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प्रौद्योगिकी स्‍थानांतरण समझौते से निशक्‍तजनों के लिए कम लागत के कृत्रिम अंग बनाए जा सकेंगे

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signing of an MoU between ALIMCO & Ottobock India,-finaljustice20-मई, 2015  देश में निशक्‍तजनों के लिए वाजिब दाम पर बड़े पैमाने पर कृत्रिम उपकरण बनाने के लिए सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय के निशक्‍तजन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्‍को) ने ओटोबोक इंडिया के साथ प्रौद्योगिकी स्‍थानांतरण और तकनीकी परामर्श सेवा समझौते पर हस्‍ताक्षर किए हैं। इस समझौते पर एलिम्‍को के अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. एस.आर. सरीन और ओटोबोक इंडिया के निदेशक राल्‍फ स्‍टुच ने निशक्‍तजन अधिकारिता विभाग के सचिव लव वर्मा की उपस्थिति में आज हस्‍ताक्षर किए।

इस अवसर पर विभाग के संयुक्‍त सचिव अविनाश कुमार अवस्‍थी ने कहा कि वित्‍त मंत्री ने बजट भाषण में निशक्‍तजनों को कृत्रिम अंग और अन्‍य सहायक उपकरण की खरीद में सहायता देने की योजना की घोषणा की थी। इस घोषणा के अनुरूप विभाग ने कई आधुनिक और श्रेष्‍ठ प्रौद्योगिकी के उपकरणों को मंजूरी दी है और इस काम को आगे बढ़ाने की पहल की है।

निशक्‍तजनों के पुनर्वास के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी को अपनाने के वास्‍ते अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग और भागीदारी की आवश्‍यकता महसूस करते हुए एलिम्‍को ने जर्मनी की बहुराष्‍ट्रीय कंपनी ओटोबोक के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है। समझौते के अंतर्गत एलिम्‍को और ओटोबोक वाजिब दाम पर आधुनिक कृत्रिम अंग और उपकरण भारत में बनाए जाने का प्रावधान है। समझौते के अनुसार पाँच वर्ष की अवधि में नई पीढ़ी के कम से कम 60 हजार कृत्रिम अंग बनाए जाएंगे। ओटोबोक इस काम के लिए तकनीकी परामर्श देगा। इस काम से प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया अभियान में सहयोग मिलेगा।

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