भारतीय नौसेना जहाज आईएनएस सह्याद्री आज फिलीपींस की राजधानी मनीला पहुंचा। आईएनएस सह्याद्री वर्तमान में भारत की ‘पूर्व की ओर देखो’ नीति के तहत दक्षिण चीनी महासागर तथा उत्‍तर-पश्चिम प्रशांत क्षेत्र में संचालनगत तैनाती पर है। इस जहाज के फिलीपींस की नौसेना के साथ व्‍यापक पारस्‍परिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए 04 नवम्‍बर तक मनीला में रहने की उम्‍मीद है। भारत और फिलीपींस के बीच द्वीपक्षीय संबंध उपनिवेशवाद-रोधी, मजबूत लोकतांत्रिक राजनीति एवं दक्षिण-दक्षिण सहयोग के साझा मूल्‍यों पर आधारित है, जो हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। आर्थिक एवं सुरक्षा संबंधों दोनों ही वजहों से इसमें तेजी आई है। नियमित विदेश नीति सलाह-मशिवरों एवं सुरक्षा वार्ता बैठकों ने इस द्वीपक्षीय संबंध को और अधिक प्रोत्‍साहन दिया है।

आईएनएस सह्याद्री की इस यात्रा का उद्देश्‍य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच द्वीपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाना और अंतरसंक्रियता में बेहतरी लाना है। आईएनएस सह्याद्री शिवालिक क्‍लास का स्‍वदेश में निर्मित युद्धपोत है। 21 जुलाई, 2012 को भारतीय नौसेना में शामिल और युद्ध में बहु-भूमिकाएं निभाने वाले इस जंगी जहाज के तरकश में हथियारों की एक प्रभावशाली श्रृंखला है। लम्‍बी दूरी के जहाजरोधी प्रक्षेपास्‍त्र, विभिन्‍न क्षमताओं के शक्तिशाली बंदूकों द्वारा संवर्द्धित मझोले एवं लघु दूरी भूतल से वायु में मार करने वाले प्रक्षेपास्‍त्र सभी प्रकार के भूतल एवं वायु खतरों के खिलाफ एक मजबूत आवरण मुहैया कराते हैं। दो आंतरिक बहु-भूमिकाएं निभाने वाले हैलिकॉप्‍टरों को ढोने की क्षमता इस युद्धपोत की ताकत को उल्‍लेखनीय रूप से बढ़ा देता है। वर्तमान में आईएनएस सह्याद्री के कमांडर कैप्‍टन कुनाल सिंह राजकुमार हैं।

बंदरगाह में इसके ठहराव की अवधि के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के उद्देश्‍य से विभिन्‍न गतिविधियों की योजनाएं बनाई गई हैं। इनमें अधिकारियों की स्‍थानीय नौसेना एवं समाज के गणमान्‍य व्‍यक्तियों से मुलाकात, आईएनएस सह्याद्री के बोर्ड पर उनका स्‍वागत, स्‍थानीय लोगों द्वारा जहाज का भ्रमण, भारतीय नौसेना के जवानों के लिए गाइडयुक्‍त पर्यटन की व्‍यवस्‍था तथा दोनों नौसेनाओं के जवानों के बीच व्‍यक्तिगत एवं व्‍यावसायिक अंत: संबंध शामिल हैं।

विदाई के अवसर पर, इस जहाज के फिलीपींस की नौसेना के जहाजों के साथ अभ्‍यास करने की योजना है, जिससे कि संचार तथा खोज एवं राहत प्रक्रियाओं में अंत: पारस्‍परिकता को बढ़ाया जा सके।

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