाँ झारखण्ड में निवेश करने हेतु अपनी रूचि एवं तत्परता दिखा रहे हैं। राज्य सरकार को हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं तथा इससे संबंधित एम0ओ0यू0 भी किया गया है। इसी क्रम में 16-17 फरवरी, 2017 को राजधानी, राँची में Global Investor Summit का आयोजन प्रथम बार किया जा रहा है। यह झारखण्ड के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
*मजबूत एवं स्थायी विकास के लिए राज्य की आधारभूत संरचना का सुदृढ़ होना जरूरी है। आधारभूत संरचना उन्नत होगी तभी राज्य में निवेश का माहौल तैयार होगा तथा राज्य के विकास को गति मिलेगी। इस तथ्य को ध्यान में रखकर हमारी सरकार ने बिजली, सड़क, सिंचाई, यातायात व्यवस्था आदि के स्तर में सुधार हेतु गंभीर प्रयास किये हैं।
*खुशहाल किसान ही खुशहाल झारखण्ड का निर्माण कर सकते हैं। राज्य में 65ः से अधिक लोग खेती पर निर्भर हैं। कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि का विकास एवं किसानों की समृद्धि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों की बेहतरी तथा राज्य को खाद्यान्नांे के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार द्वारा लिये गये फैसलों से राज्य के किसानों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है तथा वे अपने वत्र्तमान एवं भविष्य के प्रति आशान्वित नजर आ रहे हैं।
* ”खेत का पानी खेत में गाँव का पानी गाँव में“ इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए हमारी सरकार ने डोभा निर्माण को प्राथमिकता दी तथा वर्शाजल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके इसके लिए अब तक लगभग दो लाख डोभा का निर्माण किया जा चुका है तथा चाल लाख डोभा का निर्माण होना है। इससे वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा तथा आने वाले समय में सूखे के बावजूद जल संकट से किसानों को निजात मिलेगा एवं भूगर्भ जल स्तर में भी सुधार होगा। साथ ही एक से अधिक फसल उपज सकेंगे।
*राज्य की कृषि उत्पादकता का समुचित रूप से दोहन हो सके इसके लिए सिंचाई व्यवस्था का सुदृढ़ होना आवश्यक है। हमारी सरकार ने राज्य की सिंचाई व्यवस्था में सुधार हेतु कई प्रयास किये हैं। वृहद् एवं मध्यम सिंचाई योजनाओं की खोयी हुई सिंचाई क्षमता को पुनर्स्थापित  करने के उद्देष्य से कुल 22 योजनाओं के जीर्णो़द्धार की स्वीकृति 865.90 करोड़ रूपये की लागत से दी गयी है, जिससे 51,270 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। निर्माणाधीन वृहद् तथा मध्यम सिंचाई योजनाओं में राशि का व्यय सुनियोजित तरीके से कराने के फलस्वरूप गत वर्ष 72 कि0मी0 तथा इस वर्ष 28 कि0मी0 यानि कुल 100 कि0मी0 नहर की लम्बाई में जल प्रवाह कराकर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
*राज्य में कुल 794 चेक डैम निर्माण की योजना 523.67 करोड़ रूपये की लागत से स्वीकृत की गई है। 89 योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, शेष का कार्य प्रगति पर है। इन योजनाओं के पूर्ण होने से 29,812 हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
13ण् वर्षा जल के संचयन के उद्देश्य से 167 अदद् तालाबों के गहरीकरण की योजना 66.74 करोड़ रूपये की लागत से स्वीकृत की गयी है। इसमें से 66 योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, शेष योजनाओं का कार्य प्रगति पर है। इन योजनाओं से 9,202 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता पुर्नस्थापित हो सकेगी।
*29 अदद् वीयर योजनाओं की लागत राषि रू॰ 45.42 करोड़ की प्रषासनिक स्वीकृति प्रदान कर इन योजनाओं का कार्यान्वयन किया जा रहा है। इन योजनाओं को पूर्ण कर 5,254 हे॰ क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का सृजन हो सकेगा। मध्यम सिंचाई योजना के अन्र्तगत 3 नयी योजनाएँ यथा तिलैया, डोमनी नाला तथा दाहरबाटी योजनाओं की स्वीकृति रूपये 143.97 करोड़ की लागत पर दी गयी है। इसके अतिरिक्त काँची वीयर योजना तथा मयूराक्षी बायाँ तट नहर योजनाओं के कमाण्ड क्षेत्र के विकास हेतु कुल 133 करोड़ रूपये की लागत से स्वीकृत की गयी है, जिसका 50 प्रतिषत अंश भारत सरकार द्वारा वहन किया जायगा। देवघर जिला में बुढ़ई जलाषय योजना के निर्माण हेतु केन्द्रीय जल आयोग से स्वीकृति प्राप्त की गई है। इन योजनाओं के पूर्ण होने से झारखण्ड के खेत-खलिहानों में हरियाली और किसानों में खुशहाली आयेगी।
* सोन नदी से पानी को लिफ्ट कर पाईप लाईन के माध्यम से पलामू तथा गढ़वा जिलों के जलाषयों को भरने की योजना पर सरकार तेजी से काम कर रही है।
* हमारी सरकार द्वारा राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के अधीन पात्र गृहस्थ योजना लागू होने के पश्चात् 49.25 लाख लाभुकों को प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम चावल अथवा गेहूँ 1.00 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य में अन्त्योदय परिवारों को भी 1.00 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से प्रति परिवार 35 किलोग्राम अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में अबतक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत राज्य के 6.60 लाख बी॰पी॰एल॰ परिवारों को मुफ्त स्च्ळ कनेक्शन उपलब्ध करा जा चुका है। हमारी सरकार द्वारा राज्य में कृषि को लाभपरक बनाने के उद्देश्य से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर राज्य सरकार की ओर से रू. 130/प्रति क्विंटल बोनस का भुगतान किया जा रहा है।
* राज्य की जन वितरण प्रणाली की दुकानों को आर्थिक सबलता प्रदान करने के उद्देश्य से संबंधित दुकानदारों का वत्र्तमान कमीशन 80 रूपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 100 रूपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
*हमारी सरकार द्वारा राज्य के नागरिकों को खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों से संबंधित अधिकारांे की जानकारी देने हेतु नागरिक अधिकार पत्र की घोषणा की गई है ताकि राज्य की जनता अपने अधिकारों के प्रति ज्यादा जागरूक हो सकें एवं उनका लाभ उठा सकें।
*मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में अल्प समय में ही झारखण्ड ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 में कुल 1,40,000 मिट्रिक टन मांग के विरूद्ध माह दिसम्बर तक 1,03,640 मिट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ है। जलाषयों तथा नदियों के उन भागों में जहाँ पर 5-6 फीट गहराई में पानी उपलब्ध है, वहाँ के स्थानीय निवासियों की सहभागिता सुनिष्चित करते हुए नये प्रयोग के तौर पर आर0एफ0एफ0 (रिवेराईन फिष फाॅर्मिंग) की योजना शुरू की गई है। मछुआ परिवारों को रहने का स्वस्थ परिवेष प्रदान कराने के उद््देष्य से 1845 मछुआ परिवारों के लिए वेद व्यास आवास योजना के अंतर्गत पक्का आवास मुहैया कराया जा रहा है।
* सहकारिता विकास का एक सशक्त माध्यम है जो परस्पर सहयोग पर आधारित एक जनांदोलन है, जिसके मूल में सामाजिक एवं आर्थिक विकास की भावना अंतर्निहित है। हमारी सरकार सहकारी समितियों के माध्यम से राज्य के गरीब नागरिकों को स्वावलम्बी, आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सम्पन्न बनाकर राज्य की ग्रामीण एवं कृषि अर्थव्यवस्था को विकसित करने की दिशा में सतत् प्रयास कर रही है।
* माननीय विधायकों द्वारा अनुशंसित एवं झारखण्ड के प्रखर क्रांतिदूतों की जन्मस्थली वाले चिह्नित 100 ग्रामों में आदर्श ग्राम योजना का कार्यान्वयन किया जा रहा है। सरकार द्वारा चयनित सभी 100 आदर्श ग्रामों में एक एम्बुलेंस एवं एक LCd~ Projector उपलब्ध कराया गया है।
*हमारी सरकार राज्य को 24×7 बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है। ग्रामीण विद्युतीकरण, शहरों की विद्युत व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, संचरण ग्रिड, सब-स्टेशनों एवं हाई वोल्टेज लाईनों का निर्माण तथा वितरण प्रणाली में सुधार सरकार की प्राथमिकतायें है। राज्य के कुल 29,494 गाँवों के विरूद्ध 26967 गाँवों को मार्च, 2015 तक विद्युतीकृत किया जा चुका है। शेष 2525 गाँवों को दो चरणों में विद्युतीकृत करने के लक्ष्य के विरूद्ध 1493 गाँवों को विद्युतीकृत किया जा चुका है। शेष अविद्युतीकृत गाँवों को विद्युतीकृत किये जाने हेतु तेजी से कार्रवाई की जा रही है।
* हमारी सरकार झारखण्ड को अगले तीन वर्षों में पावर-हब के रूप में विकसित करने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है। इसके लिए राज्य सरकार और NTPC, टाटा तथा अडाणी ग्रुप के साथ एम0ओ0यू0 किया गया है। गोड्डा में 1600 मेगावाट का पावर प्लांट लगाये जाने पर सहमति हुई है। इस पावर प्लांट को अगले 03 वर्षों में पूरा किया जाना है। चतरा में NTPc~के नाॅर्थ कर्णपुरा पावर प्रोजेक्ट का कार्य भी प्रगति पर है। अगले 03 वर्षों में इस प्लांट से 1980 मेगावाट बिजली उत्पादित होगी।  NTPC एवं  PTPS के ज्वाईट वेंचर में पतरातू में 4,000 मेगावाट के प्रोजेक्ट पर कार्य जारी है। हमारी सरकार द्वारा हाईडल एवं सोलर प्लांट स्थापित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। छोटे-छोटे हाईडल प्रोजेक्ट एवं सोलर प्रोजेक्ट के माध्यम से सुदूर पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रों में बिजली पहुँचाना आसान होगा।
* राज्य को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिए राज्य में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। अच्छी एवं गुणवत्तापूर्ण सड़कों का निर्माण हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 4,000 करोड़ रुपये का बजटीय उद्व्यय स्वीकृत किया गया था। इस वर्ष 1450 कि0मी0 पथ एवं 40 पुल निर्माण के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 880 कि0मी0 पथ एवं 30 पुल निर्माण कार्य को पूरा किया जा चुका है।
* बाह्य सम्पोषित योजना अन्तर्गत एशियन विकास बैंक ;।क्ठद्ध के ऋण से गोविन्दपुर-जामताड़ा-दुमका-बरहेट-साहेबगंज पथ का उन्नयन पुनरूद्धार, चैड़ीकरण एवं मजबूतीकरण बाईपास सहित दो लेन मानक पथ का निर्माण लगभग समाप्ति पर है तथा इसी वित्तीय वर्ष में कार्य पूर्ण कर लिया जायेगा। हजारीबाग, धनबाद, डाल्टेनगंज, दुमका एवं देवघर शहर एवं इसे जोड़ने वाले पथों का निर्माण पूर्ण कराया गया है। राज्य के पर्यटन स्थलों के सुगम सम्पर्क हेतु पथ निर्माण का कार्य स्वीकृत कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा 903 कि0मी0 राष्ट्रीय उच्च पथों के विकास हेतु 9400 करोड़ की योजनाओं को केन्द्र सरकार को समर्पित किया गया है।
*राज्य में परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ता प्रदान करते हुए कोडरमा-हजारीबाग रेल खण्ड एवं हजारीबाग -बड़काकाना रेल खण्ड पर रेल परिचालन प्रारंभ कर दिया गया है। झारखण्ड राज्य में सड़क सुरक्षा तथा राज्यमार्गो पर सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए झारखण्ड राज्य सड़क सुरक्षा नीति, 2016 बनाई गई है। झारखण्ड राज्य के ग्रामीण इलाकों को जिला मुख्यालय एवं प्रखण्ड मुख्यालय से जोड़ने हेतु ग्रामीण बस सेवा प्रारंभ करने की योजना पर सरकार तेजी से कार्य कर रही है।
* राँची शहर के यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने हेतु लगभग 3056.00 करोड़ रू॰ की लागत से पाँच प्रमुख पथों का विकास एवं लगभग 522.00 करोड़ रू॰ की लागत पर दो प्रमुख चैराहों यथा- रातु रोड चैक एवं कांटाटोली चैक पर फ्लाई ओवर निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
* हमारी सरकार ने राज्य के नागरिकों को आवागमन की बेहतर सुविधा देने के लिए वातानुकूलित (AC) डीलक्स बस सेवा का शुभारम्भ किया है, जिसके तहत् राँची से टाटा, हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, पलामू के लिए AC डीलक्स बस सेवा प्रारंभ हो चुकी है। राज्य के अन्य स्थानों को भी इस सेवा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
* राज्य में सामूहिक द्रुत परिवहन प्रणाली के रूप में लाईट मेट्रो परिचालन हेतु दो काॅरिडोर पर परिचालन के तहत् प्रथम चरण में CRPF मुख्यालय से कचहरी चौक तक कुल 16.5 किलोमीटर लम्बे रूट पर लाईट मेट्रो परिचालन के प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिसमें कुल 17 स्टेशन एवं 01 डिपो हैं।
*यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि महिलायें हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। परिवार और समाज खुशहाल होगा तभी राज्य का विकास होगा। हमारी सरकार ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक उन्नयन एवं उनके सशक्तिकरण हेतु महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को डेयरी विकास के कार्यक्रमों से जोड़कर दूध उत्पादन व्यवसाय में शामिल करने हेतु सघन रूप से अभियान चला रही है। इससे ग्रामीण महिलायें आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ राज्य की उत्पादकता में भी अपना योगदान दे रही हैं।
*झारखण्ड राज्य में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जमीनी स्तर पर गरीब महिलाओं को सशक्त संस्थाएँ जैसे स्वयं सहायता समूह, स्वैच्छिक संगठन आदि (SHGs, VOs, CLF) बनाकर उन्हें लाभप्रद स्वरोजगार एवं हुनरमंद व्यवसाय का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही गरीब परिवारों की महिलाओं का क्षमतावर्धन किया जा रहा है ताकि वे अपने स्वंयबल से गरीबी के कुचक्र से बाहर निकल सकंे।
* हमारी सरकार ने राज्य में विधवाओं के कल्याण एवं उन्हें सम्मान प्रदान करने के उद्देश्य से विधवा सम्मान पेंशन योजना प्रारंभ किया है, जिसके तहत् 18 वर्ष से अधिक उम्र की विधवाओं को प्रतिमाह 600/- रुपये पेंशन प्रदान किया जा रहा है। राज्य के 17 जिलों में किषोरियों एवं 25 वर्ष तक की महिलाओं को कौषल प्रषिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने संबंधी विश्व बैंक संपोषित तेजस्विनी योजना चलाई जा रही है। राज्य में मेधावी किशोरियों को प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से नारी उत्थान कोष का गठन किया गया है। साथ ही दुमका, बोकारो, हजारीबाग, देवघर, सरायकेला एवं पलामू में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास का निर्माण किया गया है।
* सरकारी सेवाओं में महिलाओं को समुचित अवसर उपलब्ध कराने हेतु पुलिस कर्मियों की नियुक्ति में महिलाओं को 33ः आरक्षण का प्रावधान किया गया है। हमारी सरकार महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य पर पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है। हिंसा से पीड़ित महिलाओं की सहायता हेतु राज्य के तीन जिलों राँची, पूर्वी सिंहभूम, धनबाद में वन स्टाॅप संेटर की स्थापना की गई है। हमारी सरकार द्वारा समाज में व्याप्त डायन हत्या एवं प्रताड़ना से संबंधित मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु कुल 05 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है।
हमारी सरकार द्वारा ऐसी गरीब विधवा महिलायें, जो परिवार की मुखिया हैं, उन्हें आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दिनांक 14 अप्रैल, 2016 को भारत रत्न बाबा साहेब डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयन्ती पर श्रद्धांजली अर्पित करते हुए बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर आवास योजना की शुरूआत की गयी है। इस योजना के अंतर्गत वत्र्तमान वित्तीय वर्ष में 11,000 (ग्यारह हजार) इकाई आवास बनाने का लक्ष्य है।
* इंदिरा आवास योजना के तहत वत्र्तमान वित्तीय वर्ष 2016-17 में 1,02,552 (एक लाख दो हजार पांच सौ बावन) इकाई आवास का निर्माण किया गया है।
* बेरोजगारी एवं पलायन भी राज्य की प्रमुख समस्या रही है। राज्य में बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए एक तरफ जहाँ सरकारी क्षेत्र में लम्बे समय से रिक्त पड़े पदों पर युद्ध स्तर पर नियुक्ति की कार्रवाई की जा रही है। वही सरकारी क्षेत्र में नौकरियों की सीमाओं को देखते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने हेतु भी हमारी सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।
* हमारी सरकार का स्पष्ट मानना है कि जबतक सभी सरकारी विभागों एवं कार्यालयों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध नहीं होगा, तबतक राज्य के विकास की गति को अपेक्षित गति नहीं दी जा सकती है। सभी स्तरों पर उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्ति, तेजी से करने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस विभागान्तर्गत 6,422 पुलिस कर्मियों, जैप के 850 तथा आदिम जनजाति विशेष इण्डिया रिजर्व बटालियन के 1042 यानी कुल 8,314 पदों पर पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। विभिन्न विभागान्तर्गत कनीय अभियन्ताओं के रिक्त पदों के विरूद्ध 600 कनीय अभियन्ताओं की नियुक्ति कर ली गयी है। इसके अतिरिक्त राज्य के विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की गयी है। साथ ही अन्य विभागों में भी रिक्ति के अनुरूप नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है जिसे शीघ्र ही पूर्ण कर लिया जायेगा। नवनियुक्त कर्मियों से उम्मीद है कि ये सभी झारखण्ड के नव-निर्माण में अपनी महती भूमिका निभायेंगे। नियुक्ति प्रक्रिया अगले वित्तीय वर्ष 2017-18 में भी जारी रहेगा ताकि विकास हेतु कार्यान्वित की जा रही सभी योजनाओं एवं कार्यक्रमों का लाभ समयबद्ध रूप से आम जनता तक पहुंँचाया जा सके।
*हमारी सरकार ने झारखण्ड के स्थानीय निवासी की परिभाषा एवं पहचान सम्बन्धी चिरप्रतिक्षित नीति का निर्धारण कर दिया है। साथ ही स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र निर्गत करने सम्बन्धी निदेश सभी प्राधिकारों को दिया गया है। राज्य की जनता को कोई परेशानी न हो इसके लिए स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र आॅनलाईन निर्गत करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा चुकी है। साथ ही सरकार द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में आने वाले जिलों के स्थानीय निवासी ही, संबंधित जिलों के विभिन्न विभागों में अगले 10 वर्ष तक जिला संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों में उद्भूत रिक्तियों पर भत्र्ती हेतु पात्र होंगे। इससे राज्य की जनता को उनका वास्तविक हक मिल सकेगा और राज्य के विकास में अपना योगदान दे सकंेगे।
*हमारी सरकार ने आदिम जनजातियों को राज्य स्तरीय/जिला स्तरीय सभी पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में न्यूनतम 2ः (दो प्रतिशत) पद उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, जो अनुसूचित जनजाति के लिए चिन्हित पद में से विनियमित होगा। आदिम जनजाति के सदस्यों को राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय विनिर्दिष्ट शिक्षण संस्थानों में नामांकन में भी यह सुविधा उपलब्ध होगी।
* हमारी सरकार गाँवों में ही रोजगार उपलब्ध कराकर मजदूरों का पलायन रोकने के लिए कटिबद्ध है। पलायन रोकने के लिए मनरेगा के अन्तर्गत प्रत्येक पंचायत में अधिक से अधिक योजनाओं का कार्यान्वयन कर रोजगार के अवसर पैदा किये जा रहे हैं।
*हमारी सरकार द्वारा गांवों के पिछड़ेपन को दूर कर, उनका सर्वांगीण विकास करने तथा ग्रामीणों को जीवन स्तर को ऊँचा उठाकर एवं उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से केन्द्र प्रायोजित एवं राज्य संपोषित योजनाओं का कार्यान्वयन किया जा रहा है। मनरेगा के तहत कार्य कर रहे श्रमिकों को उनकी मजदूरी का भुगतान क्ठज् के माध्यम से 24 घंटे में उनके बैंक खाता में किया जा रहा है।
*Make in Jharkhand को सफल बनाने के लिए Skill Jharkhand को सफल बनाना जरूरी है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए अगले 5 वर्षों में 20 लाख युवक-युवतियों को प्रशिक्षण देकर तथा उनका कौशल विकास कर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए सक्षम झारखण्ड कौशल विकास योजना की शुरूआत कर दी गयी है। प्रस्तावित वित्तीय वर्ष में कुल 4.00 लाख युवक-युवतियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जायेगा।
*राज्य सरकार द्वारा राँची शहर कोे ”वाई-फाई सिटी“ बनाने का निर्णय लिया गया है। हमारी सरकार पेपरलेस आॅफिस की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। प्रारम्भिक चरण में चार विभागों एवं जिला मुख्यालय, राँची में ई-आफिस पद्धति को लागू किया जा रहा है। झारखण्ड राज्य में Software Industry को उत्कृष्ट अवसंरचना प्रदान करने के उद्देश्य से जमशेदपुर एवं सिन्दरी में (Software Technology Parks of India STPI) का निर्माण कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है।
*हमारी सरकार बाल श्रमिक प्रथा के उन्मूलन हेतु कृत संकल्पित है। इस क्रम मेंअनवरत अभियान चलाया जा रहा है साथ ही मुक्त कराये गये बाल श्रमिको के पुनर्वास की कार्रवाई भी की जा रही है। देश के विभिन्न महानगरों में श्रमिकों के पलायन को हतोत्साहित करने तथा प्रवासी महिला श्रमिको को वापस लाने का कार्य भी सरकार द्वारा किया जा रहा है। इन्हें स्थानीय स्तर पर परामर्शित करने, प्रशिक्षण दिलाने तथा रोजगारोन्मुखी योजनाआंे से जुड़ने हेतु सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से प्रत्येक जिला में ‘हेल्प डेस्क’ का गठन किया गया है। सरकार ने अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिको के लिए विशेष योजना भी तैयार की है, जिसके तहत् निबंधित प्रवासी श्रमिक के दुर्घटना से मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को अथवा स्थायी अपंगता की स्थिति में प्रवासी श्रमिक को रु0 1,50,000/- की राशि का भुगतान तथा अनिबंधित प्रवासी श्रमिकों की दुर्घटना से मृत्यु की स्थिति में उनके आश्रितोको रु0 1,00,000/- का भुगतान किये जाने का प्रावधान किया गया है।
* प्रारम्भिक विद्यालयों में षिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिये 16349 शिक्षकों की नियुक्ति की गयी है। उच्च विद्यालयों में भी 1719 शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। अन्य 17790 पदों पर षिक्षकों की नियुक्ति हेतु कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। राज्य में माध्यमिक शिक्षा के स्तर के उन्नयन हेतु 280 सरकारी माध्यमिक विद्यालयों को $2 विद्यालय में उत्क्रमित किया जा रहा है।
विद्यालयों में छात्रों के विकास का अनुश्रवण सकारात्मक रूप से करने हेतु हमारी सरकार द्वारा नये प्रयोग के रूप में ई-विद्यावाहिनी कार्यक्रम लागू किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक विद्यालय के बच्चों की स्मंतदपदह के बारे में त्मंस ज्पउम ज्तंबापदह की जा सकेगी। इससे विद्यालयों में क्तवच व्नज त्ंजम को कम करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही सरकार की योजनाओं का लाभ समुचित रूप से राज्य के होनहार बच्चों को मिल सके इसके लिए स्कूली छात्र-छात्राओं को क्ठज् के माध्यम से साईकिल क्रय हेतु राशि उपलब्ध करायी जा रही है।
* हमारी सरकार द्वारा नेतरहाट आवासीय विद्यालय, नेतरहाट/ इंदिरा गांधी आवासीय विद्यालय, हजारीबाग की तर्ज पर दक्षिणी छोटानागपुर प्रमण्डल, कोल्हान प्रमण्डल एवं संथाल परगना प्रमण्डल में नये आवासीय विद्यालय स्थापित करने पर कार्य कर रही है ताकि इन क्षेत्रों के होनहार छात्र/छात्राओं को भी उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त हो सके।
* हमारी सरकार द्वारा वितीय वर्ष 2017-18 में झारखण्ड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय, राँची विश्वविद्यालय तथा नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय के कैम्पस निर्माण का कार्य शीघ्र ही किया जायेगा। साथ ही कोयलाचंल क्षेत्र के चिर-प्रतिक्षित मांग को देखते हुए बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल महाविद्यालय एवं राँची महाविद्यालय को उत्क्रमित कर विश्वविद्यालय बनाने तथा तीन नये निजी विश्वविद्यालय की स्थापना का कार्य भी करेगी। महाविद्यालयों में शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने तथा उसे रोजगार से जोड़ने के लिए व्यवसायिक पाठ्यक्रमों यथा डठ।ए ठण्म्कए डण्म्क आदि की पढ़ाई प्रारम्भ करने की योजना है। गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में Wi-fi की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ पुस्तकालय एवं प्रयोगशाला को उत्क्रमित करने का कार्य भी किया जा रहा है।
* स्वस्थ झारखण्ड-सुखी झारखण्ड के लक्ष्य को केन्द्र में रख कर हमारी सरकार इस क्षेत्र में गुणात्मक सुधार हेतु प्रयासरत् है। इसी क्रम में दुमका, हजारीबाग एवं पलामू में केन्द्र प्रायोजित योजनान्तर्गत राज्य में तीन नये मेडिकल काॅलेज की स्थापना की स्वीकृति दी गयी है। राज्य योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2016-17 में कुल 40 स्वास्थ्य उप केन्द्र, 33 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 05 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 02 मातृ शिशु स्वास्थ्य केन्द्र, 03 सिविल सर्जन कार्यालय, 02 आवासीय क्वार्टर, 01 अनुमण्डलीय अस्पताल के भवन निर्माण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
* मुख्यमंत्री निःशुल्क Cervical एवं Breast कैंसर स्क्रिनींग योजना की शुरूआत सभी 24 जिलों में की गई है। राँची तंत्रिका मनोचिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (रिनपास) के द्वारा नशाविमुक्ति केन्द्र का निर्माण किया जा रहा है। उक्त संस्थान के माध्यम से One stop centre SAKHI केन्द्र का संचालन किया जा रहा है जिसमें समाज में प्रताड़ित महिलाओं को सभी प्रकार की मदद (कानूनी, चिकित्सकीय एवं मनोवैज्ञानिक) दी जा रही है।
* आदिम जातियों के कल्याण हेतु आदिम जनजाति विशेष स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत पहाड़िया जनजाति के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराया जा रहा है। इनके ईलाज के लिए सरकार द्वारा 18 स्वास्थ्य केन्द्र बनाये गये हैं तथा झारखण्ड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र जहाॅं चिकित्सा का घोर अभाव है, वहाॅं भी सरकार द्वारा 50 शैय्या अस्पताल का निर्माण कराया गया है, जिसमें 9 ग्रामीण अस्पतालों का विभिन्न संस्थानों के माध्यम से संचालन कराया जा रहा है।
*वन अधिकार अधिनियम के तहत गत् वर्ष में 21,000 वन पट्टों का वितरण किया गया। अब तक सरकार द्वारा कुल 64,000 से ज्यादा वन पट्टों का वितरण किया जा चुका है। Aadhar Enabled DBt~ Platform के माध्यम से छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति एवं साईकिल हेतु राशि उपलब्ध कराई जा रही है। कल्याण गुरूकुल के माध्यम से अनुसूचित जनजाति/अनुसूचित जाति के बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षित कर नियोजित कराया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में 09 कल्याण गुरूकूल को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। झारखण्ड ट्राईबल डेवलपमेन्ट सोसाईटी (JTDS) के द्वारा JTELp~ के तहत् अनुसूचित जनजाति के 33,000 महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सुकर पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, कृषि बागवानी आदि स्वरोजगार उपलब्ध कराते हुए उनका आर्थिक सशक्तिकरण किया जा रहा है।
* राज्य की जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है। राज्य के कई वैसे क्षेत्र हैं जहाँ शुद्ध पेयजल गम्भीर समस्या बनी हुई है। हमारी सरकार राज्यवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कई छोटी-बड़ी योजनाओं पर कार्य कर ही है। राज्य में 27 वृहत् ग्रामीण पाईप जलापूर्ति योजना एवं 1377 लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को पूर्ण कर लिया गया है। जिससे 11.45 लाख जनसंख्या को शुद्ध पेयजल प्राप्त हो रहा है। गुणवत्ता प्रभावित गढ़वा, पलामू, साहेबगंज, पाकुड़ इत्यादि में 50327 आबादी 5 सतही जलापूर्ति तथा एक सतही योजना से 16625 आबादी को क्रमशः फ्लोराइड एवं आर्सेनिक मुक्त जलापूर्ति स्थाई समाधान कर उपलब्ध कराया जा रहा है।
* स्वच्छ झारखण्ड के निर्माण की संकल्पना को लेकर हमारी सरकार कार्य कर रही है तथा वित्तीय वर्ष 2018-19 तक पूरे राज्य को खुले में शौच से मुक्त ODF करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। SBM G के अंतर्गत 4.41 लाख व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है तथा 19 प्रखण्ड एवं 264 पंचायतों को अब तक खुले में शौच से मुक्त ODF घोषित किया जा चुका है।
* अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण झारखण्ड में पर्यटन के विकास की भरपूर संभावना है। राज्य के पर्यटन क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाये गये हैं। इसके अन्तर्गत गिरिडीह जिलान्तर्गत जलीय सूर्य मंदिर तथा झारखण्डी धाम, खँूटी जिलान्तर्गत अमरेश्वर धाम, साहेबगंज जिलान्तर्गत शिवगादी धाम, धनबाद जिलान्तर्गत भटिंडा फॅाल, गुमला जिलान्तर्गत आंजन धाम के पर्यटकीय विकास कार्य की स्वीकृति प्रदान की गई है। राज्य में वर्ष 2011 में जहाँ देशी पर्यटकों की संख्या – 1,45,80,387 एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या – 87,521 थी वहीं वर्ष 2015 में देशी पर्यटकों की संख्या 3,30,79,530 एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या 1,67,855 रही।
* सरकार ने राज्य के गरीबों एवं वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हुए मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की शुरूआत की है। इस योजनान्तर्गत उत्तरी छोटानागपुर, दक्षिणी छोटानागपुर एवं कोल्हान प्रमंडल के गरीबी रेखा से नीचे के 3000 वरिष्ठ नागरिकों को पूरी तथा भुवनेश्वर की यात्रा पर भेजा गया है। शीघ्र ही संथाल परगना एवं पलामू प्रमंडल से 1000-1000 तीर्थ यात्रियों को भी पूरी तथा भुवनेश्वर की यात्रा पर भेजा जायेगा। धरती आबा ”बिरसा मुण्डा’’ से संबंधित स्थलों- उलिहातु एवं डोम्बारीबुरू तथा सुतियाबंे (राँची) के सम्पूर्ण पर्यटकीय विकास कार्य की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
* झारखण्ड की हरियाली, यहाँ की वन संपदा हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। झारखण्ड की सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखने तथा राज्य को स्वस्थ, हरा-भरा, स्वच्छ, आधुनिक समृद्ध राज्य बनाने हेतु सभी जन प्रतिनिधियों, राज्य के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों, सभी शिक्षण संस्थानों में शिक्षको, छात्र-छात्राओं, आम नागरिकों को हरियाली शपथ दिलायी गयी। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव से हमारा राज्य भी अछुता नहीं है तथा विगत दशक में झारखण्ड राज्य में औसत से कम वर्षा हुई है। वर्षा की मात्रा में बढ़ोतरी के उद्देश्य से पूरे राज्य में वन महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया तथा 2.57 करोड़ पौधों का रोपण किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री जन-वन योजना के अन्तर्गत 4500 एकड़ निजी भूमि पर काष्ठ प्रजाति एवं फलदार पौधों का रोपण किया गया।
* हमारी सरकार द्वारा राज्य की राजधानी राँची का व्यवस्थित रूप से विकास करने के लिए बहुप्रतिक्षित कोर कैपिटल एरिया का चिन्हितिकरण कर लिया गया तथा कोर कैपिटल साईट, राँची के लिए प्रस्तावित पुनर्वास एवं पुर्नस्थापन कार्य हेतु निविदा का निस्तारण किया जा चुका है। साथ ही रु0 465.00 करोड़ की लागत से झारखण्ड विधान सभा के नये भवन का निर्माण कार्य जनवरी, 2016 से आरंभ है एवं फरवरी, 2019 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। झारखंड उच्च न्यायालय के नये भवन का निर्माण कार्य जून, 2015 से आरंभ है एवं कार्य योजना के अनुसार दिसम्बर, 2017 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।
अटल नवीकरण एवं शहरी परिवत्र्तन मिशन (अमृत) योजना के अंतर्गत शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले राज्य के 7 शहरों यथा- राँची, धनबाद, देवघर, चास, आदित्यपुर, हजारीबाग एवं गिरिडीह का चयन किया गया है। शहरी क्षेत्रों में पथ विक्रेताओं को चिन्हित करते हुए निकाय स्तर से उनका परिचय पत्र एवं निबंधन किये जाने के उद्देश्य से झारखण्ड पथ विक्रेता (आजीविका, संरक्षण एवं विनियम) नियमावली, 2016 अधिसूचित किया गया है।
* झारखण्ड राज्य आवास बोर्ड द्वारा सम्पदाओं के विस्तारीकरण के लिए पूर्व से चल रहे अन्य सभी कार्यक्रमों के अतिरिक्त आवासीय काॅलोनी की गुणवत्ता में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए स्मार्ट काॅलोनी का निर्माण कराये जाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा प्रारंभ में पांच जिलों यथा- राँची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और देवघर का चयन किया गया है।
*सरकार नीतियाँ और योजनाएँ बनाती है परन्तु उन योजनाओं का लाभ लक्षित व्यक्तियों तक पहुंच सके, इसके लिए प्रशासन का चुस्त-दुरूस्त होना आवश्यक शत्र्त है। प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए ई-गवर्नेंस की शुरूआत की गयी। ई-गवर्नेंस योजना के तहत राज्य की जनता को कई प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध करायी जा रही हंै। राईट टू सर्विस डिलीवरी एक्ट के तहत् 50 से अधिक सेवाएँ नागरिकों को आॅनलाईन मिलने लगी हंै। इससे एक तरफ जहाँ राज्य की जनता को सहुलियत हुई है वहीं एजेंटो और बिचैलियों की भूमिका भी समाप्त हुई है। हमारी सरकार राज्य में आई0टी0 सेवा को जन-जन से जोड़ने की मुहिम चला रही है क्यांेकि सूचना- प्रौद्योगिकी और ई-गवर्नेंस के बिना आज कोई समाज आगे नहीं बढ़ सकता। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने, पारदर्शी और जबाबदेह सरकार बनाने तथा लोकतंत्र को मजबूत बनाने में आई0टी0 की भूमिका को देखते हुए सरकार इसके प्रयोग पर अधिकाधिक जोर दे रही है।
*भवन निर्माण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से भवन निर्माण निगम लिमिटेड का निर्माण किया गया है जो स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही है। इसके अन्तर्गत म.तमहपेजतंजपवद के माध्यम से लगभग 3000 संवेदकों का निबंधन किया जा चुका है।
* हमारी सरकार राज्य में भूमि अभिलेखों को सर्वसुलभ एवं सुरक्षित बनाने तथा जनता को प्रदान की जाने वाली सेवाओं को आसान बनाने के लिए सूचना तकनीक के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दे रही है। इसी उद्देश्य से राज्य के 264 अंचलों में से 249 अंचलों में आॅनलाईन म्यूटेशन का कार्य प्रारम्भ कर दिया है। सभी निबंधन कार्यालयों का डिजिटाईजेशन एवं 201 अंचल कार्यालयों का निबंधन कार्यालयों के साथ इंटीग्रेशन किया गया है। भूमि/मकान के क्रेता के दस्तावेजों को डिजिटल लाॅकर में रखने की भी व्यवस्था की गई है। बिहार सरकार से कुल 75,254 शीट नक्शा की प्राप्ति कर ली गई है। सरकार की योजना है कि सेटेलाईट का उपयोग कर राज्य की भूमि का सर्वे किया जाय। सभी निबंधन कार्यालयों एवं तहसील कार्यालयों में माॅडर्न रेकर्ड रूम की स्थापना भी की जायेगी।
* भ्रष्टाचार किसी भी राष्ट्र अथवा राज्य के विकास में सबसे बड़ा अवरोध होता है। हमने भ्रष्टाचार की चुनौतियों से निबटने के लिए कार्ययोजना तैयार कर कई स्तरों पर प्रयास आरम्भ किया। एक तरफ मुख्यमंत्री जन-संवाद एंव सीधी बात कार्यक्रम के तहत् जनता के सुझावों एवं समस्याओं से अवगत हुए और प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करने के लिए तत्समय ही आवश्यक निदेश दिये गये, वहीं दूसरी तरफ राज्य निगरानी ब्यूरो को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ACB के रूप में पुनर्गठित करते हुए इसकी शक्तियों में विस्तार एवं दायित्वों का पुनर्निर्धारण किया गया। राज्य से भ्रष्टाचार को मिटाने के मार्ग में यह सरकार का महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है और 2 (दो) वर्षों के भीतर 130 से भी अधिक भ्रष्ट अधिकारियों / कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई है। साथ ही अपराधों के कतिपय वर्ग के त्वरित विचारण तथा अन्तर्ग्रस्त सम्पत्ति के अधिहरण (जब्ती) के लिए झारखण्ड विशेष न्यायालय विधेयक, 2016 पारित किया गया है। इससे भ्रष्टाचार संबंधी मामलों का शीघ्र निष्पादन किया जाना संभव हो सकेगा। राज्य के विकास में महती भूमिका निभाने वाले ईमानदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ हमारी सरकार खड़ी है, वहीं भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई करने से भी हमारी सरकार पीछे नहीं हटेगी। हमारी सरकार का स्पष्ट मानना है कि सत्ता सेवा का माध्यम है और हम सभी जनता के सेवक हैं। हमारा हरेक कदम राज्य एवं राज्य की जनता के हित में उठना चाहिए न कि स्वहित में।
*हमारी सरकार द्वारा राज्य सरकार के सभी पदाधिकारियों/ कर्मचारियों को केन्द्रीय कर्मचारियों के अनुरूप 7वें वेतन आयोग की अनुशंसा लागू कर दी गयी है तथा इसे दिनांक 01.01.2016 के प्रभाव से ही लागू किया गया है। इससे राज्य सरकार के हजारो कर्मचारी एवं पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे।
* सुरक्षित एवं भयमुक्त झारखण्ड के निर्माण के लिए हमारी सरकार कृत संकल्पित है। सरकार द्वारा उग्रवाद की रोकथाम के लिए किये गए गंभीर प्रयासों के फलस्वरूप ही विगत 02 वर्षों में वामपंथी उग्रवाद से संबंधित घटनाओं में काफी कमी आई है।
*आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों पर नियंत्रण एवं आतंकी घटनाओं से बचाव हेतु ATS का गठन किया गया है, जिसमें NSG से प्रशिक्षित पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मी पदास्थापित हैं। ATS आंतकवादी संगठनों के सदस्यों की गिरफ्तारी एवं स्लीपर सेल के उद्भेदन में प्रभावकारी भूमिका निभा रहा है।
*राज्य में कानून व्यवस्था की स्थ्तिि में सुधार लाने हेतु कई अभिनव प्रयास किये गये हैं। पुलिस आधुनिकीकरण के साथ-साथ राज्य के प्रमुख शहर राँची, जमशेदपुर, बोकारो एवं धनबाद के शहरी थानों को स्मार्ट थाना के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। साइबर अपराध से निबटने हेतु साईबर थाना का गठन किया गया है। झारखण्ड आॅनलाईन एफ0आई0आर0 सिस्टम लागू होने से अब कोई भी नागरिक घर बैठे या प्रज्ञा केन्द्र में सीधे अपनी शिकायत जिले अथवा थानों तक भेज सकता है। महिलाओं एवं बच्चियों की सुरक्षा के लिए ”शक्ति एप“ की शुरूआत की गयी है। हाईवे पेट्रोलिंग एवं BEAt~ Patrolling से राज्य में सुरक्षा का वातावरण तैयार हुआ है जिससे उद्योग धन्धों का विकास भी सुनिश्चित हो सकेगा।
*विगत वर्ष में सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण एवं लोक हित के निर्णय लिये गये जिनमें छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908CNt~ Act) एवं संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम, 1949 SPt~ Act)में संशोधन का निर्णय अभूतपूर्व, ऐतिहासिक एवं दूरगामी निर्णय है। हमारी सरकार ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि चाहे राज्य के विकास की बात हो या आदिवासियों- मूलवासियों के हितों की रक्षा का सवाल – सरकार इस बारे में कोई समझौता करने के पक्ष में नहीं है। इससे न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश में एक सकारात्मक संदेश का सृजन हुआ।
* आदिवासियों को उनका उचित हक दिलाने तथा उनके आर्थिक सुदृढ़ीकरण हेतु छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 CNt~ Act) एवं संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम, 1949 SPt~ Act) में संशोधन किया गया है। इन अधिनियमों में संशोधन करते हुए आदिवासी जमीन के मुआवजे का भुगतान कर गैर आदिवासी को देने के प्रावधान को समाप्त किया जा रहा है, ताकि आदिवासियों की जमीन सुरक्षित रहे। आदिवासी परिवार की जमीन का कृषि कार्य के अतिरिक्त गैर कृषि कार्य में भी उपयोग करने का नियम बनाया जा रहा है और मालिकाना हक भी उसी आदिवासी परिवार के पास ही रहेगा। अपनी जमीन पर दुकान, होटल, मैरेज हाॅल आदि बनवा पायेंगे। साथ ही अगर पहले निर्माण किया गया है तो अब उसे नियमित करा पायेंगे।
*वत्र्तमान में धारा 49 के अन्तर्गत उचित मुआवजा देकर उद्योग एवं खनन कार्य के लिए आदिवासी भूमि लेने का प्रावधान है। उक्त प्रावधानों में संशोधन करते हुए अन्य आधारभूत संरचना यथा अस्पताल, आंगनबाडी केन्द्र, सड़क आदि हेतु भी संबंधित परिवार की सहमति से चार गुणा मुआवजा देकर भूमि प्राप्त करने का प्रावधान किया जा रहा है। वत्र्तमान प्रावधानों के अन्तर्गत दो साल या उससे भी अधिक समय में जमीन अधिग्रहण पर मुआवजा मिलता है। अब तीन माह में ही मुआवजा देने का प्रावधान किया जा रहा है। नये प्रावधान के अनुसार राज्य हित में जनोपयोगी कार्यों हेतु जमीन लेने के उपरांत यदि पाँच साल में परियोजना पूरी नहीं होती है तो जमीन रैयत को वापस कर दी जायेगी। इस स्थिति में रैयत को दिया गया मुआवजा भी सरकार को वापस नहीं करना होगा। सी0एन0टी0 और एस0पी0टी0 कानून के होने पर भी वत्र्तमान में आदिवासीयों की जमीन जनोपयोगी कार्यों के लिए सरकार लेती है। हलांकि मुआवजा देने की प्रक्रिया काफी जटिल है। सरकार ने संशोधन के माध्यम से प्रक्रिया का सरलीकरण कर दिया है।
*आपदा प्रबंधन एवं जलवायु परिवत्र्तन अनुकूलन के क्षेत्र में सरकार द्वारा सक्रिय दृष्टिकोण अपनाया गया है तथा रोकथाम, शमन एवं पूर्व तैयारी पर बल देते हुए समेकित आपदा प्रबंधन सह आधारभूत संरचना के विकास, संचार माध्यमों का समावेश, क्षमता संवर्द्धन एवं जागरूकता की ओर पहल किया गया है। राज्य एवं जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकार को सक्रिय करने की दिशा में कार्य किया गया है। साथ ही राज्य आपदा मोचन बल के गठन की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी हैं तथा 132 विशिष्ट प्रशिक्षित आपदा मोचन बल के गठन की कार्रवाई की जा रही है।
*वज्रपात से बचाव हेतु विशिष्ट तकनीक का विकास किया गया है। साथ ही नई भवन निर्माण नीति के अन्तर्गत राज्य के सभी ऴ2 से ऊँचे मकानों में तड़ित चालक/रोधक लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
*डिजिटल इण्डिया कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु हमारी सरकार कृतसंकल्पित है। Cashless Transactions को बढ़ावा देने के लिए 5000/- रूपये मूल्य तक के मोबाईल फोन एवं P.O.S.k~ Machines /k~ Credit Card Swipe Machines को दिनांक 31.03.2017 तक के लिए कर मुक्त कर दिया गया है।
* राज्य सरकार द्वारा सभी निबंधित व्यवसायियों एवं ग्राहकों से अनुरोध किया गया है कि वे यथासंभव सभी वित्तीय संव्यवहार Cashless Transactions ,एवं Digital Payments के माध्यम से करें एवं भारत सरकार के Lucky Grahak Yojana एवं Digi-/ku Vyapar Yojanaके अन्तर्गत Lucky äaw Scheme के अन्तर्गत घोषित पुरस्कार का लाभ उठाएं। Deen Dayal Upadhyaya Gram Jyoti Yojna DDUGJY) के अन्तर्गत निबंधित व्यवसायियों द्वारा बिजली के उपकरणों की खरीद पर कर-दर 14.5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया है।
*राज्य में खनिजों के उत्खनन् एवं इससे संबंधित कार्यों में पारदर्षिता लाने तथा अधिकाधिक राजस्व प्राप्ति के लिए ई-आॅक्सन के माध्यम से खनिज आधारित क्षे़़़़त्रों को चिन्हित करते हुए निविदा प्रकाशित कर खनन पट्टा आवंटित करने का कार्य झारखण्ड सरकार के द्वारा किया जा रहा है। नये खनन पट्टों की स्वीकृति के साथ-साथ पूर्व से आवंटित खनन पट्टों का नवीकरण करना भी राज्य सरकार की प्राथमिकता है ताकि चालू खनन पट्टों में कार्यरत मजदूरांे को रोजगार का अवसर निरंतर प्राप्त होता रहे।
* झारखण्ड, काॅरपोरेट सोशल दायित्व CSR) काॅन्सिल लागू करनेवाला देश का प्रथम राज्य है। CSr~ फंड का उपयोग कल्याण एवं विकास संबंधी विभिन्न कार्यों में किया जाना है। इसी क्रम में लगभग 7000 से ज्यादा सरकारी विद्यालयों में पठन-पाठन की सुविधाएॅं बढाने के लिए विनिर्माण संबंधी सहायता CSr~ के अन्तर्गत प्रदान की जा रही है। हजारीबाग से बीजुबाड़ा राजमार्ग का वित्त पोषण NTPc~ द्वारा किया जा रहा है। इस पर लगभग 441.00 करोड़ रुपये का व्यय संभावित है। स्वच्छ भारत एवं स्वच्छ झारखण्ड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न/
* कम्पनियों के सहयोग से गाॅंवों को खुले में शौच से मुक्त करने की दिश्एणा में कार्य किया जा रहा है। स्वच्छ विद्यालय अभियान के अन्तर्गत राज्य के 6000 से अधिक विद्यालयों में विभिन्न कंपनियों द्वारा शौचालय का निर्माण कराया गया है।
*हमें गर्व है कि आप सभी माननीय सदस्यों ने विगत सत्रों में अपने व्यवहार एवं आचरण से देश के विधायी इतिहास में अच्छे एवं अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। चाहे वह विपक्ष द्वारा कटौती प्रस्ताव को वापस लेने का अवसर हो या सत्ता पक्ष द्वारा सी0सैट अधिनियम को विपक्ष के आग्रह पर राज्य हित में वापस लेना, दोनों ही प्रशंसनीय रहे हैं। परन्तु विगत दो सत्रों में जिस तरह सदन की कार्यवाही को बाधित किया गया है, उसे उचित नहीं कहा जा सकता है। झारखण्ड विधान सभा का यह गरिमामयी सदन राज्य की सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था तथा जनता की समस्याओं के समाधान हेतु सबसे बड़ा मंच है। किसी भी समस्या का समाधान संवाद से ही संभव है। इस मंच पर जनता के हितों एवं जन सरोकारों से संबंधित विषयों पर प्रत्यक्ष रूप से विचार-विमर्श कर व्यापक परिप्रेक्ष्य में निर्णय लिये जाते हैं। मैं यह बताना चाहती हूँ कि चतुर्थ विधान सभा के षष्टम् एवं सप्तम् सत्र में जनहित से जुड़े अल्प-सूचित प्रश्न, तारांकित प्रश्न, निवेदन, ध्यानाकर्षण एवं शून्यकाल जिनका उत्तर सदन में दिया जाना था, अनुत्तरित रह गये। यहाँ तक कि मुख्यमंत्री प्रश्नकाल के दौरान जनहित से जुडे़ मुद्दों पर माननीय मुख्यमंत्री का उत्तर भी नहीं सुना गया। यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है तथा इस पर गंभीरतापूर्वक विचार किये जाने की आवश्यकता है।
*अंत में मैं कहना चाहूँगी कि विकास एक निरंतर प्रक्रिया है तथा सबों के सकारात्मक सहयोग से ही समावेशी विकास के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। मेरी इस गरिमामयी सदन के सभी माननीय सदस्यों से गुजारिश है कि आप सभी दलीय प्रतिबद्धता से उपर उठकर राज्य के सर्वांगीण विकास की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें। हमें राज्य की जनता की आकांक्षाओं एवं अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा, तत्परता एवं समर्पण के साथ कार्य करना होगा। आईये हम सब मिल कर एक समुन्नत, समृद्ध एवं विकसित झारखण्ड का निर्माण करें।
जय हिन्द!

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(Iprd-Jharkhand)

News Reporter

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